عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: بَعَث رسول الله صلى الله عليه وسلم عشرة رهْط عيْنا سرية، وأمّر عليها عاصم بن ثابت الأنصاري رضي الله عنه فانطلقوا حتى إذا كانوا بالهَدْأة؛ بين عُسْفان ومكة؛ ذكروا لِحَيٍ من هُذَيْل يقال لهم: بنو لحيَان، فنَفَروا لهم بقريب من مائة رجل رام، فاقتصُّوا آثارهم، فلما أحسَّ بهم عاصم وأصحابه، لَجَأوا إلى موضع، فأحاط بهم القوم، فقالوا: انزلوا فأَعْطُوا بأيديكم ولكم العهد والميثاق أن لا نقتل منكم أحدا. فقال عاصم بن ثابت: أيها القوم، أما أنا، فلا أَنْزل على ذِمَّة كافر: اللهم أخبِرْ عَنَّا نبيك صلى الله عليه وسلم فرموهم بالنّبْل فقتلوا عاصما، ونزل إليهم ثلاثة نفر على العهد والميثاق، منهم خُبَيب، وزيد بن الدِّثِنَة ورجل آخر. فلما اسْتَمْكَنوا منهم أطلقوا أوتار قِسِيِّهم، فربطوهم بها. قال الرجل الثالث: هذا أول الغَدْر والله لا أصحبكم إن لي بهؤلاء أُسْوة، يريد القتلى، فجرُّوه وعالَجوه، فأبى أن يصحبهم، فقتلوه، وانطلقوا بخُبيب، وزيد بن الدِّثِنِة، حتى باعوهما بمكة بعد وقعة بدر؛ فابتاع بنو الحارث بن عامر بن نوفل بن عبد مُناف خُبيبا، وكان خُبيب هو قَتَل الحارث يوم بدر. فلبث خُبيب عندهم أسيرا حتى أجْمعوا على قتله، فاستعار من بعض بنات الحارث موسى يستَحِدُّ بها فأعارته، فدَرَج بُنَيٌّ لها وهي غافلة حتى أتاه، فوجدَتْه مُجْلِسه على فخذه والمُوسى بيده، ففزعت فزعة عرفها خُبيب. فقال: أتخشين أن أقتله ما كنت لأفعل ذلك! قالت: والله ما رأيت أسيرا خيرا من خُبيب، فوالله لقد وجدته يوما يأكل قِطْفا من عنب في يده وإنه لموثَق بالحديد وما بمكة من ثمرة، وكانت تقول: إنه لَرِزْق رَزَقه الله خبيبا. فلما خرجوا به من الحرم ليقتلوه في الحِلِّ، قال لهم خُبيب: دعوني أصلِّي ركعتين، فتركوه، فركع ركعتين فقال: والله لولا أن تحسبوا أن ما بي جَزَع لزدتُ: اللهم أحْصِهم عددا، واقتلهم بِدَدَا، ولا تُبْقِ منهم أحدا. وقال:
فلسْتُ أُبالي حين أُقتَل مسلما... على أي جنْب كان لله مصرعي
وذلك في ذات الإله وإن يشأْ... يباركْ على أوصال شِلْوٍ مُمَزَّع.
وكان خُبيب هو سَنَّ لكل مسلم قُتِل صْبرا الصلاة. وأخبر - يعني: النبي صلى الله عليه وسلم أصحابه يوم أصيبوا خبرهم، وبعث ناس من قُريش إلى عاصم بن ثابت حين حُدِّثُوا أنه قُتل أن يُؤتوا بشيء منه يُعرف، وكان قتل رجلا من عظمائهم، فبعث الله لعاصم مثل الظُلَّة من الدَّبْرِ فحَمَتْه من رُسُلهم، فلم يقدروا أن يقطعوا منه شيئا.
