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तशरीह के साथ हदीसें

पिछले नबी और रसूल अलैहिमुस्सलाम

23 हदीसें

तो क्या तुम मुझसे अरब क़बीलों के बारे में पूछ रहे हो? उनमें से जो लोग जाहिलियत काल में श्रेष्ठ थे, वे इसलाम में भी श्रेष्ठ हैं, जब इसलाम का ज्ञान प्राप्त कर लें।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قِيلَ: يا رسُول الله، مَن أَكرم النَّاس، قال: اتقاهم، فقالوا: لَيس عن هذا نَسأُلُك، قال: «فَيُوسُفُ نَبِيُّ الله ابنُ نَبِيِّ الله ابنِ نَبِيِّ الله ابنِ خَلِيلِ اللهِ» قالوا: لَيس عَن هذا نَسأَلُك، قال: «فعَن مَعَادِن العَرَب تسأَلُوني؟ خِيَارُهُم في الجاهِليَّة خِيَارُهُم في الإِسلام إذا فَقُهُوا».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि किसी ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, सबसे उत्तम व्यक्ति कौन है? आपने फ़रमायाः "जो सबसे अधिक अल्लाह का भय खाने वाला हो।" लोगों ने कहाः हम आपसे इसके बारे में नहीं पूछ रहे रहैं। आपने फ़रमायाः तो यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) हैं, जो अल्लाह के नबी, अल्लाह के नबी के बेटे, अल्लाह के नबी के पोते और अल्लाह के प्रिय मित्र के पड़पोते हैं।" उन्होंने कहाः हम आपसे इसके बारे में भी नहीं पूछ रहे हैं। फ़रमायाः "तो क्या तुम मुझसे अरब क़बीलों के बारे में पूछ रहे हो? उनमें से जो लोग जाहिलियत काल में श्रेष्ठ थे, वे इसलाम में भी श्रेष्ठ हैं, जब इसलाम का ज्ञान प्राप्त कर लें।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. شرح العقيدة الواسطية لابن عثيمين، تحقيق: سعد فواز الصميل، ط5، دار ابن الجوزي، الرياض، المملكة العربية السعودية، 1419هـ. شرح رياض الصالحين للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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जब अल्लाह ने आदम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पैदा किया तो कहा कि जाओ और उन (बैठे हुए फ़रिश्तों) को सलाम करो और सुनो कि वे क्या उत्तर देते हैं, क्योंकि वही तुम्हारा और तुम्हारी संतान का सलाम होगा।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «لما خلق الله آدم صلى الله عليه وسلم قال: اذهب فَسَلِّمْ على أولئك -نَفَرٍ من الملائكة جلوس- فاستمع ما يُحَيُّونَكَ؛ فإنها تَحِيَّتُكَ وتحية ذُرِّيتِكَ. فقال: السلام عليكم، فقالوا: السلام عليك ورحمة الله، فَزَادُوهُ: ورحمة الله».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जब अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) को पैदा किया तो कहा कि जाओ और उन (बैठे हुए फ़रिश्तों) को सलाम करो और सुनो कि वे क्या उत्तर देते हैं, क्योंकि वही तुम्हारा और तुम्हारी संतान का सलाम होगा। आदम- अलैहिस्लाम- ने कहाः 'السلام عليكم' और फ़रिश्तों ने उत्तर में कहाः 'السلام عليك ورحمة الله' इस तरह उन्होंने उनके उत्तर में 'ورحمة الله' बढ़ाकर कहा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه. منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، لحمزة محمد قاسم، عني بتصحيحه ونشره: بشير محمد عيون، الناشر: مكتبة دار البيان، دمشق - الجمهورية العربية السورية، مكتبة المؤيد، الطائف - المملكة العربية السعودية، عام النشر: 1410 هـ - 1990 م.

