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तशरीह के साथ हदीसें

क्रय-विक्रय की हराम सूरतें

10 हदीसें

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने व्यवसायिक काफ़िलों से आगे जाकर मिलने और देहात वाले की ओर से नगर वासी के बेचने से मना किया है।

عن عبد الله بن عباس رضي الله عنهما قال: «نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن تُتَلَقَّى الرُّكْبَانُ، وأن يبيع حاضرٌ لِبَادٍ، قال: فقلت لابن عباس: ما قوله حاضرٌ لِبَادٍ؟ قال: لا يكون له سِمْسَارًا».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने व्यवसायिक काफ़िलों से आगे जाकर मिलने और देहात वाले की ओर से नगर वासी के बेचने से मना किया है। वर्णनकर्ता कहते हैं कि मैंने इब्ने अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से पूछा कि देहात वाले की ओर से नगर वासी के बेचने का मतलब क्या है? उन्होंने उत्तर दिया : नगर वासी देहात वाले का दलाल न बने।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने क्रय-विक्रय के कुछ वर्जित प्रारूपों से मना किया है, जिनके अंदर या तो बेचने वाले, या ख़रीदने वाले या उनके अलावा किसी और का नुक़सान छुपा होता है। आपने इस बात से मना किया है कि जो लोग अपने सामान जैसे अनाज और जानवर आदि बाज़ार की ओर ला रहे हों, उनके बाज़ार पहुँचने से पहले ही उनसे जाकर मिल लिया जाए और उनका सामान ख़रीद लिया जाए। मना करने का कारण यह है कि ऐसे लोग बाज़ार के भाव से अनभिज्ञ होते हैं और इस बात की संभावना रहती है कि उनसे सस्ते दामों में सामान ख़रीदकर उन्हें उस मूल्य से वंचित कर दिया जाए, जिसके लिए वे दूर-दराज़ के क्षेत्रों से यात्रा करके आए हैं और कठिनाइयाँ झेली हैं। जबकि कुछ लोग बिना किसी मेहनत के बैठे-बिठाए भारी मुनाफ़ा कमा लें। दूसरी चीज़ जिससे आपने मना किया है, यह है कि देहात या गाँव का रहने कोई व्यक्ति अपना सामान नगर ले जाए, ताकि उसे उस दिन के भाव से या उस भाव से जिसकी उसे आवश्यकता हो, बेच सके, लेकिन कोई नगरवासी उसके पास आए और कहे कि तुम उसे मेरे पास रख दो, मैं उसे धीरे-धीरे महंगे दामों में बेच दूँगा। इससे मना करने का कारण यह है कि इसमें नगरवासियों की हानि छुपी होती है। इस तरह देखा जाए, तो शरीयत ने शहर से दूर रहने वाले मूल्य से अनभिज्ञ बेचने वाले के अधिकार की भी सुरक्षा की है और नगरवासियों के अधिकार की भी सुरक्षा की है।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، فيصل بن عبد العزيز النجدي، الطبعة: الثانية، 1412 هـ - 1992م. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم، لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुज़ाबना यानी इस बात से मना फ़रमाया है कि बाग में लगे हुए फल यदि खजूर हों, तो उन्हें सूखी खजूरों के बदले में नापकर बेचा जाए, और अगर अंगूर हों तो उन्हें किशमिश के बदले में नापकर बेचा जाए या फिर खेती को गल्ले के बदले में नापकर बेचकर जाए। आपने इन सब से मना किया है।

