- توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام، مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة، الطبعة الخامِسَة، 1423هـ - 2003م. - بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية، الطبعة الأولى، 1435هـ - 2014م. - صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت. - عون المعبود شرح سنن أبي داود، ومعه حاشية ابن القيم، للعظيم آبادي، دار الكتب العلمية – بيروت، الطبعة الثانية، 1415هـ. - فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية - الطبعة الأولى، 1427ه - 2006م. - منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان، دار ابن الجوزي، ط1، 1428ه.
तशरीह के साथ हदीसें
मैंने बच्चे को दूध पिलाने के दिनों में, पत्नी से संभोग करने से, मना करने का इरादा कर लिया था, लेकिन रूम तथा फ़ारस वालों को देखा कि वे ऐसा करते हैं और इससे उनके बच्चों को कुछ नुक़सान नहीं होता।
عن جُذَامَةَ بنت وهب، أخت عكاشة، قالت: حَضَرْتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم ، في أناس وهو يقول: «لقد هَمَمْتُ أن أنهى عن الْغِيلَةِ، فَنَظَرْتُ في الروم وفارس، فإذا هم يُغِيلُونَ أولادهم، فلا يضر أولادهم ذلك شيئا»، ثم سألوه عن الْعَزْلِ؟ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «ذلك الْوَأْدُ الخفي»، زاد عبيد الله في حديثه: عن المقرئ، وهي: {وَإِذَا الْمَوْءُودَةُ سُئِلَتْ}.
उक्काशा (रज़ियल्लाहु अंहु) की बहन जुज़ामा बिंत वहब (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि मैं कुछ लोगों के साथ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई। उस समय आप कह रहे थेः "मैंने बच्चे को दूध पिलाने के दिनों में पत्नी से संभोग करने से मना करने का इरादा कर लिया था, लेकिन रूम तथा फ़ारस वालों को देखा कि वे ऐसा करते हैं और इससे उनके बच्चों को कुछ नुक़सान नहीं होता।" फिर आपसे अज़्ल (संभोग के समय वीर्य स्खलन से पहले लिंग को योनि से निकाल लेना) के बारे में पूछा गया, तो फ़रमायाः "यह गुप्त रूप से जीवित गाड़ना है।" उबैदुल्लाह ने मुक़री से रिवायत करते हुए अपनी हदीस में यह इज़ाफ़ा किया हैः तथा इसी का ज़िक्र इस आयत में हैः {وَإِذَا الْمَوْءُودَةُ سُئِلَتْ} {तथा जब जीवित गाड़ी हुई बच्ची से पूछा जाएगा।} [सूरा अत-तकवीरः 8]
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com