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ऐ अल्लाह, मेरे समुदाय के लोगों को क्षमा कर दे, क्योंकि वे जानते नहीं हैं

عن أبي عبد الرحمن عبد الله بن مسعود رضي الله عنه قال: كَأَنِّي أَنْظُر إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم يَحْكِي نَبِيًّا من الأنبياء، صلوات الله وسلامه عليهم، ضربه قومه فَأَدْمَوْهُ، وهو يمَسحُ الدَم عن وجهِهِ، يقول: «اللهم اغفر لِقَوْمِي؛ فإنهم لا يعلمون».
अबू अब्दुर्रहमान अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि ऐसा महसूस होता है कि मैं अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को देख रहा हूँ कि आप एक नबी की घटना सुना रहे हैं, जिसे उसके समुदाय के लोगों ने मार- मार कर लहूलुहान कर दिया था और वह अपने चेहरे से रक्त पोंछ रहा था तथा कह रहा थाः "ऐ अल्लाह, मेरे समुदाय के लोगों को क्षमा कर दे, क्योंकि वे जानते नहीं हैं।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى، 1418ه. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، محمد علي بن البكري، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة . شرح رياض الصالحين، محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج، أبو زكريا محيي الدين النووي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة الثانية، 1399ه. تطريز رياض الصالحين، فيصل بن عبد العزيز المبارك، المحقق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة للنشر والتوزيع، الرياض، الطبعة الأولى، 1423هـ - 2002 م. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ.

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सबसे उत्तम दिन जिसमें सूरज निकला, जुमा का दिन है।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «خَيْرُ يَوْمٍ طَلَعَتْ عَلَيْهِ الشَّمْسُ يَوْمُ الْجُمُعَةِ، فِيهِ خُلِقَ آدَمُ، وَفِيهِ أُدْخِلَ الْجَنَّةَ، وَفِيهِ أُخْرِجَ مِنْهَا، وَلَا تَقُومُ السَّاعَةُ إِلَّا فِي يَوْمِ الْجُمُعَةِ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सबसे उत्तम दिन जिसमें सूरज निकला, जुमा का दिन है। इसी दिन आदम पैदा हुए, इसी दिन जन्नत में दाख़िल हुए और इसी दिन वहाँ से निकाले गए। क़यामत भी जुमा के दिन ही क़ायम होगी।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि सबसे उत्कृष्ट दिन, जिसमें सूरज निकलता है, जुमे का दिन है। उस दिन की कुछ विशेषताएँ इस प्रकार हैं : उसी दिन अल्लाह ने आदम अलैहिस्सलाम को पैदा किया, उसी दिन उनको जन्नत में दाख़िल किया, उसी दिन उनको जन्नत से निकालकर ज़मीन पर उतारा, और क़यामत भी जुमे के दिन ही क़ायम होगी।

फ़ायदे
  1. सप्ताह के तमाम दिनों पर जुमे के दिन की फ़ज़ीलत।
  2. जुमे के दिन ज़्यादा से ज़्यादा नेकी के काम करने और अल्लाह की दया प्राप्त करने और उसकी सज़ा से बचने की तैयारी की प्रेरणा।
  3. इस हदीस में जुमे के दिन की जिन विशेषताओं का उल्लेख किया गया है, उनके बारे में कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें बयान करने का उद्देश्य जुमे के दिन की फ़ज़ीलत बयान करना नहीं है। क्योंकि आदम अलैहिस्सलाम को जन्नत से निकालने और क़यामत क़ायम होने को फ़ज़ीलत शुमार नहीं किया जा सकता। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि यह सारी विशेषताएँ फ़ज़ीलतों के दायरे में आती हैं। क्योंकि आदम के निकलने के फलस्वरूप उनकी नस्ल सामने आई, जिसमें नबी, रसूल और सदाचारी लोग सभी शामिल हैं। इसी तरह क़यामत क़ायम होने के नतीजे में अल्लाह के नेक बंदों को जल्दी उनके कर्मों का प्रतिफल मिलेगा और उनको अल्लाह की ओर से विभिन्न प्रकार की नेमतें दी जाएँगी।
  4. इस रिवायत में जिन विशेषताओं का ज़िक्र है, उनके अतिरिक्त जुमे के दिन की और भी विशेषताएँ हैं। जैसे, उसी दिन आदम अलैहिस्सलाम की तौबा क़बूल हुई, उसी दिन उनकी मौत हुई और जुमे के दिन एक क्षण ऐसा आता है कि जो भी मोमिन बंदा उसे नमाज़ की हालत में पाएगा और अल्लाह से कुछ माँगेगा, उसकी मनोकामना ज़रूर पूरी होगी।
  5. साल का सबसे उत्कृष्ट दिन अरफ़ा का दिन है। जबकि कुछ लोगों ने क़ुर्बानी के दिन को साल का सबसे उत्कृष्ट दिन कहा है। वैसे, साल की सबसे उत्कृष्ट रात क़द्र की रात है और सप्ताह का सबसे उत्कृष्ट दिन जुमे का दिन है।
हवाला

