अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बयान फ़रमाया है कि शुभचिंतन, दया, परस्पर सहयोग, मदद और किसी भी हानि से होने वाले कष्ट की अनुभूति की दृष्टि से मुसलमानों का हाल एक शरीर के जैसा होना चाहिए कि जब शरीर का एक अंग बीमार होता है, उसके साथ पूरा शरीर रात जागता और बुख़ार से तपता रहता है।
- मुसलमानों के अधिकारों को महत्व देना चाहिए और उनको एक-दूसरे की मदद करने और नर्मी भरा व्यवहार करने की प्रेरणा देनी चाहिए।
- ईमान वालों के बीच प्रेम एवं सहयोग की भावना रहनी चाहिए।
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