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तशरीह के साथ हदीसें

इस्लाम से निष्कासित करने वाली बातें

7 हदीसें

जादू का उपचार केवल जादूगर ही कर सकता है।

ورُوي عن الحسن أنه قال: "لا يحل السحر إلا ساحر".
तथा हसन बसरी से नक़ल किया जाता है कि उन्होंने कहाः जादू का उपचार केवल जादूगर ही कर सकता है।
इसे इब्ने अबी शैबा ने रिवायत किया है। - इसे ख़त्ताबी ने रिवायत किया है ।दर्जाह़सन
तशरीह

النشرة' (अल-नुशरा) का अर्थ है, जादू का उपचार। हसन बसरी के इस कथन से मालूम होता है कि जादू का इलाज सिरे से वर्जित है, क्योंकि उनके अनुसार जादू का उपचार वही कर सकता है, जिसके पास जादू का ज्ञान हो और जादू के ज़रिए जादू का इलाज शैतानी अमल है। लेकिन इब्न अल-क़य्यिम ने इस विषय पर विस्तारपूर्वक लिखा है, जिसका सार यह है कि जायज़ दवाओं द्वारा तथा क़ुरआन की आयतों को पढ़कर उसका इलाज किया जा सकता है। हाँ, जादू द्वारा उसका उपचार हराम है।

हवाला

1-فتح المجيد شرح كتاب التوحيد، مطبعة السنة المحمدية، القاهرة، مصر، الطبعة: السابعة، 1377هـ - 1957م. 2-القول المفيد على كتاب التوحيد، دار ابن الجوزي، المملكة العربية السعودية، الطبعة: الثانية, محرم، 1424هـ. 3-الملخص في شرح كتاب التوحيد، دار العاصمة الرياض، الطبعة: الأولى 1422هـ - 2001م. 4-الجديد في شرح كتاب التوحيد، مكتبة السوادي، جدة، المملكة العربية السعودية، الطبعة: الخامسة، 1424هـ - 2003م. 5-التمهيد لشرح كتاب التوحيد، دار التوحيد، تاريخ النشر: 1424هـ.

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उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने लिखा थाः हर जादूगर पुरुष एवं स्त्री को क़त्ल कर दो।

عن بَجَالَةَ بن عَبَدة قال: كتب عمر بن الخطاب: «أن اقتُلُوا كلّ ساحر وساحرة». قال: فقتلنا ثلاث سواحر. وعن ابن عمر رضي الله عنه : «أن حفصة سَحَرَتْها جاريتها فاعتَرَفَتْ بسِحْرها، فأمرت عبد الرحمن بن زيد فقتلها». وعن أبي عثمان النهدي: «أنه كان عند الوليد رجل يلعب فذبح إنسانًا، وأبان رأسه؛ فعَجِبْنا، فأعاد رأسه، فجاء جُنْدُبٌ الْأَزْديّ فقتله».
बजाला बिन अबदा कहते हैं कि उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने लिखा थाः हर जादूगर पुरुष एवं स्त्री को क़त्ल कर दो। वह कहते हैंः अतः, हमने तीन जादूगरनियों को मार डाला। और अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि हफ़सा (रज़ियल्लाहु अंहा) को उनकी दासी ने जादू कर दिया और बाद में जादू करने का एतिराफ़ भी कर लिया तो अबदुर रहमान बिन ज़ैद के आदेश पर उसे क़त्ल कर दिया गया। और अबू उसमान नहदी कहते हैं कि वलीद के पास एक व्यक्ति था, जो जादू का खेल दिखाता था। उसने एक व्यक्ति को ज़बह करके उसके सिर को अलग कर दिया। हमें बड़ा आश्चर्य हुआ। फिर दोबारा उसे जोड़ भी दिया। बाद में जुंदुब अज़दी आए और उसे क़त्ल कर दिया।
इसे बैहक़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे मालिक ने रिवायत किया है।दर्जासारी रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़
तशरीह