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما قال: «نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عن المُزَابَنَةِ: أن يبيع ثَمَرَ حَائِطِهِ إن كان نَخْلًا: بتَمْرٍ كَيْلًا، وإن كان كَرْمًا: أن يبيعه بزبيب كَيْلًا، أو كان زَرْعًا: أن يبيعه بكَيْلِ طعام، نهى عن ذلك كله».
अब्दल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुज़ाबना यानी इस बात से मना फ़रमाया है कि बाग में लगे हुए फल यदि खजूर हों, तो उन्हें सूखी खजूरों के बदले में नापकर बेचा जाए, और अगर अंगूर हों तो उन्हें किशमिश के बदले में नापकर बेचा जाए या फिर खेती को गल्ले के बदले में नापकर बेचकर जाए। आपने इन सब से मना किया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुज़ाबना से मना किया है। मुज़ाबना नाम है ज्ञात वस्तु को उसी जिंस की अज्ञात वस्तु के बदले में बेचने का। मना करने का कारण यह है कि इस क्रय-विक्रय में दोनों पक्षों में से किसी एक के नुक़सान के साथ-साथ दोनों वस्तुओं के बराबर होने की जानकारी का भी अभाव है, जो सूद का कारण बन सकता है। इस क्रय-विक्रय को स्पष्ट करने के लिए इसकी कई मिसालें दी गई हैं। जैसे खजूर के बाग में लगे हुए फल को सूखी खजूर के बदले नापकर बेचना, अंगूर के बाग में लगे हुए अंगूर को किशमिश के बदले नापकर बेचना और खेत में लगी हुइ फसल के अनाज को उसी जिंस के अनाज से नापकर बेचना आदि। आपने क्रय-विक्रय की इन सारी शक्लों से मना किया है, क्योंकि इनके अंदर कई ख़राबियाँ और नुक़सान हैं।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام، للشيخ إسماعيل الأنصاري، مطبعة السعادة، الطبعة الثانية 1392هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام، تحقيق محمد صبحي حسن حلاق، مكتبة الصحابة، الشارقة، الطبعة العاشرة 1426هـ. خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، لفيصل بن عبد العزيز المبارك، الطبعة: الثانية، 1412هـ - 1992م. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة، (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुनाबज़ा से मना किया है। वह यह है कि बेचने वाला अपना कपड़ा ख़रीदने वाले की ओर बेचने के लिए फेंक दे और उसे उलटने पलटने या देखने का अवसर न मिले। इसी तरह आपने मुलामसा से भी मना किया है। वह यह है कि खरीदने वाला कपड़े को केवल छू ले और उसे देखे नहीं।

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه مرفوعاً: «أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن الْمُنَابَذَةِ-وهي طرح الرجل ثوبه بالبيع إلى الرجل قبل أن يقلبه، أو ينظر إليه-، ونهى عن الْمُلَامَسَةِ -والملامسة: لمس الرجل الثوب ولا ينظر إليه-».
अबू सईद खुदरी -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुनाबज़ा से मना किया है। वह यह है कि बेचने वाला अपना कपड़ा ख़रीदने वाले की ओर बेचने के लिए फेंक दे और उसे उलटने पलटने या देखने का अवसर न मिले। इसी तरह आपने मुलामसा से भी मना किया है। वह यह है कि खरीदने वाला कपड़े को केवल छू ले और उसे देखे नहीं।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने धोखायुक्त क्रय-विक्रय से मना किया है, क्योंकि उसमें खरीदने तथा बेचने वाले में से किसी एक का नुक़सान छुपा होता है और उसे खरीदने अथवा बेचने में धोखे का शिकार होकर नुक़सना उठाना पड़ता है। इसे आप यूँ समझ सकते हैं कि जैसे बेची जाने वाली वस्तु बेचने वाले, ख़रीदने वाले या दोनों के लिए नामालूम हो। इसका एक रूप मुनाबज़ा नामी क्रय-विक्रय है, जो बेचने वाले के खरीदार की ओर बेची जाने वाली वस्तु, जैसे कपड़ा आदि के फेंक देने मात्र से लागू हो जाता है, और खरीदार को उसे उलटने-पलटने तथा देखने का तक का अवसर नहीं दिया जाता है। इसका दूसरा रूप मुलामसा नामी क्रय-विक्रय है, जो सामान जैसे कपड़ा आदि के छू लेने मात्र से लागू हो जाता है और ख़रीदार को देखने तथा पलटने का अवसर नहीं मिलता। क्रय-विक्रय के यह दोनों रूप, सामान के संबंध में जानकारी के अभवा और धोखे का कारण बनते हैं। ख़रीदने तथा बेचने वाले में से कोई एक खतरे में रहता है कि या तो फ़ायदे में रहेगा या नुक़सान में पड़ जाएगा। इसलिए दोनों जुए के हुक्म में होंगे, जिससे कि मना किया गया है।

हवाला

- صحيح البخاري -الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه - خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام- فيصل بن عبد العزيز بن فيصل ابن حمد المبارك الحريملي النجدي - الطبعة: الثانية، 1412 هـ - 1992 م.

