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तशरीह के साथ हदीसें

वह स्त्रियाँ जिनसे निकाह हराम है

4 हदीसें

यदि वह मेरी गोद में परवरिश न भी पाई होती, तो भी मेरे लिए हलाल न होती। इसलिए कि वह मेरे दूध-शरीक भाई की बेटी है। मुझे और अबू सलमा को सुवैबा ने स्तनपान कराया है। अतः अपनी बेटियों और बहनों को मुझपर पेश न करो।

عن أم حبيبة بنت أبي سفيان رضي الله عنهما قالت: قلت يا رسول الله، انكح أختي ابنة أبي سفيان. قال: أو تحبين ذلك؟ فقلت: نعم؛ لست لك بمُخْلِيَةٍ، وأحَبُّ من شاركني في خير أختي. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : إن ذلك لا يحل لي. قالت: إنا نُحَدَّثُ أنك تريد أن تنكح بنت أبي سلمة. قال: بنت أم سلمة؟! قالت: قلت: نعم، قال: إنها لو لم تكن ربيبتي في حَجْرِي، ما حلت لي؛ إنها لابنة أخي من الرضاعة، أرضعتني وأبا سلمة ثويبةُ؛ فلا تعرضن علي بناتكن ولا أخواتكن. قال عروة: وثويبة مولاة لأبي لهب أعتقها، فأرضعت النبي صلى الله عليه وسلم ، فلما مات أبو لهب رآه بعض أهله بشرِّ حِيبة، فقال له: ماذا لقيت؟ قال أبو لهب: لم ألق بعدكم خيرًا، غير أني سقيت في هذه بعتاقتي ثويبة.
उम्मे हबीबा बिंत अबू सुफ़यान (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहती हैं कि मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! आप मेरी बहन अर्थात अबू सुफ़यान की बेटी से निकाह कर लें। आपने फ़रमायाः क्या तुम इसे पसंद करती हो? मैंने कहाः हाँ। ऐसा तो है नहीं कि केवल मैं ही आपकी पत्नी हूँ! मुझे यह अच्छा लगेगा कि भलाई में मेरी साझीदार मेरी बहन रहे। यह सुनकर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः यह मेरे लिए हलाल नहीं है।' उम्मे हबीबा (रज़ियल्लाहु अनहा) ने कहाः हम सुन रहे हैं कि आप अबू सलमा की बेटी से शादी करना चाहते हैं? आपने फ़रमायाः अबू सलमा की बेटी? उन्होंने कहाः हाँ। आपने फ़रमायाः यदि वह मेरी गोद में परवरिश न भी पाई होती तो भी मेरे लिए हलाल न होती। इसलिए कि वह मेरे दूध-शरीक भाई की बेटी है। मुझे और अबू सलमा को सुवैबा ने स्तनपान कराया है। अतः अपनी बेटियों और बहनों को मुझपर पेश न करो। उरवा कहते हैंः सुवैबा, जो अबू लहब की दासी थीं, अबू लहब ने उन्हें मुक्त कर दिया और उन्होंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को स्तनपान कराया। फिर जब अबू लहब मरा तो उसके घर के किसी ने उसे स्वप्न में बहुत बुरे हाल में देखा, अतः उससे पूछा कि तूने क्या कुछ पाया? अबू लहब ने उत्तर दियाः तुम लोगों से जुदा होने के बाद मैंने कोई भलाई नहीं देखी। हाँ, बस सुवैबा को मुक्त करने के कारण मुझे कुछ जल पीने को दिया गया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