चूँकि जादू एक बड़ी सामाजिक बीमारी है और उससे हत्या, नाहक तरीके से लोगों के धन पर क़ब्ज़ा करने और पति-पत्नी के बीच जुदाई डालने जैसी बड़ी-बड़ी बुराइयाँ और अप्रिय परिणाम सामने आते हैं तथा इसके कुछ रूप कुफ़्र तक भी पहुँचे हुए हैं, जिनमें शैतान का सहयोग और उसकी निकटता प्राप्त की जाती है, इसलिए अल्लाह ने इसका स्थायी एवं संपूर्ण उपचार यह बताया है कि जादूगर को क़त्ल कर दिया जाए, ताकि समाज की शिष्टता एवं स्वच्छता को सुरक्षित रखा जा सके। यही कारण है कि सहाबा (रज़ियल्लाहु अनहुम) ने यही करके दिखाया है।

हवाला

موطأ الإمام مالك، مالك بن أنس ، المحقق: بشار عواد معروف - محمود خليل، الناشر: مؤسسة الرسالة، سنة النشر: 1412 هـ. سنن أبي داود-المحقق: محمد محيي الدين عبد الحميد-الناشر: المكتبة العصرية، صيدا – بيروت. التاريخ الكبير، محمد بن إسماعيل البخاري، الطبعة: دائرة المعارف العثمانية، حيدر آباد - الدكن، طبع تحت مراقبة: محمد عبد المعيد خان. معجم لغة الفقهاء، محمد رواس قلعجي - حامد صادق قنيبي، الناشر: دار النفائس للطباعة والنشر والتوزيع، الطبعة: الثانية، 1408 هـ - 1988. ملخص في شرح كتاب التوحيد، للشيخ صالح الفوزان دار العاصمة الرياض، الطبعة: الأولى 1422هـ- 2001م. الجديد في شرح كتاب التوحيد، للشيخ محمد بن عبد العزيز القرعاوي، مكتبة السوادي، جدة، المملكة العربية السعودية، الطبعة: الخامسة. 1424هـ/2003م. فتح المجيد شرح كتاب التوحيد، عبد الرحمن بن حسن، المحقق: محمد حامد الفقي، الناشر: مطبعة السنة المحمدية، القاهرة، مصر، الطبعة: السابعة، 1377هـ/1957م. التمهيد لشرح كتاب التوحيد، للشيخ صالح آل الشيخ، دار التوحيد، تاريخ النشر : 1424هـ. شمس العلوم ودواء كلام العرب من الكلوم، نشوان بن سعيد الحميرى، المحقق: د حسين بن عبد الله العمري - مطهر بن علي الإرياني - د يوسف محمد عبدالله، الناشر: دار الفكر المعاصر، بيروت - لبنان، دار الفكر، دمشق - سورية، الطبعة: الأولى، 1420 هـ - 1999 م. مختار الصحاح، زين الدين أبو عبد الله محمد بن أبي بكر الرازي ،المحقق: يوسف الشيخ محمد، الناشر: المكتبة العصرية، الدار النموذجية، بيروت - صيدا-الطبعة: الخامسة، 1420هـ / 1999م. سلسلة الأحاديث الضعيفة والموضوعة وأثرها السيئ في الأمة، محمد ناصر الدين، الألباني، دار النشر: دار المعارف، الرياض، الممكلة العربية السعودية، الطبعة: الأولى، 1412 هـ / 1992 م. السنن الكبرى، أحمد بن الحسين أبو بكر البيهقي، المحقق: محمد عبد القادر عطا، الناشر: دار الكتب العلمية، بيروت - لبنات، الطبعة: الثالثة، 1424 هـ - 2003 م. كتاب التوحيد للإمام محمد بن عبد الوهاب تحقيق: دغش العجمي.