صحيح مسلم (2/ 585) (854). بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (2/ 313). نزهة المتقين، لمجموعة من الباحثين (2/ 824). مرعاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعبيد الله المباركفوري (4/ 422). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (5/ 164).

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अल्लाह मूसा पर दया करे, उन्हें इससे भी अधिक कष्ट दिया गया, परन्तु सब्र से काम लिया

عن عبد الله بن مسعود رضي الله عنه قال: لما كان يوم حُنين آثر رسول الله صلى الله عليه وسلم ناسًا في القِسْمَة، فأعطى الأَقْرَع بن حَابِس مئة من الإبل، وأعطى عُيينة بن حِصن مثل ذلك، وأعطى نَاسًا من أشراف العَرب وآثَرَهُم يومئذ في القِسْمَة. فقال رجل: والله إن هذه قِسْمَة ما عُدل فيها، وما أُريد فيها وجه الله، فقلت: والله لأُخبرن رسول الله صلى الله عليه وسلم فأتيته فأخبرته بما قال، فتغير وجهه حتى كان كالصِّرفِ. ثم قال: «فمن يَعْدِل إذا لم يعدل الله ورسوله؟» ثم قال: «يَرحم الله موسى، قد أُوذي بأكثر من هذا فصبر». فقلت: لا جَرم لا أرفع إليه بعدها حديثًا.
अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि हुनैन के दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ग़नीमत के धन के बँटवारे के समय कुछ लोगों को वरीयता दी। इसी क्रम में अक़रा बिन हाबिस को सौ ऊँट दिए, उययना बिन हिस्न को भी इतने ही ऊँट दिए और इनके अलावा कई अरब सरदारों को भी ग़नीमत का धन प्रदान करने में वरीयता दी और बहुत कुछ दिया। यह देख एक व्यक्ति ने कहाः अल्लाह की क़सम! इस बँटवारे में न्याय से काम नहीं लिया गया है और अल्लाह की प्रसन्नता को ध्यान में नहीं रखा गया है। मैंने अपने मन में कहाः अल्लाह की क़सम! इसकी सूचना मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ज़रूर दूँगा। अतएब, मैं आपके पास आया और उसकी बात सुनाई तो आपके चेहरे का रंग बदलकर लाल हो गया। फिर फ़रमायाः "अगर अल्लाह और उसका रसूल न्याय न करें तो भला कौन न्याय करेगा?" फिर फ़रमायाः "अल्लाह मूसा (अलैहिस्सलाम) पर दया करे, उन्हें इससे भी अधिक कष्ट दिया गया, परन्तु सब्र से काम लिया।" यह देख मैंने कहाः इसके बाद मैं आप तक कोई बात नहीं पहुँचाऊँगा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، كنوز إشبيليا، الرياض، الطبعة: الأولى 1430هـ، 2009م. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الطبعة: الأولى 1418 هـ، 1997م. تطريز رياض الصالحين، فيصل بن عبد العزيز المبارك، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة للنشر والتوزيع، الرياض، الطبعة: الأولى 1423هـ، 2002م. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الطبعة الأولى. شرح رياض الصالحين، محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، محمد علي بن البكري بن علان، نشر دار الكتاب العربي، لم أقف على رقم الطبعة. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، الطبعة: الأولى 1428هـ، 2007م. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت،الطبعة: لا يوجد بيان لرقم الطبعة، 1423هـ.