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दस लोगों का के एक सैन्य दल जसूसी के लिए भेजा और आसिम बिन साबित अंसारी (रज़ियल्लाहु अंहु) को उसका प्रमुख बनाया। जब वह लोग उसफ़ान एवं मक्का के बीच हदआ नामी स्थान तक पहूँचे, तो उनके पहुँचने की सूचना हुज़ैल क़बीले की शाखा बनू लेहयान को मिल गई और उनके लगभग सौ तीरंदाज़ उनपर आक्रमण करने के उद्देश्य से निकल पड़े तथा उनका पीछा करने लगे। जब आसिम और उनके साथियों को इसकी भनक मिली, तो उन्होंने एक स्थान में शरण ले ली। तब शत्रुओं ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और कहा कि तुम उतरकर खुद को हमारे हवाले कर दो, हम तुम्हें वचन देते हैं कि हम तुममें से किसी का वध नहीं करेंगे। मगर आसिम (रज़ियल्लाहु अंहु) ने कहाः ऐ मेरे साथियो, जहाँ तक मेरी बात है, मैं किसी काफ़िर की सुरक्षा पर नीचे नहीं उतरूँगा। ऐ अल्लाह, हमारी इस दुर्धटना की सूचना अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दे देना। चुनांचे उन लोगों ने तीर बरसाया और आसिम (रज़ियल्लाहु अंहु) को शहीद कर दिया। जबकि तीन लोग उनके वचन पर भरोसा करते हुए नीचे उतर आए, जिनमें ख़ुबैस, ज़ैद बिन दसिन्ना और एक अन्य व्यक्ति शामिल थे। जब यह तीन लोग उनके क़ाबू में आ गए, तो उन्होंने उनके धनुष की प्रत्यंचा तोड़कर उन्हें उससे बाँध दिया। यह देख तीसरे व्यक्ति ने कहाः यह पहला धोखा है। अल्लाह की क़सम, मैं तुम्हारे साथ नहीं जाऊँगा। मेरे लिए यह शहीद होने वाले लोग आदर्श की हैसियत रखते हैं। चुनांचे, उन लोगों ने उनको खींचा और मुक़ाबला किया, लेकिन उन्होंने साथ जाने से इनकार कर दिया। अंततः उन्होंने उनको मार डाला। फिर वे ख़ुबैब तथा ज़ैद बिन दसिन्ना को ले गए और बद्र युद्ध के बाद दोनों को मक्का में बेच दिया। ख़ुबैब (रज़ियल्लाहु अंहु) को बनू हारिस बिन आमिर बिन नौफ़ल बिन अब्दे मुनाफ़ ने ख़रीद लिया। दरअसल, ख़ुबैब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने बद्र युद्ध के दिन हारिस का कत्ल किया था। ख़ुबैब उनके यहाँ क़ैदी की हैसियत से रहे, यहाँ तक कि उन लोगों उनको शहीद करने का निश्चय कर लिया। फिर ऐसा हुआ कि खुबैब ने हारिस की एक बेटी से सफ़ाई के लिए उस्तरा माँगा और उसने उनको उस्तरा लाकर दिया। इसी बीच उसकी बेख़बरी में उसका एक छोटा-सा बच्चा उनके पास आ गया। बच्चे की माँ ने जैसे ही देखा कि बच्चा उनकी रान पर बैठा है और उस्तरा उनके हाथ में है, तो वह बुरी तरह घबरा गई, जिसे ख़ुबैब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने महसूस कर लिया। चुनांचे वह बोलेः क्या तुम डरती हो कि मैं उसे मार दूँगा? मैं ऐसा नहीं कर सकता। वह कहती हैः अल्लाह की क़सम, मैंने ख़ुबैब से अच्छा क़ैदी नहीं देखा। अल्लाह की क़सम, मैंने उन्हें एक दिन देखा कि वह हाथ में अंगूर का गुच्छा लिए अंगूर खा रहे हैं, हालाँकि उन्हें लोहे की ज़ंजीरों से जकड़कर रखा गया था और मक्का में उस समय कोई फल नहीं था। वह कहा करती थीः दरअसल, यह अल्लाह की ओर से प्राप्त रोज़ी थी, जो ख़ुबैब को दी गई थी। जब