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वह व्यक्ति हममें से नहीं, जिसने अपशगुन लिया अथवा जिसके लिए अपशगुन लिया गया, जिसने ओझा वाला कार्य किया अथवा ओझा वाला कार्य किसी से करवाया, जिसने जादू किया या जादू करवाया

عن عمران بن حصين رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «‌لَيْسَ ‌مِنَّا ‌مَنْ ‌تَطَيَّرَ أَوْ تُطُيِّرَ لَهُ، أَوْ تَكَهَّنَ أَوْ تُكُهِّنَ لَهُ، أَوْ سَحَرَ أَوْ سُحِرَ لَهُ، وَمَنْ عَقَدَ عُقْدَةً، وَمَنْ أَتَى كَاهِنًا فَصَدَّقَهُ بِمَا يَقُولُ فَقَدْ كَفَرَ بِمَا أُنْزِلَ عَلَى مُحَمَّدٍ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ».
इमरान बिन हुसैन रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा: अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: "वह व्यक्ति हममें से नहीं, जिसने अपशगुन लिया अथवा जिसके लिए अपशगुन लिया गया, जिसने ओझा वाला कार्य किया अथवा ओझा वाला कार्य किसी से करवाया, जिसने जादू किया या जादू करवाया। तथा जिसने कोई गिरह लाई और जो किसी ओझा के पास गया और उसकी बात को सच माना, उसने उस शरीयत का इनकार किया, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारी गई है।"
इसे बज़्ज़ार ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कुछ काम करने वाले अपनी उम्मत के कुछ लोगों को यह कहकर चेतावनी दी है कि वे हममें से नहीं हैं। ये काम कुछ इस प्रकार हैं: 1- ऐसा व्यक्ति जिसने अपशगुन लिया या जिसके लिए अपशगुन लिया गया। अरब के लोग कोई काम शुरू करते समय पक्षी को छोड़ते थे। पक्षी अगर दाएँ उड़ता, तो अच्छा शगुन लेते और जिस काम का इरादा होता, उसे करते। लेकिन अगर बाएँ उड़ता, तो बुरा शगुन लेते और जो काम करना चाहते, उसे छोड़ देते। यह काम न तो खुद करना जायज़ है और न किसी से करवाना जायज़ है। इसके अंदर किसी भी चीज़ से लिया जाने वाला हर अपशगुन दाख़िल है। चाहे उस चीज़ का संबंध सुनने से हो या देखने से हो, अथवा वह चीज़ चिड़िया हो, जानवर हो, विकलांग लोग हों, संख्या हों या दिन आदि हों, सभी अपशगुन अमान्य है। 2- ऐसा व्यक्ति जिसने खुद ओझा वाला कार्य किया या किसी से ओझा वाला कार्य करवाया। जिसने नक्षत्रों आदि का सहारा लेकर ग़ैब की बात जानने का दावा किया या फिर किसी ऐसे व्यक्ति के पास गया, जो ग़ैब की बात जानने का दावा करता हो और उसकी बात को सच भी माना, उसने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारी गई शिक्षाओं के प्रति अविश्वास व्यक्त किया। 3- ऐसा व्यक्ति जिसने किसी को लाभ पहुँचाने या किसी की हानि करने के उद्देश्य से जादू किया या जादू करवाया या नाजायज़ मंत्र आदि का उच्चारण करके धागा आदि पर गिरह लगाई तथा फूँक मारी।

फ़ायदे
  1. अल्लाह पर भरोसा करने तथा अल्लाह की बनाई हुई तक़दीर पर विश्वास रखने की अनिवार्यता और अपशगुन, जादू तथा कहानत (ओझा का काम) आदि करने या किसी से करवाने का हारम होना।
  2. ग़ैब की बात जानने का दावा करना शिर्क तथा तौहीद के विपरीत है।
  3. ओझाओं के द्वारा कही गई बात को सच मानना और उनके पास जाना हराम है। इसी संदर्भ में हथेली और प्याली को पढ़ना तथा इनसान के सौभाग्य एवं दुर्भाग्य को नक्षत्रों से जोड़ना आदि भी शामिल हैं, यद्यपि यह सब कार्य जानकारी के लिए किए गए हों।
हवाला

مسند البزار = البحر الزخار (9/ 52) (3578). شرح السنة للبغوي (12/ 182). مجموع الفتاوى (35/ 173). القول المفيد على كتاب التوحيد، لابن عثيمين (1/ 543). التمهيد لشرح كتاب التوحيد، لصالح آل الشيخ (ص315). الجديد في شرح كتاب التوحيد، لمحمد القرعاوي (ص242). الملخص في شرح كتاب التوحيد، لصالح الفوزان (ص217).