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किसी ने कोई भोजन ग्रहण नहीं किया, जो उसके हाथ की कमाई के भोजन से उत्तम हो तथा अल्लाह के नबी दाऊद (अलैहिस्सलाम) अपने हाथ की कमाई से खाते थे

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «كان داود -عليه السلام- لا يأكلُ إلا من عمل يده». وعن المقدام بن معد يكرب رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «ما أكل أحد طعاما قط خيرا من أن يأكل من عمل يده، وإن نبي الله داود صلى الله عليه وسلم كان يأكل من عمل يده».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "दाऊद (अलैहिस्सलाम) अपने हाथ की कमाई ही से खाते थे।" तथा मिक़दाम बिन मादीकरिब- रज़ियल्लाहु अन्हु- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "किसी ने कोई भोजन ग्रहण नहीं किया, जो उसके हाथ की कमाई के भोजन से उत्तम हो तथा अल्लाह के नबी दाऊद (अलैहिस्सलाम) अपने हाथ की कमाई से खाते थे।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जादोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ، الطبعة الرابعة عشر 1407 هـ صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي ، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل ، الطبعة: الأولى، 1428 هـ تيسير الكريم الرحمن في تفسير كلام المنان، تأليف: عبد الرحمن بن ناصر آل سعدي، تحقيق: عبد الرحمن بن معلا اللويحق، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1420هـ التنوير شرح الجامع الصغير، تأليف: محمد بن إسماعيل الصنعاني، تحقيق: د/ محمد إسحاق محمد إبراهيم ، الناشر: مكتبة دار السلام، الطبعة: الأولى، 1432 هـ فتح الباري شرح صحيح البخاري، تأليف: أحمد بن علي بن حجر، رقمه وبوب أحاديث: محمد فؤاد عبد الباقي، الناشر: دار المعرفة - بيروت، 1379 هـ.

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ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) बढ़ई थे