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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने (पेड़ पर लगे हुए) फल को रंग पकड़ने से पहले बेचने से मना किया है। पूछा गया कि रंग पकड़ने का क्या मतलब है? तो फ़रमाया : वह लाल हो जाएँ। फ़रमाया : "भला बताओ कि यदि अल्लाह ने फल रोक लिए, तो बेचने वाला किस चीज़ के बदले अपने भाई के धन को हलाल बनाएगा?"

عن أنس بن مالك رضي الله عنه مرفوعاً: «أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن بيع الثمار حتى تُزْهِي. قيل: وما تُزْهِي؟ قال: حتى تَحمَرَّ. قال: أرأيت إن مَنَعَ اللهُ الثمرة، بِمَ يستحِلُّ أحدُكُم مال أخيه؟».
अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने (पेड़ पर लगे हुए) फल को रंग पकड़ने से पहले बेचने से मना किया है। पूछा गया कि रंग पकड़ने का क्या मतलब है? तो फ़रमाया : वह लाल हो जाएँ। फ़रमाया : "भला बताओ कि यदि अल्लाह ने फल रोक लिए, तो बेचने वाला किस चीज़ के बदले अपने भाई के धन को हलाल बनाएगा?"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

फल पकने से पूर्व, उस पर अधिकांश आपदाएं आती रहती हैं और उसके बेचने में उस समय खरीदार का कोई हित नहीं है। अतः नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने खरीदार तथा बेचने वाले दोनों को लाल होने तक बेचने से मना फ़रमाया। फिर विधि विधान करने वाले ने बिक्री से मनाही का करण बताया कि यदि पूरे अथवा कुच्छ फलों पर कोई आपदा आजाए, तो कैसे किसी बदले के बिना तुम अपने भाई का माल लोगे?

हवाला

صحيح البخاري ، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. -تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه. -خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام- فيصل بن عبد العزيز بن فيصل ابن حمد المبارك الحريملي النجدي - الطبعة: الثانية، 1412 هـ - 1992 م -فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام للشيخ ابن عثيمين- المكتبة الإسلامية القاهرة- تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي- الطبعة الأولى 1427-

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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फलों को प्रयोग के लायक़ होने से पहले बेचने से मना किया है। आपने बेचने वाले और ख़रीदने वाले दोनों को मना किया है।

عن عبد الله بن عمر- رضي الله عنهما- مرفوعاً: «أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن بيع الثمرة حتى يبدو صلاحها، نهى البائع و المُبْتَاعَ».
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फलों को प्रयोग के लायक़ होने से पहले बेचने से मना किया है। आपने बेचने वाले और ख़रीदने वाले दोनों को मना किया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फलों को उस समय तक बेचने से मना फऱमाया है, जब तक उनके पकने के लक्षण दिखने न लगें। आपने इससे बेचने तथा ख़रीदने वाले दोनों को मना किया है।

हवाला

- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. -الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. -تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه. -فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام للشيخ ابن عثيمين- المكتبة الإسلامية القاهرة- تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي- الطبعة الأولى 1427ه.