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जिसने नक्षत्र के ज्ञान का कुछ अंश प्राप्त किया, उसने जादू का कुछ अंश प्राप्त किया। वह आगे नक्षत्र के बारे में जितना ज्ञान प्राप्त करता जाएगा, जादू के बारे में उतना ही ज्ञान बढ़ाता जाएगा।

عن ابن عباس رضي الله عنهما قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «من اقتبَسَ علْمًا مِنَ النُّجُومِ اقْتبَسَ شُعبَة مِن السِّحرِ، زادَ ما زادَ».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने नक्षत्र के ज्ञान का कुछ अंश प्राप्त किया, उसने जादू का कुछ अंश प्राप्त किया। वह आगे नक्षत्र के बारे में जितना ज्ञान प्राप्त करता जाएगा, जादू के बारे में उतना ही ज्ञान बढ़ाता जाएगा।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि जिसने सितारों तथा नक्षत्रों का ज्ञान एवं उनकी गतियों, प्रवेश करने तथा निकलने के द्वारा धरती में भविष्य में घटने वाली घटनाओं, जैसे जीवन, मरन एवं बीमारी आदि के जानने का ज्ञान प्राप्त किया, उसने जादू का एक भाग सीखा। इन्सान यह ज्ञान जितना ज़्यादा प्राप्त करता जाएगा, वह जादू का उतना ज़्यादा ज्ञान प्राप्त करता जाएगा।

फ़ायदे
  1. नक्षत्रों की गतिविधियों को देखकर भविष्यवाणी करने का हराम होना, क्योंकि यह भी ग़ैब का दावा करने में शामिल है।
  2. नक्षत्रों को देखकर भविष्यवाणी करना भी एक प्रकार का जादू है, जो तौहीद के विरुद्ध है। जबकि दिशा, क़िबला, मौसम एवं महीना जानने के लिए सितारों को देखना जायज़ है।
  3. इन्सान नक्षत्रों को देखकर भविष्यवाणी करने का ज्ञान जितना ज़्यादा प्राप्त करता जाएगा, वह जादू का ज्ञान उतना ज़्यादा प्राप्त करता जाएगा।
  4. सितारों के तीन फ़ायदों का वर्णन अल्लाह ने क़ुरआन में किया है; आकाश की शोभा, रासता मालूम करने के निशान और शैतानों को मार भगाने का साधन।
हवाला

سنن أبي داود (6/ 50) (3905). سنن ابن ماجه (4/ 670) (3726). مسند أحمد (3/ 454) (2000). الجديد في شرح كتاب التوحيد، للقرعاوي (ص230). الملخص في شرح كتاب التوحيد، للفوزان (ص206).

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क्या तुम्हें मालूम है कि तुम्हारे रब ने क्या कहा?” लोगों ने कहा : अल्लाह और उसके रसूल बेहतर जानते हैं। (आपने फ़रमाया कि अल्लाह ने) फ़रमाया : “मेरे बंदों में से कुछ ने मुझपर ईमान लाने वाले और कुछ ने कुफ़्र करने वाले बनकर सुबह की

عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الجُهَنِيِّ رضي الله عنه أَنَّهُ قَالَ: صَلَّى لَنَا رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاةَ الصُّبْحِ بِالْحُدَيْبِيَةِ عَلَى إِثْرِ سَمَاءٍ كَانَتْ مِنَ اللَّيْلَةِ، فَلَمَّا انْصَرَفَ أَقْبَلَ عَلَى النَّاسِ، فَقَالَ: «هَلْ تَدْرُونَ مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ؟» قَالُوا: اللهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ، قَالَ: «أَصْبَحَ مِنْ عِبَادِي مُؤْمِنٌ بِي وَكَافِرٌ، فَأَمَّا مَنْ قَالَ: مُطِرْنَا بِفَضْلِ اللهِ وَرَحْمَتِهِ، فَذَلِكَ مُؤْمِنٌ بِي وَكَافِرٌ بِالْكَوْكَبِ، وَأَمَّا مَنْ قَالَ: بِنَوْءِ كَذَا وَكَذَا، فَذَلِكَ كَافِرٌ بِي وَمُؤْمِنٌ بِالْكَوْكَبِ».
ज़ैद बिन ख़ालिद जुहनी रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं : हुदैबिया में रात में बारिश होने के बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें लेकर फ़ज्र की नमाज़ अदा की। सलाम फेरने के बाद लोगों की ओर मुंह करके फ़रमाया : “क्या तुम्हें मालूम है कि तुम्हारे रब ने क्या कहा?” लोगों ने कहा : अल्लाह और उसके रसूल बेहतर जानते हैं। (आपने फ़रमाया कि अल्लाह ने) फ़रमाया : “मेरे बंदों में से कुछ ने मुझपर ईमान लाने वाले और कुछ ने कुफ़्र करने वाले बनकर सुबह की। जिसने कहा कि अल्लाह की कृपा व रहमत से हमपर बारिश हुई तो वह मुझपर ईमान लाने वाला और नक्षत्रों को नकारने वाला है और जिसने कहा कि अमुक-अमुक नक्षत्रों के कारण हमपर बारिश हुई तो वह मेरे साथ कुफ़्र करने वाला और नक्षत्रों पर ईमान लाने वाला ठहरा।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हुदैबिया के स्थान पर सुबह की नमाज़ पढ़ी। हुदैबिया मक्का के निकट एक बस्ती का नाम है। उस दिन रात को बारिश हुई थी। जब आपने नमाज़ पूरी कर ली और सलाम फेरा तो लोगों की ओर मुँह किया और उनसे पूछा : क्या तुम जानते हो कि तुम्हारे सर्वशक्तिमान एवं महान रब ने क्या कहा है? लोगों ने उत्तर दिया : अल्लाह और उसका रसूल बेहतर जानते हैं। यह सुन आपने कहा : अल्लाह ने बताया है कि वर्षा होते समय लोग दो प्रकार में बँट जाते हैं। कुछ लोग अल्लाह पर विश्वास रखते हैं और कुछ लोग उसके प्रति अविश्वास व्यक्त करते हैं। ऐसे में जिसने कहा कि हमें अल्लाह के अनुग्रह और उसकी दया से बारिश मिली और इस तरह उसने बारिश देने वाला अल्लाह को माना, वह अल्लाह पर विश्वास रखने वाला है और नक्षत्रों के प्रति अविश्वास व्यक्त करने वाला है। इसके विपरीत जिसने कहा कि हमें अमुक नक्षत्र के कारण बारिश मिली, वह अल्लाह के प्रति अविश्वास व्यक्त करने वाला और नक्षत्र पर विश्वास रखने वाला है। याद रहे कि इस तरह से नक्षत्र की ओर बारिश की निस्बत करना छोटा कुफ़्र है, क्योंकि अल्लाह ने नक्षत्र को बारिश का शरई एवं सांसारिक सबब नहीं बनाया है। लेकिन जिसने बारिश होने आदि लौकिक घटनाओं का संबंध यह समझकर नक्षत्रों के निकलने या डूबने की से जोड़ा कि यही वास्तविक कारक हैं, तो वह बड़ा कुफ़्र करने वाला है।

फ़ायदे
  1. बारिश होने के बाद यह कहना मुसतहब है कि हमें अल्लाह के अनुग्रह और उसकी रहमत से बारिश मिली।
  2. जिसने बारिश बरसाने आदि घटनाओं का संबंध नक्षत्रों से जोड़ा और उनको इन घटनाओं का कारक माना, उसने बड़ा कुफ़्र किया। लेकिन अगर उसे केवल सबब माना, तो उसने छोटा शिर्क किया, क्योंकि यह न तो शरई सबब है और न भौतिक।
  3. नेमत की जब नाशुक्री हो, तो वह अविश्वास का सबब बन जाती है और जब उसका शुक्र अदा किया जाए, तो वह ईमान का सबब बन जाती है।
  4. यह कहना मना है कि हमें अमुक नक्षत्र के कारण बारिश मिली, चाहे इससे मुराद समय ही क्यों न लिया गया हो। ऐसा दरअसल शिर्क का द्वार बंद करने के लिए किया गया है।
  5. नेमतों की प्राप्ति और अप्रिय चीज़ों से बचाव के संबंध में दिल का संबंध अल्लाह से होना ज़रूरी है।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 169) (846)، صحيح مسلم (1/ 83) (71)، البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (2/ 484)، المفهم لما أشكل من تلخيص كتاب مسلم (1/ 260).