عن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «كان زكريا -عليه السلام- نجَّارا».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) बढ़ई थे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ. - صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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जो बातें मैं तुम्हें बताना छोड़ दूँ, उनके बारे में तुम मुझे मेरे हाल पर रहने दो, क्योंकि तुमसे पहले के लोगों को केवल इसी बात ने विनष्ट किया कि वे अत्यधिक प्रश्न करते और अपने नबियों से मतभेद करते थे।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ: «دَعُونِي مَا تَرَكْتُكُمْ، إِنَّمَا هَلَكَ مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ بِسُؤَالِهِمْ وَاخْتِلَافِهِمْ عَلَى أَنْبِيَائِهِمْ، فَإِذَا نَهَيْتُكُمْ عَنْ شَيْءٍ فَاجْتَنِبُوهُ، وَإِذَا أَمَرْتُكُمْ بِأَمْرٍ فَأْتُوا مِنْهُ مَا اسْتَطَعْتُمْ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जो बातें मैं तुम्हें बताना छोड़ दूँ, उनके बारे में तुम मुझे मेरे हाल पर रहने दो, क्योंकि तुमसे पहले के लोगों को केवल इसी बात ने विनष्ट किया कि वे अत्यधिक प्रश्न करते और अपने नबियों से मतभेद करते थे। अतः, जब मैं किसी चीज़ से मना करूँ तो उससे बचते रहो और जब किसी चीज़ का आदेश दूँ तो जहाँ तक हो सके, उसका पालन करो।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया कि शरीयत के विधान तीन प्रकार के हैं : वो विधान जिनके बारे में ख़ामोशी बरती गई है, वो विधान जो मनाही के रूप में हैं और वो विधान जो आदेश के रूप में हैं। पहला प्रकार : वो विधान जिनके बारे में शरीयत ख़ामोश है। कोई निर्देश नहीं देती। इस प्रकार के विधानों के बारे में इस्लाम का यह उसूल याद रखना चाहिए कि असलन कोई भी चीज़ वाजिब नहीं हुआ करती। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दौर में इस शंका के कारण कि कहीं आकाश से वाजिब या हराम होने से संबंधित आदेश न उतर आए, किसी ऐसी चीज़ के बारे में प्रश्न करने से बचना ज़रूरी था, जो सामने न आई हो। क्योंकि अल्लाह ने उसे बंदों पर दया के तौर पर छोड़े रखा है। लेकिन आपकी मृत्यु के बाद प्रश्न अगर फ़तवा लेने या दीन के आवश्यक मसायल का ज्ञान प्राप्त करने के इरादे से किया जाए, तो न केवल जायज़ है, बल्कि इसका आदेश दिया गया है। लेकिन प्रश्न अगर बाल की खाल निकालने के इरादे से किया जाए, तो इस हदीस के आलोक में इस तरह से प्रश्न करना मना होगा। क्योंकि इस प्रकार का प्रश्न अंततः उसी प्रकार की परिस्थिति सामने ला सकता है, जो बनी इसराईल के लिए उत्पन्न हो गई थी। हुआ यह था कि उनको एक गाय ज़बह करने का आदेश दिया गया था। ऐसे में अगर कोई भी गाय ज़बह कर देते, तो आदेश का पालन हो जाता, लेकिन उन्होंने बाल की खाल निकालनी शुरू की, तो उनकी परेशानी बढ़ती चली गई। दूसरा : वो विधि-विधान, जिनसे मना किया गया है। इनसे दूर रहने वाले को सवाब मिलेगा और इनमें संलिप्त होने वाले को दंड। अतः इस प्रकार की तमाम चीज़ों से बचना ज़रूरी है। तीरा प्रकार : वो विधि-विधान जिनका आदेश दिया गया है। इनका पालन करने वाले को सवाब मिलेगा, और इन्हें छोड़ने वाले को दंड। अतः इन्हें क्षमता अनुसार करना ज़रूरी है।