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अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने 'वला' (ऐसा अधिकार जिसके कारण दास को मुक्त करने वाला अपने मुक्त किए दास के मरने के बाद उसकी संपत्ति में से निर्दिष्ट हिस्सों वालों के बाद शेष भाग का वारिस बनता है) को बेचने तथा उसे उपहारस्वरूप देने से मना फ़रमाया है।

عن عبد الله بن عمر- رضي الله عنهما- مرفوعاً: «أن النبي صلى الله عليه وسلم نهى عن بيع الوَلاءِ وعن هِبَتِهِ».
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने 'वला' (ऐसा अधिकार जिसके कारण दास को मुक्त करने वाला अपने मुक्त किए दास के मरने के बाद उसकी संपत्ति में से निर्दिष्ट हिस्सों वालों के बाद शेष भाग का वारिस बनता है) को बेचने तथा उसे उपहारस्वरूप देने से मना फ़रमाया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

वला' नसब ही की तरह एक आत्मीय संबंध है और दोनों को क्रय-विक्रय एवं दान के माध्यम से प्राप्त नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि 'वला' को बेचा एवं दान नहीं किया जा सकता। दरअसल यह मुक्ति प्रदान करने वाले और मुक्ति प्राप्त करने वाले के बीच एक संबंध है, जिसके आधार पर पहला व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की मीरास का उत्तराधिकारी बनता है। इसे बेचने तथा दान करने से मना इसलिए किया गया है, क्योंकि यह नसब ही की तरह हस्तांतरित करने से हस्तांतरित होता नहीं है। उदाहरणस्वरूप यदि कोई व्यक्ति अपने भाई, अपने बेटे या अपने भतीजे से अपने संबंध को बेचना चाहे, तो ऐसा किया नहीं जा सकता। नसब सो बेचा नहीं जा सकता और यही हाल वला का भी है।

हवाला

- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. -الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. -تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه.

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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने गर्भ के गर्भ को बेचने से मना फ़रमाया है।

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن بيع حَبَلِ الحَبَلَةِ ،وكان بيعا يتبايعه أهل الجاهلية، وكان الرجل يبتاع الجَزُورَ إلى أن تُنتِجَ الناقة، ثم تُنتِج التي في بطنها. قيل: إنه كان يبيع الشارف -وهي الكبيرة المسنة- بنتاج الجنين الذي في بطن ناقته.
अब्दुल्लाहु बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने गर्भ के गर्भ को बेचने से मना फ़रमाया है, जो कि जाहिलिय्यतकाल में प्रचलित था। होता यह था कि एक व्यक्ति ऊँटनी खरीदता और मूल्य उस समय देने का वचन देता, जब वह ऊँटनी बच्चा जने और फिर उस बच्चे के पेट से बच्चा पैदा हो। यह भी कहा जाता है कि आदमी बूढ़ी ऊँटनी को दूसरी ऊँटनी के पेट में पल रहे बच्चे के बच्चे के बदले में बेचता था।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

यह एक हराम क्रय-विक्रय है और इसकी दो व्याख्याएँ की गई हैं : 1- इसका अर्थ लटकाए रखने का हो। इसकी तफ़सील यह है कि कोई व्यक्ति किसी को अपना सामान उधार बेचे और क़ीमत अदा करने की समय सीमा यह तय करे कि उसकी ऊँटनी बच्चा दे और फिर उस बच्चे के पेट से बच्चा पैदा हो जाए। इस क्रय-विक्रय से मना करने का कारण यह है कि यहाँ क़ीमत अदा करने का समय निश्चित नहीं है, जबकि अदायगी के समय के लंबा अथवा छोटा होने से क़ीमत का प्रभावित होना सर्वविदित है। 2- इसका अर्थ हो गैरमौजूद तथा नामालूम वस्तु को बेचना। इसकी तफ़सील यह है कि कोई आदमी किसी को किसी जानवर के पेट में पलने वाले पच्चे के पेट से पैदा होने वाले बच्चे को बेचे। इस तरह की ख़रीद-फ़रोख़्त से मना करने का कारण यह है कि इसके अंदर बहुत बड़ा नुक़सान तथा घाटा छुपा हुआ है। क्योंकि कोई नहीं जानता कि जानवर के पेट से नर पैदा होगा या मादा, एक होगा या दो, जीवित होगा या मृत? साथ ही इसमें वस्तु की प्राप्ति का समय भी अनिश्चित है और इस तरह के अनिश्चित क्रय-विक्रय के बहुत-से नुकसान सामने आते हैं, जो विवादों का कारण बनते हैं। इस तरह से देखा जाए तो इस मससे के चार रूप बनते हैं : पहला रूप : ऊँटनी के गर्भ को बेचना। दूसरा रूप : ऊँटनी के गर्भ के गर्भ को बेचना। यहाँ बेची जाने वाली वस्तु नामालूम और अनिश्चित है। तीसरा रूप : बेची जाने वाली वस्तु को बाद में देने की बात करना। यानी सामान को उस समय ख़रीदार के हलाले करने की बात कहना, जब ऊँटनी का बच्चा पैदा हो या उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का बच्चा पैदा हो। चौथा रूप : सामान तो हवाले कर दिया जाए, लेकिन क़ीमत को अनिश्चित समय तक के लिए उधार रखा जाए।