उम्मे हबीबा बिंत अबू सुफ़यान अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी थीं तथा वह अपने इस सौभाग्य से संतुष्ट और ख़ुश थीं। यही कारण है कि उन्होंने आपसे आग्रह किया कि आप उनकी बहन से शादी कर लें। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को इस बात पर बड़ा ताज्जुब हुआ कि उन्होंने सौकन लाने की अनुमति कैसे दे दी, जबकि स्त्रियाँ इस मामले में बड़ी स्वभिमानी होती हैं? यही कारण है कि आपने आश्चर्य प्रकट करते हुए उनसे पूछा कि क्या तुम्हें यह पसंद है? उन्होंने उत्तर दिया कि हाँ, मुझे यह पसंद है। फिर अपनी बहन से शादी की अनुमति देने के कारण की व्याख्या करते हुए कहा कि वैसे भी वह अकेली आपके विवाह में नहीं हैं, बल्कि आपकी और भी पत्नियाँ हैं, अतः इस सौभाग्य में उनकी बहन भी क्यों न शरीक हो जाए? लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि एक साथ दो बहनों को विवाह में नहीं रखा जा सकता। इसलिए आपने उन्हें बता दिया कि उनकी बहन उनके लिए हलाल नहीं है। इसपर उम्मे हबीबा (रज़ियल्लाहु अंहा) ने कहाः उन्हें पता चला है कि आप अबू सलमा की बेटी से शादी करने वाले हैं। यह सुन, आपने स्पष्टिकरण के अंदाज़ में पूछा कि क्या तुम अबू सलमा की बेटी ही के बारे में कह रही हो? उन्होंने कहाः हाँ! तो आपने इस अफ़वाह को ग़लत बताते हुए फ़रमायाः उम्मे सलमा की बेटी आपके लिए दो कारणों से हलाल नहीं हैंः एक यह कि वह मेरी पत्नी की बेटी और मेरे ही यहाँ उसका लालन-पालन हुआ है। दूसरा यह कि वह मेरे दूध के रिश्ते के भाई की बेटी है। मुझे और उसके पिता अबू सलमा को अबू लहब की मुक्त की हुई दासी सुवैबा ने दूध पिलाया था। इस तरह मैं उसका चचा भी हूँ। अतः, तुम अपनी बेटियों और बहनों से निकाह की बात मुझसे न करो। मैं तुमसे अधिक जानता हूँ कि इस तरह के मामलों में मुझे क्या करना चाहिए।

हवाला

- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه.

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किसी स्त्री तथा उसकी फूफी को विवाह के बंधन में एक साथ नहीं रखा जा सकता और न किसी स्त्री तथा उसकी ख़ाला को।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «لا يجُمَعُ بين المرأة وعمتها، ولا بين المرأة وخالتها».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः किसी स्त्री तथा उसकी फूफी को विवाह के बंधन में एक साथ नहीं रखा जा सकता और न किसी स्त्री तथा उसकी ख़ाला को।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस पवित्र शरीयत में प्रत्येक प्रकार की भलाई निहित है और इसने प्रत्येक नुक़सान तथा बिगाड़ से युद्ध किया है। यही कारण है इसने प्रेम, मोहब्बत और दोस्ती की प्रेरणा दी है तथा एक दूसरे से दूरी बनाने, रिश्तों-नातों को काटने तथा द्वेष की भावना रखने से मना किया है। जब शरीयत ने, कुछ मसलहतों के मद्देनज़र जो कभी-कभी एक से अधिक पत्नी रखने का कारण बनती हैं, बहुविवाह की अनुमति दी और आम तौर पर एक व्यक्ति के यहाँ एक से अधिक पत्नियों का रहना शत्रुता और द्वेष का कारण बनता है, इसलिए कुछ निकट के रिश्तेदारों को एक साथ जमा करने से मना कर दिया, ताकि निकटवर्तियों के बीच रिश्ता ख़राब होने की नौबत न आने पाए। आपने एक बहन के होते हुए दूसरी बहन, भतीजी के होते हुए फूफी, खाला के होते हुए भांजी आदि से निकाह करने से मना किया है, जिनमें से एक को यदि पुरुष और दूसरे को स्त्री मान लिया जाए, तो नसबी रिश्ते के कारण निकाह सही न हो।दरअसल, यह हदीस अल्लाह तआला के इस फ़रमान की व्यापकता को सीमित कर देती हैः "وأحِلَّ لكم ما وَرَاءَ ذلِكم" (इनके अतिरिक्त अन्य स्त्रियों को तुम्हारे लिए हलाल किया गया है।)

हवाला

- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه. - خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام- فيصل بن عبد العزيز بن فيصل ابن حمد المبارك الحريملي النجدي - الطبعة: الثانية، 1412 هـ - 1992 م.

