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तशरीह के साथ हदीसें

अल्लाह पर भरोसा रखने के अनिवार्य होने तथा इस बात का उल्लेख कि अल्लाह अपने नबियों तथा औलिया का ख़ास ख़याल रखता है।

عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقَ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: نَظَرْتُ إِلَى أَقْدَامِ الْمُشْرِكِينَ عَلَى رُءُوسِنَا وَنَحْنُ فِي الْغَارِ، فَقُلْتُ: يَا رَسُولَ اللهِ لَوْ أَنَّ أَحَدَهُمْ نَظَرَ إِلَى قَدَمَيْهِ أَبْصَرَنَا تَحْتَ قَدَمَيْهِ، فَقَالَ: «يَا أَبَا بَكْرٍ، مَا ظَنُّكَ بِاثْنَيْنِ اللهُ ثَالِثُهُمَا».
अबू बकर सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि जब हम ग़ार में थे और मुश्रिक हमें ढूँढते हुए हमारे सर के ऊपर पहुँच चुके थे, तो मैंने उनके पाँव देख लिए। ऐसे में, मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, अगर उनमें से किसी ने अपने पाँव के नीचे नज़र डाली, तो हमें देख लेगा। यह सुन आपने फ़रमायाः "ऐ अबू बक्र, उन दो लोगों के बारे में तुम्हारा क्या ख़याल है, जिनका तीसरा अल्लाह है?"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري (5/ 4) (3653). صحيح مسلم (4/ 1854) (2381). شرح صحيح مسلم (149/15). فتح الباري (11/7). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (276/2) شرح رياض الصالحين لابن عثيمين (563/1).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
सीरत एवं इतिहास

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com