हवाला

- صحيح البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام، للشيخ إسماعيل الأنصاري -مطبعة السعادة- الطبعة الثانية 1392هـ. -تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام، تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426هـ. -فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين -المكتبة الإسلامية القاهرة- تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي، الطبعة الأولى 1427ه-.

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अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भूमि के किसी एक भाग की पैदावार के बदले में भूमि किराए पर लेने, बाली में मौजूद गेहूँ को बाली से अलग किए हुए गेहूँ के बदले में बेचने, पेड़ में लगी हुई खुजूर को तोड़ी हुई खुजूर के बदले में बेचने, फल को उपयोग के योग्य होने से पहले बेचने तथा उसे दीनार एवं दिर्हम के अतिरिक्त किसी और वस्तु के बदले में बेचने से मना किया है। मगर हाँ, ताज़ा खुजूरों को सूखी खुजूरों के बदले में अनुमान लगाकर बेचने की अनुमति दी है।

عن جابر بن عبد الله رضي الله عنهما مرفوعاً: نهى النبي صلى الله عليه وسلم عن المُخَابَرَةِ والمُحَاقَلَةِ، وعن المُزَابنة، وعن بيع الثَّمَرَة حتى يَبدُو صَلاحُها، وأن لا تبُاع إلا بالدينار والدرهم، إلا العَرَايَا.
जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भूमि के किसी एक भाग की पैदावार के बदले में भूमि किराए पर लेने, बाली में मौजूद गेहूँ को बाली से अलग किए हुए गेहूँ के बदले में बेचने, पेड़ में लगी हुई खुजूर को तोड़ी हुई खुजूर के बदले में बेचने, फल को उपयोग के योग्य होने से पहले बेचने तथा उसे दीनार एवं दिर्हम के अतिरिक्त किसी और वस्तु के बदले में बेचने से मना किया है। मगर हाँ, ताज़ा खुजूरों को सूखी खुजूरों के बदले में अनुमान लगाकर बेचने की अनुमति दी है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फलों से संबंधित कई ऐसी ख़रीद-बिक्रियों को मना किया है। क्योंकि इन खरीद-बिक्रियों में दोनों अथवा किसी एक पक्ष के नुक़सान की संभावना रहती है। इन्हीं वर्जित मामलों में से एक 'मुख़ाबरा' है। मुख़ाबरा का अर्थ है, ज़मीन को, उसके किसी निश्चित भाग की पैदावार के बदले में किराये पर देना। जबकि उचित यह है कि उसे उसकी पैदावार के एक निश्चित भाग के बदले में, जो न्यायसंगत हो, दिया जाए। इसी प्रकार बाली में मौजूद गेहूँ को, बाली से अलग गेहूँ के बदले बेचने से मना किया है। साथ ही पेड़ पर लगी खजूर को उसी के समान खजूर से बेचने से भी मना किया है। इस बात से भी मना किया है कि फल को प्रयोग के योग्य होने से पहले बेचा जाए। परन्तु ताजा खजूर को, इस बात का अंदाज़ा लगाने के बाद कि उसका वज़न कितना होगा, उसके बराबर सूखी खजूर के बदले में बेचना जायज़ है। लेकिन शर्त यह है कि वज़न पाँच वसक़ या उससे कम हो। इस संदर्भ में कई हदीसें मौजूद हैं।

हवाला

- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب، الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري، مطبعة السعادة، الطبعة الثانية 1392ه. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله البسام، تحقيق محمد صبحي حسن حلاق، مكتبة الصحابة، الشارقة، الطبعة العاشرة، 1426ه.

