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तशरीह के साथ हदीसें

जब हम छोटे थे तो लोग गवाही और वचन देने पर हमारी पिटाई करते थे।

قال إبراهيم: "كانوا يَضْرِبُونَنا على الشَّهادة والعَهْد ونحن صِغار".
इबराहीम नख़ई कहते हैं कि जब हम छोटे थे तो लोग गवाही और वचन देने पर हमारी पिटाई करते थे।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस ताबई के कथन से यह प्रमाण मिलता है कि कुछ 'सलफ़' अपने बच्चों कों बार-बार वचन देने से मना करते थे, ताकि कहीं ऐसा न हो कि वचन तोड़ने के कारण गुनाह का हक़दार बनना पड़े। यही हाल गवाही देने का है, ताकि वे गवाही देने को आसान न समझ लें।

हवाला

- الجديد في شرح كتاب التوحيد، للقرعاوي، الناشر: مكتبة السوادي، جدة، المملكة العربية السعودية، الطبعة الخامسة، 1424هـ - 2003م. - الملخص في شرح كتاب التوحيد، للفوزان، دار النشر: دار العاصمة، الرياض، الطبعة الأولى، 1422هـ - 2001م. - كتاب التوحيد، لمحمد بن عبد الوهاب، الناشر: جامعة الإمام محمد بن سعود، الرياض، المملكة العربية السعودية. - صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. - صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن حجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبدالباقي، دار إحياء التراث العربي.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
बच्चों का पालन-पोषण

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com