लोग उन्हें लेकर हरम से निकले, ताकि हरम क्षेत्र के बाहर क़त्ल कर दें, तो ख़ुबैब ने उनसे कहाः मुझे दो रकात नमाज़ पढ़ने दो। उन लोगों ने उनको कुछ देर के लिए छोड़ा, तो दो रकात नमाज़ पढ़ी और फ़रमायाः अल्लाह की क़सम, अगर तुम यह न समझते कि मैं घबरा गया हूँ, तो मैं और अधिक नमाज़ पढ़ता। ऐ अल्लाह, इन्हें अच्छी तरह से गिन ले और इन्हें एक-एक करके मौत के घाट उतार दे और इनमें से किसी को जीवित न छोड़। तथा फ़रमायाः मुझे कोई परवाह नहीं, जब मैं इसलाम की अवस्था में क़त्ल किया जाऊँ कि अल्लाह के लिए किस पहलू के बल गिरता हूँ। यह सब कुछ उस अल्लाह के लिए है, जो अगर चाहे तो वह कटे हुए अलग-अलग टुकड़ों में बरकत दे दे। दरअसल, ख़ुबैब (रज़ियल्लाहु अंहु) ही थे, जिन्होंने हर मुसलमान के लिए, जो बाँधकर क़त्ल किया जाए, नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा जारी किया था। उधर, जिस दिन यह दुर्घटना हुई, उसी दिन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सहाबा को इसकी सूचना दे दी। क़ुरैश को जब पता चला कि आसिम बिन साबित शहीद कर दिए गए हैं, तो कुछ लोगों को भेजा कि उनके शरीर का कोई अंग काटकर ले आएँ, जो पहचान लिया जाए। दरअसल, आसिम (रज़ियल्लाहु अंहु) ने उनके एक प्रमुख व्यक्ति को मार दिया था। सो, अल्लाह ने आसिम (रज़ियल्लाहु अंहु) की सुरक्षा के लिए बादल की तरह (बड़ी संख्या में) मधुमक्खियों को भेज दिया, जिसने उन्हें कुरैश के भेजे हुए लोगों से बचा लिया और वे उनके शरीर का कोई अंग काट न सके।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
-صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ.
-كنوز رياض الصالحين, مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا, السعودية, الطبعة الأولى, 1430 هـ.
-نزهة المتقين شرح رياض الصالحين, مصطفى سعيد الخن، مصطفى البغا، محي الدين مستو، علي الشربجي، محمد أمين لطفي, مؤسسة الرسالة, سنة النشر: 1407 – 1987, رقم الطبعة: 14.
-شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426 هـ.
-بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م.
-رياض الصالحين، للنووي، تحقيق : ماهر الفحل. دار ابن كثير - بيروت. الطبعة الأولى 1428ه - 2007م.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «لم يتكلَّم في المهد إلا ثلاثة: عيسى ابن مريم، وصاحب جرَيج، وكان جُريج رجلًا عابِدا، فاتخذ صَوْمَعَة فكان فيها، فأتته أمه وهو يصلي، فقالت: يا جريج، فقال: يا رَبِّ أُمِّي وصلاتي فأقبل على صلاته فانْصَرفت. فلمَّا كان من الغَدِ أتَتْهُ وهو يصلي، فقالت: يا جُريج، فقال: أي رَبِّ أمِّي وصلاتي، فأقبل على صلاته، فلمَّا كان من الغَدِ أتَتْهُ وهو يصلي، فقالت: يا جُريج، فقال: أي رَبِّ أمِّي وصلاتي، فأقبل على صلاته، فقالت: اللَّهُمَّ لاَ تُمِتْهُ حتى يَنظر إلى وجوه المُومِسَاتِ. فتذاكر بَنُو إسرائيل جُريجا وعبادته، وكانت امرأة بَغِيٌّ يُتَمَثَّلُ بحُسنها، فقالت: إن شِئتم لأَفْتِنَنَّهُ، فتَعرَّضت له، فلم يَلتَفت إليها، فأتت راعِيا كان يَأوِي إلى صَوْمَعَتِهِ، فَأَمْكَنَتْه من نَفسِها فوقع عليها، فحملت، فلمَّا ولدت، قالت: هو من جُريج، فَأتَوْهُ فَاسْتَنْزَلُوهُ وهدَمُوا صَومَعتَه، وجَعَلوا يَضربونه، فقال: ما شَأنُكم؟ قالوا: زَنَيْتَ بهذه البَغِيِّ فولَدَت منك. قال: أين الصَّبي؟ فجاؤَوا به فقال: دَعوني حتى أُصلَّي، فصلَّى فلمَّا انْصرف أتى الصَّبي فَطَعن في بَطنه، وقال: يا غُلام مَنْ أبوك؟ قال: فلانٌ الراعي، فأقبلوا على جُريج يقبلونه ويَتمسَّحون به، وقالوا: نَبْنِي لك صَوْمَعَتَكَ من ذهب. قال: لا، أعِيدُوها من طين كما كانت، ففعلوا. وبينا صبي يَرضع من أُمِّهِ فمرَّ رجل راكب على دابة فَارِهة وَشَارَةٍ حسَنَة، فقالت أمه: اللهم اجعل ابْني مثل هذا، فَترك الثَّدْي وأقْبَلَ إليه فنَظَر إليه، فقال: اللَّهم لا تجعلني مثْلَه، ثم أقْبَلَ على ثَدْيه فجعل يَرتضع»، فكأني أنظر إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم وهو يَحكي ارتْضَاعه بِأصْبَعِهِ السَّبَّابَة في فِيه، فجعل يَمُصُّهَا، قال: «ومَرُّوا بجارية وهم يَضْرِبُونها، ويقولون: زَنَيْتِ سَرقت، وهي تقول: حَسبي الله ونعم الوكيل. فقالت أمه: اللَّهم لا تجعل ابني مِثلها، فترك الرَّضاع ونظر إليها، فقال: اللَّهم اجعلني مِثْلَها، فَهُنَالك تَرَاجَعَا الحديث، فقالت: مرَّ رجلٌ حَسَنُ الهَيْئَةِ ، فقلت: اللَّهم اجعل ابْنِي مِثْلَه، فقلت: اللَّهم لا تَجْعَلْنِي مِثْله، ومَرُّوا بهذه الأَمَة وهم يَضربونها ويقولون: زَنَيْتِ سَرقت، فقلت: اللَّهم لا تجعل ابني مِثلها، فقلت: اللَّهم اجعلني مِثلها؟! قال: إن ذلك الرَّجُل كان جبَّارا، فقلت: اللَّهم لا تجعلني مِثْله، وإن هذه يقولون: زَنَيْتِ، ولم تَزْنِ وسَرقْتِ، ولم تَسْرِقْ، فقلت: اللَّهم اجْعَلْنِي مِثْلَهَا».
अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः गोद में केवल तीन लोगों ने ही बात की है : ईसा बिन मरयम ने और जुरैज के मामले से संबंधित बच्चे ने। दरअसल, जुरैज एक आबिद था। वह एक आश्रम बनाकर उसीमें रहता था। एक दिन वह नमाज़ पढ़ रहा था कि उसकी माँ आई और बोली : ऐ जुरैज! तो उसने कहा : ऐ मेरे रब, एक ओर मेरी माँ है और एक ओर मेरी नमाज़! फिर वह नमाज़ में व्यस्त हो गया। अतः, उसकी माँ वापस लौट गई। दूसरे दिन फिर आई, तो फिर वह नमाज़ में व्यस्त था। उसने आवाज़ दी : ऐ जूरैज! तो जुरैज ने कहा : ऐ मेर रब! एक ओर मेरी माँ है, तो एक ओर मेरी नमाज़! चुनांचे उसने नमाज़ पढ़ना जारी रखा। फिर वह तीसरे दिन आई, तो आज भी वह नमाज़ में व्यस्थ था। उसने कहा : ऐ जुरैज! तो जुरैज कहा : ऐ मेरे रब! एक ओर मेरी माँ और एक ओर मेरी नमाज़। फिर वह नमाज़ में व्यस्त हो गया। इससे विचलित होकर उसकी माँ ने कहा : ऐ अल्लाह! तू इसे उस समय तक मृत्यु न देना, जब तक वह व्यभिचार में लिप्त स्त्रियों का मुँह न देख ले। चुनाँचे बनू इसराईल में जुरैज और उसकी इबादत के चर्चे होने लगे। उन दिनों, एक खूबसूरत व्यभिचारी स्त्री भी मौजूद थी, जिसकी सुंदरता की मिसाल दी जाती थी। उसने कहा : यदि तुम लोग चाहो, तो मैं उसे फ़ितने में डाल सकती