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आदमी के बीच तथा कुफ़्र एवं शिर्क के बीच की रेखा नमाज़ छोड़ना है।

عن جابرٍ رضي الله عنه قال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول: «إِنَّ بَيْنَ الرَّجُلِ وَبَيْنَ الشِّرْكِ وَالْكُفْرِ تَرْكَ الصَّلَاةِ».
जाबिर रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना है : "आदमी के बीच तथा कुफ़्र एवं शिर्क के बीच की रेखा नमाज़ छोड़ना है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़र्ज़ नमाज़ छोड़ने से सावधान किया है और बताया है कि इन्सान तथा कुफ़्र एवं शिर्क में पड़ने के बीच जो चीज़ खड़ी है, वह है नमाज़ छोड़ना। नमाज़ इस्लाम का दूसरा स्तंभ और एक बहुत ही महत्वपूर्ण फ़रीज़ा (कर्तव्य) है। जिसने इसे इसकी अनिवार्यता का इनकार करते हुए छोड़ दिया, वह काफ़िर हो गया, इस बात पर सारे मुसलमान एकमत हैं। अगर किसी ने सुस्ती के कारण भी इसे पूरे तौर पर छोड़ दिया, तो वह भी काफ़िर है। इस बात पर सहाबा का इजमा (एकमत) नक़ल किया गया है। लेकिन अगर कभी छोड़ दे और कभी पढ़ ले, तो वह इस सख़्त चेतावनी की ज़द में होगा।

फ़ायदे
  1. नमाज़ तथा उसकी पाबंदी करने का महत्व। क्योंकि यही कुफ़्र एवं ईमान के बीच अंतर करने वाली चीज़ है।
  2. नमाज़ छोड़ने तथा उसे नष्ट करने पर सख़्त चेतावनी।
हवाला

صحيح مسلم (1/ 88) (82)، المفهم لما أشكل من تلخيص كتاب مسلم (1/ 271)، البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (2/ 622).

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वह वचन, जो हमारे और उनके बीच है, नमाज़ है। जिसने इसे छोड़ दिया, उसने कुफ़्र किया।

عن بريدة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «إِنَّ الْعَهْدَ الَّذِي بَيْنَنَا وَبَيْنَهُمُ الصَّلَاةُ، فَمَنْ تَرَكَهَا فَقَدْ كَفَرَ».
बुरैदा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "वह वचन, जो हमारे और उनके बीच है, नमाज़ है। जिसने इसे छोड़ दिया, उसने कुफ़्र किया।"
इसे तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि मुसलमानों और दूसरों अर्थाथ काफ़िरों और मुनाफ़िकों के बीच जो वचन है, वह नमाज़ है। जिसने नमाज़ छोड़ दी, उसने कुफ़्र किया।

फ़ायदे
  1. नमाज़ का महत्व तथा यह कि नमाज़ मोमिन तथा काफ़िर के बीच अंतर करने वाली चीज़ है।
  2. इस्लाम के अहकाम इन्सान के ज़ाहिरी हाल से साबित होंगे, बातिन से नहीं।
हवाला

سنن النسائي (1/ 231) (463)، سنن الترمذي (4/ 365) (2621)، سنن ابن ماجه (2/ 181) (1079)، مسند أحمد (38/ 20) (22937)، فيض القدير (4/ 395)، ذخيرة العقبى في شرح المجتبى (6/ 192) (6/ 193).

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यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com