फ़ायदे
  1. इन्सान को ध्यान ऐसे कामों पर देना चाहिए, जो ज़्यादा अहम और आवश्यक हों। ऐसे कामों से बचना चाहिए, जो फ़िल-हाल ज़रूरी न हों। ऐसी चीज़ों के बारे में प्रश्न करने से बचना चाहिए, जो अभी सामने नहीं आई हैं।
  2. ऐसे प्रश्न पूछने से मना किया गया है, जो मसायल को जटिल बनाते हैं, संदेहों का द्वार खोलते हैं, और अत्यधिक मतभेद का कारण बनते हैं।
  3. यहाँ मना की गई चीज़ों को छोड़ने का आदेश दिया गया है। क्योंकि उन्हें छोड़ना कोई मुश्किल काम नहीं है। यही कारण है कि मनाही को आम रखा गया है।
  4. जिन कामों को करने का आदेश दिया गया है, उन्हें करने का आदेश सामर्थ्य के साथ जुड़ा हुआ है। क्योंकि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि उन्हें करना मशक़्क़त भरा होता है, या फिर इन्सान के वश में होता ही नहीं।
  5. इस हदीस में बहुत ज़्यादा सवाल करने से मना किया गया है। दरअसल उलेमा ने प्रश्न के दो प्रकार बताए हैं : पहले प्रकार में दीन के ज़रूरी मसायल से जुड़े हुए ऐसे प्रश्न आते हैं, जिनका उद्देश सीखना हो, इस प्रकार का प्रश्न करने का आदेश दिया गया है, और सहाबा के प्रश्न इसी प्रकार के हुआ करते थे। दूसरे प्रकार में ऐसे प्रश्न आते हैं, जो बाल की खाल निकालने के लिए किए जाते हैं। इस प्रकार का सवाल करना मना है।
  6. इस उम्मत को सावधान किया गया है कि वह पिछली उम्मतों की तरह अपने नबी की मुख़ालफ़त न करे।
  7. अनावश्यक बहुत ज़्यादा प्रश्न और नबियों की मुख़ालफ़त विनाश का सबब है। जैसे उन बातों के बारे में प्रश्न, जिनकी जानकारी लेना संभव न हो। जैसे ग़ैब के मसायल, जिन्हें अल्लाह के अतिरिक्त कोई नहीं जानता और क़यामत के दिन के हालात।
  8. कठिन मसायल के बारे में पूछने की मनाही। औज़ाई कहते हैं : जब अल्लाह बंदे को ज्ञान की बरकत से वंचित करना चाहता है, तो उसकी ज़बान पर बहुत सारी ग़लत बातें डाल देता है। इस प्रकार के लोग सबसे अल्प ज्ञानी होते हैं। इब्न वह्ब कहते हैं : मैंने मालिक को कहते हुए सुना है : ज्ञान में विवाद इन्सान के दिल से ज्ञान का नूर ख़तम कर देता है।
हवाला

صحيح البخاري (9/ 94) (7288). صحيح مسلم (2/ 975) (1337). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 236). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 181). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (2/ 268).