हूँ। चुनाँचे उसने उसे रिझाने की कोशिश की, लेकिन उसने उसपर ध्यान नहीं दिया। अतः, वह एक चरवाहे के पास गई, जिसका जुरैज के आश्रम में आना-जाना था। फिर उससे व्यभिचार कराया और वह गर्भवती हो गई। जब बच्चा पैदा हुआ, तो कहने लगी कि यह जुरैज का बच्चा है। अतः, लोग जुरैज के पास आए और उसे आश्रम से निकालकर आश्रम को ढहा दिया तथा उसे मारने लगे। यह देख, उसने कहा : तुम लोग मुझे मार क्यों रहे हो? लोगों ने उत्तर दिया : तुमने इस व्यभिचारिणी से मुँह काला किया है और उसने तुम्हारे बच्चे को जन्म दिया है। उसने कहा : बच्चा कहाँ है? चुनाँचे लोगों ने बच्चे को हाज़िर कर दिया। अब उसने कहा : मुझे नमाज़ पढ़ने दो। जब नमाज़ पूरी हो गई, तो बच्चे के पास आया और उसके पेट में उँगली से चोट करते हुए बोला : ऐ बच्चा, तेरा पिता कौन है? बच्चे ने उत्तर दिया : अमुक चरवाहा। यह देख, लोग जुरैज को चूमने और उसके हाथ-पाँव छूने लगे और कहने लगे : हम तुम्हारा आश्रम सोने का बना देंगे। लेकिन उसने कहा : उसकी आवश्यकता नहीं है। उसे पहले की तरह मिट्टी से बना दो। चुनांचे लोगों ने उसी तरह का आश्रम बना दिया। एक बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा था कि एक व्यक्ति एक शानदार एवं सुंदर घोड़े पर सवार होकर गुज़रा। उसे देख, उसकी माँ ने कहा : ऐ अल्लाह, मेरे बच्चे को इसी के जैसा बना दे। इसपर उस बच्चे ने दूध छोड़कर उस आदमी की ओर देखा और कहा : ऐ अल्लाह, मुझे इसके न बनाना। इसके बाद वह दूध पीने लगा। वर्णनक्ता कहते हैं : मानो मैं आज भी अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को, अपनी तर्जनी को मुँह में रखकर तथा उसे चूसकर उस बच्चे के दूध पीने की कैफ़ियत बयान करते हुए देख रहा हूँ। फिर आगे फ़रमाया : “फिर लोग एक दासी को लेकर गुज़रे, जिसे वे मारते जाते थे और कहते जाते थे : तुमने व्यभिचार किया है, तुमने चोरी की है। जबकि वह कह रही थी : मेरे लिए अल्लाह ही काफ़ी है और वही बेहतरीन सहायक है। यह देख, उसकी माँ ने कहा : ऐ अल्लाह मेरे बेटे को इसके जैसा न बनाना। लेकिन उसने दूध पीना छोड़कर उसकी ओर देखा और कहा : ऐ अल्लाह मुझे उसीके जैसा बनाना। यहाँ दोनों माँ-बेटे ने आपस में बात की। माँ ने कहा : एक सुंदर व्यक्ति गुज़रा, तो मैंने कहा कि ऐ अल्लाह, मेरे बेटे को इसी जैसा बना दे, लेकिन तुमने कह दिया कि ऐ अल्लाह, मुझे इसके जैसा न बनाना। फिर कुछ लोग एक दासी को लेकर गुज़रे, जो उसे मारते जा रहे थे और कह रहे थे कि उमने व्यभिचार किया है और चोरी की है, तो मैंने कहा कि ऐ अल्लाह, मेरे बेटे को इसके जैसा न बनाना, लेकिन तुमने कह दिया कि ऐ अल्लाह मुझे इसी के जैसा बनाना। आख़िर इसका कारण क्या है? तो बच्चे ने कहा : वह व्यक्ति अत्याचारी था। अतः, मैंने कहा कि ऐ अल्लाह, मुझे उसके जैसा न बनाना, जबकि जिस स्त्री के बारे में लोग कह रहे थे कि उमने व्यभिचार तथा चोरी की है, उसने न व्यभिचार किया था और न ही चोरी की थी। इसीलिए मैंने कहा कि ऐ अल्लाह, मुझे उसके जैसा बनाना।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430 هـ.
بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م.
نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ، الطبعة الرابعة عشر 1407 هـ.
شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426 هـ.
رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل ، الطبعة: الأولى، 1428 هـ.
دليل الفالحين، تأليف: محمد بن علان، الناشر: دار الكتاب العربي، نسخة الإلكترونية ، لا يوجد بها بيانات نشر.
صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ.
صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
دروس وعبر من صحيح القصص النبوي، تأليف: شحاتة محمد صقر، الناشر: مكتبة دار العلوم، البحيرة، مصر.
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ: إِذَا حَدَّثْتُكُمْ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَأَنْ أَخِرَّ مِنَ السَّمَاءِ أَحَبُّ إِلَيَّ مِنْ أَنْ أَكْذِبَ عَلَيْهِ، وَإِذَا حَدَّثْتُكُمْ فِيمَا بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ فَإِنَّ الحَرْبَ خَدْعَةٌ، سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «يَأْتِي فِي آخِرِ الزَّمَانِ قَوْمٌ حُدَثَاءُ الأَسْنَانِ سُفَهَاءُ الأَحْلاَمِ، يَقُولُونَ مِنْ خَيْرِ قَوْلِ البَرِيَّةِ، يَمْرُقُونَ مِنَ الإِسْلاَمِ كَمَا يَمْرُقُ السَّهْمُ مِنَ الرَّمِيَّةِ، لاَ يُجَاوِزُ إِيمَانُهُمْ حَنَاجِرَهُمْ، فَأَيْنَمَا لَقِيتُمُوهُمْ فَاقْتُلُوهُمْ، فَإِنَّ قَتْلَهُمْ أَجْرٌ لِمَنْ قَتَلَهُمْ يَوْمَ القِيَامَةِ».
अली -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं : जब मैं तुमसे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हवाले से बात करूँ, तो आकाश से गिर जाना मुझे इस बात से अधिक प्रिय है कि आपके हवाले से झूठ बोलूँ। और जब तुमसे अपने और तुम्हारे बीच बात करूँ, तो जान लो कि युद्ध धोखा है। मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते सुना है : "आख़िरी ज़माने में ऐसे लोग पैदा हो जाएँगे, जो कम उम्र और मानसिक रूप से अपरिपक्व होंगे। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की अच्छी बात कहेंगे। इस्लाम से ऐसे निकल जाएँगे जैसे तीर शिकार से निकल जाता है। उनका ईमान उनके गले से नीचे नहीं जााएगा। इस तरह के लोग जहाँ मिल जाएँ, क़त्ल कर दो। इनका क़त्ल क़यामत के दिन क़त्ल करने वाले के लिए सवाब बनेगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अमीर अल-मोमिनीन अली बिन अबू तालिब -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि जब तुम लोग मुझे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की हदीस बयान करते हुए सुनोगे, तो मैं बिलकुल स्पष्ट अंदाज़ में बात करूँगा। न गोल-मोल बात करूँगा, न कुछ कहकर कुछ मुराद लूँगा और न छुपाऊँगा। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हवाले से झूठ बोलने की तुलना में आकाश से गिर जाना मेरे लिए कहीं अधिक आसान और हल्का है। लेकिन जब मैं बात अपने तथा लोगों के बीच की करूँ, तो युद्ध धोखा है, अतः मैं गोल-मोल बात करूँगा, और कुछ कहकर कुछ और मुराद लूँगा। तथा मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : आख़िरी ज़माने में कुछ कम उम्र तथा कम अक़्ल नौजवान पैदा हो जाएँगे, जो क़ुरान बहुत ज़्यादा पढ़ेंगे और उसके हवाले से बात करेंगे। वे इस्लाम और उसकी सीमा से उसी प्रकार निकल जाएँगे, जिस प्रकार तीर शिकार से निकल जाता है। उनका ईमान उनके गले से नीचे नहीं जाएगा। ये लोग जहाँ मिल जाएँ, उनका क़त्ल कर दो। क्योंकि क़यामत के दिन इनका क़त्ल करना क़त्ल करने वाले के लिए सवाब का कारण होगा।
फ़ायदे
- इस हदीस में ख़वारिज की कुछ विशेषताएँ बयान की गई हैं।
- इस हदीस में मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के नबी होने की एक बहुत बड़ी निशानी मौजूद है। आपने अपनी उम्मत के अंदर सामने आने वाली एक बात की सूचना दी थी, जो उसी तरह सामने आ गई, जैसे आपने बताई थी।
- युद्ध में अस्पष्ट और अप्रत्यक्ष भाषा का प्रयोग करना जायज़ है। युद्ध में धोखा अस्पष्ट भाषा का प्रयोग तथा घात लगाकर हमला करने आदि के माध्यम से किया जा सकता है, समझौते और सुरक्षा की गारंटी के उल्लंघन के माध्यम से नहीं, क्योंकि ऐसा करने से मना किया गया है।
- नववी हदीस के शब्दों "يقولون من خير قول البرية" के बारे में कहते हैं : इसका अर्थ है : वे बातें बज़ाहिर बड़ी अच्छी करेंगे। जैसे- उनका यह कहना कि निर्णय केवल अल्लाह का चलेगा या फिर उनका अल्लाह की किताब की ओर बुलाना आदि।
- इब्न-ए-हजर हदीस के शब्दों "لاَ يُجَاوِزُ إِيمَانُهُمْ حَنَاجِرَهُمْ" के बारे में कहते हैं : इसका मतलब यह है कि ईमान उनके दिलों में बैठा नहीं है। क्योंकि जो चीज़ गले में रुक जाए और आगे न बढ़े वह दिल तक नहीं पहुँचती।
- क़ाज़ी कहते हैं : उलेमा इस बात पर एकमत हैं जब ख़वारिज तथा इन जैसे बिदअती एवं सरकश लोग इमाम के विरुद्ध बग़ावत कर बैठें और आम मुसलमानों की मुख़ालफ़त पर उतर आएँ, तो उन्हें सावधान करने तथा समझाने-बुझाने के बाद उनसे युद्ध करना ज़रूरी होगा।
हवाला
صحيح البخاري (4/ 200) (3611).
صحيح مسلم (2/ 746) (1066).
النهاية في غريب الحديث والأثر (259)(866).
البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (20/ 264) (20/ 258).
إرشاد الساري لشرح صحيح البخاري (6/ 58).
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «خَيْرُكُمْ قَرْنِي، ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ، ثُمَّ الَّذِينَ يَلُونَهُمْ» قَالَ عِمْرَانُ: لاَ أَدْرِي أَذَكَرَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدُ قَرْنَيْنِ أَوْ ثَلاَثَةً، قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنَّ بَعْدَكُمْ قَوْمًا يَخُونُونَ وَلاَ يُؤْتَمَنُونَ، وَيَشْهَدُونَ وَلاَ يُسْتَشْهَدُونَ، وَيَنْذِرُونَ وَلاَ يَفُونَ، وَيَظْهَرُ فِيهِمُ السِّمَنُ».
