عَنْ بُرَيْدَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ حَلَفَ بِالْأَمَانَةِ فَلَيْسَ مِنَّا».
बुरैदा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने अमानत की क़सम खाई, वह हममें से नहीं है।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अमानत की क़सम खाने से मना और सावधान किया है तथा बताया है कि ऐसा करने वाला हम में से नहीं है।
फ़ायदे
अल्लाह को छोड़ किसी और की क़सम खाना हराम है, जिसमें अमानत की क़सम खाना भी है। अमानत की क़सम खाना छोटा शिर्क है।
अमानत के अंदर अनुसरण, इबादत, किसी के पास सुरक्षा के लिए रखा गया सामान, नक़दी और अमान देना आदि शामिल हैं।
क़सम उसी समय मान्य होगी, जब अल्लाह की, उसके किसी नाम की या उसके किसी गुण की खाई जाए।
ख़त्ताबी कहते हैं : यह नापसंदीदगी इस बिना पर हो सकती है कि शरीयत ने अल्लाह और उसके गुणों की क़सम खाने का आदेश दिया है और अमानत उसका गुण नहीं, बल्कि उसका आदेश और उसकी ओर से अनिवार्य किया हुआ एक कार्य है। अतः इससे मना कर दिया गया, क्योंकि यह अल्लाह के आदेशों और उसके अनिवार्य किए हुए कार्यों को उसके नामों एवं गुणों के समान बताने जैसा है।
हवाला
سنن أبي داود (5/ 155) (3253).
مسند أحمد (38/ 82) (22980).
نزهة المتقين، لمجموعة من الباحثين (2/ 1166).
بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (3/ 201).
مشكاة المصابيح، للتبريزي (2/ 1020).
شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (6/ 452).
معالم السنن، للخطابي (4/ 46).
سبل السلام، الصنعاني (2/ 550 ).
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com