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10 में से 8
10 हदीसें
  1. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने व्यवसायिक काफ़िलों से आगे जाकर मिलने और देहात वाले की ओर से नगर वासी के बेचने से मना किया है।
  2. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुज़ाबना यानी इस बात से मना फ़रमाया है कि बाग में लगे हुए फल यदि खजूर हों, तो उन्हें सूखी खजूरों के बदले में नापकर बेचा जाए, और अगर अंगूर हों तो उन्हें किशमिश के बदले में नापकर बेचा जाए या फिर खेती को गल्ले के बदले में नापकर बेचकर जाए। आपने इन सब से मना किया है।
  3. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुनाबज़ा से मना किया है। वह यह है कि बेचने वाला अपना कपड़ा ख़रीदने वाले की ओर बेचने के लिए फेंक दे और उसे उलटने पलटने या देखने का अवसर न मिले। इसी तरह आपने मुलामसा से भी मना किया है। वह यह है कि खरीदने वाला कपड़े को केवल छू ले और उसे देखे नहीं।
  4. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने (पेड़ पर लगे हुए) फल को रंग पकड़ने से पहले बेचने से मना किया है। पूछा गया कि रंग पकड़ने का क्या मतलब है? तो फ़रमाया : वह लाल हो जाएँ। फ़रमाया : "भला बताओ कि यदि अल्लाह ने फल रोक लिए, तो बेचने वाला किस चीज़ के बदले अपने भाई के धन को हलाल बनाएगा?"
  5. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फलों को प्रयोग के लायक़ होने से पहले बेचने से मना किया है। आपने बेचने वाले और ख़रीदने वाले दोनों को मना किया है।
  6. अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने 'वला' (ऐसा अधिकार जिसके कारण दास को मुक्त करने वाला अपने मुक्त किए दास के मरने के बाद उसकी संपत्ति में से निर्दिष्ट हिस्सों वालों के बाद शेष भाग का वारिस बनता है) को बेचने तथा उसे उपहारस्वरूप देने से मना फ़रमाया है।
  7. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने गर्भ के गर्भ को बेचने से मना फ़रमाया है।
  8. अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भूमि के किसी एक भाग की पैदावार के बदले में भूमि किराए पर लेने, बाली में मौजूद गेहूँ को बाली से अलग किए हुए गेहूँ के बदले में बेचने, पेड़ में लगी हुई खुजूर को तोड़ी हुई खुजूर के बदले में बेचने, फल को उपयोग के योग्य होने से पहले बेचने तथा उसे दीनार एवं दिर्हम के अतिरिक्त किसी और वस्तु के बदले में बेचने से मना किया है। मगर हाँ, ताज़ा खुजूरों को सूखी खुजूरों के बदले में अनुमान लगाकर बेचने की अनुमति दी है।
  9. व्यवसायिक दलों से आगे बढ़कर न मिलो, तुममें से कोई अपने भाई के सौदे पर सौदा न करे, आपस में दाम न बढ़ाओ, नगर का रहने वाला देहात में रहने वाले का सामान न बेचे तथा दूध देने वाली ऊँटनी और बकरी को बेचने के लिए थन में उसका दूध रोक कर न रखो।
  10. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस बात से मना किया है कि कोई नगर का रहने वाला किसी देहात में रहने वाले का सामान बेचे (तथा फ़रमाया कि) तुम आपस में दाम न बढ़ाओ तथा कोई अपने भाई के सौदे पर सौदा न करे और न उसके विवाह-संदेश पर अपना विवाह-संदेश भेजे।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com