इम्रान बिन हुसैन -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "तुम में सबसे उत्तम लोग मेरे ज़माने के लोग हैं, फिर वे जो उनके बाद आएँगे और फिर वे जो उनके बाद आएँगे।" इम्रान कहते हैं : मुझे नहीं पता कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बाद में दो ज़माने के लोगों का ज़िक्र किया या तीन ज़माने के लोगों का। नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "तुम्हारे बाद ऐसे लोग आएँगे, जो ख़यानत करेंगे और भरोसे के पात्र समझे नहीं जाएँगे, गवाही देने के लिए बुलाए नहीं जाएँगे फिर भी गवाही देंगे, मन्नत मानकर उसे पूरा नहीं करेंगे और उनके अंदर मोटापा आम हो जाएगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि किसी एक युग में जीवन बिताने वाले लोगों का सबसे उत्तम गिरोह लोगों का वह वर्ग है, जिसमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके सहाबा मौजूद थे। उसके बाद ईमान वालों का वह वर्ग है, जिसने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि को तो नहीं, लेकिन सहाबा किराम को पाया। उसके बाद का वर्ग तबा-ताबेईन का वर्ग है। इस हीदस में सहाबी को इसके बाद के वर्ग यानी चौथे वर्ग के बारे में संकोच है। उसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : निस्संदेह उनके बाद ऐसे लोग सामने आएँगे, जो ख़यानत करेंगे, जिसके कारण लोग उनपर भरोसा नहीं कर पाएँगे। उन्हें गवाही देने के लिए कहा जाए, इससे पहले ही गवाही देने के तैयार हो जाएँगे, मन्नत मानेंगे लेकिन मन्नत पूरी नहीं करेंगे, खाने-पीने के इतने रसिया होंगे कि ख़ूब मोटे नज़र आएँगे।
फ़ायदे
- यह दुनिया जबसे आबाद है, तबसे इसमें बसने वाले लोगों का सबसे उत्तम वर्ग वह वर्ग है, जिसमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके सहाबा मौजूद थे। सहीह बुख़ारी की एक हदीस में है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "आदम अलैहिस्सलाम की औलाद में से जितने भी बेहतरीन दौर (युग) आए, युग-युगांतर में अल्लाह ने मुझे उनमें से सबसे अच्छे युग में चुनकर भेजा; यहाँ तक कि मैं इसी दौर में पैदा हुआ जिसमें मैं हूँ।
- इब्न-ए-हजर कहते हैं : इस हदीस से मालूम होता है कि सहाबा ताबेईन से अफ़ज़ल थे और ताबेईन तबा-ताबेईन से अफ़ज़ल। लेकिन यह उत्कृष्टता सामूहिक रूप से है या व्यक्तिगत रूप से, यह शोध का विषय है। और दूसरा मत जमहूर का है।
- इस बात का इशारा कि इस्लाम के आरंभित तीन तबक़ों का अनुसरण ज़रूरी है। क्योंकि जिन लोगों का ज़माना अल्लह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के युग से निकट था, वे ज्ञान, प्रतिष्ठा तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के अनुसरण में कहीं आगे थे।
- नज़्र : शरई आदेशों एवं निषेधों को मानने के पाबंद व्यक्ति का अपने ऊपर नेकी का कोई ऐसा काम अनिवार्य कर लेना, जिसे शरीयत ने अनिवार्य न किया हो, किसी ऐसे कथन द्वारा जो इसका संकेत देता हो।
- ख़यानत, मन्नत पूरी न करने और दुनिया से दिल लगाए रहने की निंदा।
- गवाही के निवेदन के बिना गवाही देना उस समय निंदनीय है, जब हक़ वाले को पता हो कि अमुक व्यक्ति के पास मुझसे जुड़े हुए मामले की जानकारी है। अगर उसे पता न हो, तो बिना अनुरोध के दी गई गवाही इस हदीस में दायरे में आएगी : "क्या मैं तुम्हें न बताऊँ कि सबसे अच्छा गवाह कौन है? वह व्यक्ति जो गवाही देने के अनुरोध से पहले गवाही दे।" इस हदीस को इमाम मुस्लिम ने रिवायत किया है।
हवाला
صحيح البخاري (3/ 171) (2651).
صحيح مسلم (4/ 1964) (2535)، (3/ 1344) (1719).
النهاية في غريب الحديث والأثر (747).
نيل الأوطار (8/ 341).
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