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23 हदीसें
  1. तो क्या तुम मुझसे अरब क़बीलों के बारे में पूछ रहे हो? उनमें से जो लोग जाहिलियत काल में श्रेष्ठ थे, वे इसलाम में भी श्रेष्ठ हैं, जब इसलाम का ज्ञान प्राप्त कर लें।
  2. जब अल्लाह ने आदम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पैदा किया तो कहा कि जाओ और उन (बैठे हुए फ़रिश्तों) को सलाम करो और सुनो कि वे क्या उत्तर देते हैं, क्योंकि वही तुम्हारा और तुम्हारी संतान का सलाम होगा।
  3. ऐ अल्लाह, मेरे समुदाय के लोगों को क्षमा कर दे, क्योंकि वे जानते नहीं हैं
  4. सबसे उत्तम दिन जिसमें सूरज निकला, जुमा का दिन है।
  5. अल्लाह मूसा पर दया करे, उन्हें इससे भी अधिक कष्ट दिया गया, परन्तु सब्र से काम लिया
  6. किसी ने कोई भोजन ग्रहण नहीं किया, जो उसके हाथ की कमाई के भोजन से उत्तम हो तथा अल्लाह के नबी दाऊद (अलैहिस्सलाम) अपने हाथ की कमाई से खाते थे
  7. ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) बढ़ई थे
  8. जो बातें मैं तुम्हें बताना छोड़ दूँ, उनके बारे में तुम मुझे मेरे हाल पर रहने दो, क्योंकि तुमसे पहले के लोगों को केवल इसी बात ने विनष्ट किया कि वे अत्यधिक प्रश्न करते और अपने नबियों से मतभेद करते थे।
  9. एक बार अय्यूब (अलैहिस्सलाम) नग्न होकर स्नान कर रहे थे कि उनपर सोने की टिड्डी गिरने लगी।
  10. मूसा (अलैहिस्सलाम) और ख़ज़िर की घटना
  11. इबराहीम -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने दूध पीते बच्चे इसमाईल –अलैहिस्सलाम- तथा उनकी माता को साथ लेकर आए और काबा के पास, एक बहुत बड़े पेड़ के निकट एक स्थान में छोड़ गए, जो ज़मज़म के ऊपर और मस्जिद के सबसे ऊँचे भाग में था। उस समय मक्का में कोई नहीं रहता था तथा पानी की व्यवस्था भी नहीं थी।
  12. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने छिपकली को मारने का आदेश दिया और फ़रमाया: यह इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) पर फूँक मारती थी
  13. जब आदम (अलैहिस्सलाम) की मृत्यु हुई, तो फ़रिश्तों ने उन्हें पानी से विषम संख्या में स्नान दिया और क़ब्र में दफ़न किया तथा कहा कि आदम की यह सुन्नत उनकी संतान में भी जारी रहेगी
  14. एक व्यक्ति ने पूछाः ऐ अल्लाह के रसूल, क्या आदम (अलैहिस्सलाम) नबी थे? आपने फ़रमायाः हाँ! उन्होंने पूछाः उनके और नूह (अलैहिस्सलाम) के बीच कितनी अवधि थी? फ़रमायाः दस सदी। उन्होंने पूछाः नूह़ और इबराहीम (अलैहिमस्सलाम) के बीच कितनी अवधि थी? फ़रमायाः दस सदी। उन्होंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल, कुल कितने रसूल हुए हैं? फ़रमायाः तीन सौ पंद्रह।
  15. मूसा -अलैहिस्सलाम- एक शर्मीले व्यक्ति थे और परदे का ख़ास ख़याल रखते थे। हया के कारण उनके शरीर की त्वचा का कोई अंग नहीं दिखता था। इसी को लेकर बनी इसराईल के कुछ लोगों ने उन्हें कष्ट दिया।
  16. ईसा बिन मरयम -अलैहिस्सलाम- ने एक व्यक्ति को चोरी करते देखा, तो उससे कहाः क्या तूने चोरी की है? उसने कहाः बिलकुल नहीं, उस अल्लाह की क़सम, जिसके सिवा कोई वंदनीय नहीं है। इस पर ईसा -अलैहिस्सलाम- ने कहाः मैं अल्लाह पर ईमान लाया और अपनी आँख को झुठलाया।
  17. जब कोई आदम की संतान जन्म लेती है, तो उसके जन्म के समय शैतान उसे छूता है और शैतान के छूने के कारण वह चीख पड़ती है। अलबत्ता मरयम और उनके बेटे के साथ ऐसा नहीं हुआ।
  18. ख़ज़िर को ख़ज़िर का नाम इसलिए दिया गया कि (एक बार) वह एक सूखे खेत में बैठे, तो देखते ही देखते उनके पीछे हरियाली लहलहाने लगी।
  19. वस्वयं श्रेष्ठ, श्रेष्ठ के पुत्र, श्रेष्ठ के पोते, श्रेष्ठ के पडपोते यूसुफ़ बिन याक़ूब बिन इसहाक़ बिन इबराहीम -अलैहिमुस्सलाम।
  20. किसी बंदे के लिए यह कहना उचित नहीं है कि मैं यूनुस बिन मत्ता से उत्तम हूँ।
  21. सूरज को किसी इनसान के लिए रोका नहीं गया है, सिवाए यूशा -अलैहिस्सलाम- के, जिनके साथ बैतुल मक़दिस की ओर चलने की रातों में ऐसा हुआ था।
  22. उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, वह समय बहुत ही निकट है, जब तुम्हारे बीच मरयम के बेटे न्यायकारी शासक के रूप में उतरेंगे। वह सलीब तोड़ देंगे, सूअर का वध करेंगे, जिज़्या (वेशेष लगान) हटा देंगे और धन की इतनी बहुतायत हो जाएगी कि कोई उसे ग्रहण नहीं करेगा।
  23. “मैं तुम्हें जिस चीज़ से रोकूँ, उससे बचो और जिस चीज़ का आदेश दूँ, उसे जहाँ तक हो सके करो

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com