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अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमज़ा (रज़ियल्लाहु अनहु) की बेटी के बारे में फ़रमायाः वह मेरे लिए हलाल नहीं है। स्तनपान से भी वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो नसब (वंश) से हराम होते हैं। वह मेरे दूध शरीक- भाई की बेटी है।

قال رسول الله صلى الله عليه وسلم في بنت حمزة: «لَا تَحِلُّ لِي يَحْرُمُ من الرَّضَاعِ مَا يَحْرُمُ من النَّسَبِ وهي ابنة أَخِي من الرَّضاعة».
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमज़ा (रज़ियल्लाहु अनहु) की बेटी के बारे में फ़रमायाः वह मेरे लिए हलाल नहीं है। स्तनपान से भी वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो नसब (वंश) से हराम होते हैं। वह मेरे दूध- शरीक भाई की बेटी है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने इच्छा जताई कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उनके तथा आपके चचा हमज़ा (रज़ियल्लाहु अंहु) की बेटी से शादी कर लें। परन्तु, आपने उन्हें बताया कि वह आपके लिए हलाल नहीं है; क्योंकि वह आपके दूध शरीक भाई की बेटी है। आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके चचा हमज़ा (रज़ियल्लाहु अंहु) ने अबू लहब की मुक्त की हुई दासी सुवैबा का दूध पिया था। इस तरह हमज़ा (रज़ियल्लाहु अंहु) आपके दूध शरीक भाई हुए और उनकी पुत्री आपकी भतीजी हुई। क्योंकि दूध से भी वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो नसब से हराम होते हैं।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381ه. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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हमारे पास उमर बिन ख़त्ताब की मृत्यु से एक साल पहले उनका पत्र आया कि उन मजूसी विवाहों को निरस्त कर दो जो ऐसे संबंधियों के बीच हुए हैं, जिनके बीच विवाह उचित नहीं है।

عن بجالة قال: كنت كاتبا لِجَزْء بن معاوية، عَمِّ الأحنف، فأتانا كتاب عمر بن الخطاب قبل موته بسنة، فَرِّقُوا بين كل ذِي مَحْرَمٍ من المجوس، ولم يكن عمر أخذ الجِزْيَةَ من المجوس، حتى شهد عبد الرحمن بن عوف أن رسول الله صلى الله عليه وسلم أخذها من مجوس هَجَر.
बजाला कहते हैंः मैं अहनफ़ के चचा जज़ बिन मुआविया का लिपिक था। हमारे पास उमर बिन ख़त्ताब की मृत्यु से एक साल पहले उनका पत्र आया कि उन मजूसी विवाहों को निरस्त कर दो, जो ऐसे संबंधियों के बीच हुए हैं, जिनके बीच विवाह उचित नहीं है। तथा उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने मजूसियों से जिज़या नहीं लिया, यहाँ तक कि अब्दुर रहमान बिन औफ़ ने गवाही दे दी कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हजर के मजूसियों से जिज़या लिया था।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، المحقق: محمد زهير بن ناصر الناصر، الناشر: دار طوق النجاة، الطبعة : الأولى 1422هـ. فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام، محمد بن صالح بن محمد العثيمين، تحقيق: صبحي بن محمد رمضان، وأُم إسراء بنت عرفة، المكتبة الإسلامية، القاهرة، الطبعة الأولى، 1427هـ. توضيح الأحكام من بلوغ المرام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة، الطبعة الخامسة، 1423. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، صالح الفوزان، اعتناء عبد السلام السلمان، الرياض، الطبعة الأولى، 1427. منحة العلام شرح بلوغ المرام، عبد الله الفوزان، دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى، 1428. بلوغ المرام من أدلة الأحكام، أحمد بن علي بن حجر العسقلاني، تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري، الناشر: دار الفلق، الرياض، الطبعة: السابعة، 1424 هـ. سبل السلام، محمد بن إسماعيل الصنعاني، الناشر: دار الحديث. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح،علي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان،الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002. فتح الباري شرح صحيح البخاري،أحمد بن علي بن حجر، الناشر: دار المعرفة - بيروت، 1379، رقم كتبه وأبوابه وأحاديثه: محمد فؤاد عبد الباقي، قام بإخراجه وصححه وأشرف على طبعه: محب الدين الخطيب، وعليه تعليقات العلامة: عبد العزيز بن عبد الله بن باز.

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यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com