عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضيَ اللهُ عنهما قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا جَمَعَ اللهُ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يُرْفَعُ لِكُلِّ غَادِرٍ لِوَاءٌ، فَقِيلَ: هَذِهِ غَدْرَةُ فُلَانِ بْنِ فُلَانٍ».
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब क़यामत के दिन अल्लाह पहले के और बाद के तमाम लोगों को एकत्र करेगा, तो हर विश्वासघात करने वाले के लिए एक-एक झंडा ऊँचा किया जाएगा। कहा जाएगा : यह अमुक के पुत्र अमुक का विश्वासघात है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि जब अल्लाह क़यामत के दिन हिसाब के लिए अगले तथा पिछले तमाम लोगों को एकत्र करेगा, तो अल्लाह खुद अपने साथ या लोगों के साथ किए हुए किसी वादे को पूरा न करने वाले हर विश्वासघाती के लिए एक-एक चिह्न बना देगा, जिससे उसके विश्वासघात पर उसकी रुसवाई हो सके। उस दिन उसके खिलाफ यह पुकारा जाएगा : यह अमुक के बेटे अमुक का विश्वासघात है। ऐसा उसके कुकर्मों से हश्र के मैदान में एकत्र तमाम लोगों अवगत करने के लिए किया जाएगा।
फ़ायदे
- विश्वासघात करना हराम तथा कबीरा गुनाह है। क्योंकि इस प्रकार के व्यक्ति को बड़ी सख़्त चेतावनी दी गई है।
- जिस ख़यानत से यहाँ चेताया गया है, उसमें हर वो व्यक्ति दाख़िल है, जिसने अपने रक्त, इज़्ज़त-आबरू, भेद या धन के बारे में आपको अमीन बनाया और आपने उसके विश्वास के विपरीत काम करते हुए उसके साथ ख़यानत कर डाली।
- क़ुर्तुबी कहते हैं : यह बात अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अरबों की प्रथा को ध्यान में रखते हुए कही है। क्योंकि अरब वादा पूरा करने पर सफ़ेद झंडा ऊँचा करते थे और धोखा देने पर काला झंडा ऊँचा करते थे, ताकि लोग धोखा देने वाले की भर्त्सना तथा निंदा करें। अतः इस हदीस में बताया गया है कि धोखा देने वाले के साथ ऐसा ही होगा, ताकि हश्र के मैदान में एकत्र लोग उसके इस कुकृत्य से भली-भाँति अवगत हो जाएँ और उसकी निंदा करें।
- इब्न-ए-हजर करते हैं : इस हदीस से मालूम होता है कि क़यामत के दिन लोगों को उनके पिता के नाम के साथ पुकारा जाएगा। इस हदीस के शब्द हैं : "यह अमुक पुत्र अमुक का विश्वासघात है।"
हवाला
صحيح البخاري (4/ 104) (3188)
صحيح مسلم (3/ 1359) (1735).
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص745).
الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (2/ 188).
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُما: أَنَّ امْرَأَةً وُجِدَتْ فِي بَعْضِ مَغَازِي النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَقْتُولَةً، فَأَنْكَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَتْلَ النِّسَاءِ وَالصِّبْيَانِ.
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : एक औरत अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़माने में होने वाले किसी युद्ध में निहत पाई गई, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने औरतों एवं बच्चों की हत्या का खंडन किया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसी युद्ध में एक निहत औरत को देखा, तो औरतों और छोटे बच्चों की हत्या का खंडन किया।
फ़ायदे
- युद्ध में शामिल न होने वाले लोग, जैसे औरतों, बच्चों और शरीयत की नज़र में उनके जैसे दूसरे लोगों,जैसे बूढ़ों और दुनिया से कटे हुए लोगों को क़त्ल नहीं किया जाएगा, जब तक ये लोग मुसलमानों से जंग में अपनी राय या किसी और तरीक़े से मदद न करते हों। अगर मदद करते हों, तो उनको भी क़त्ल किया जाएगा।
- औरतों और बच्चों की हत्या की मनाही, क्योंकि ये लोग मुसलमानों से युद्ध नहीं करते। दरअसल अल्लाह की राह में युद्ध का उद्देश्य युद्धरत लोगों के दबदबे को तोड़ना है, ताकि इस्लाम की आवाज़ तमाम लोगों तक पहुँच सके।
- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की दया की झलकियाँ युद्ध में भी देखने को मिलती हैं।
हवाला
صحيح البخاري (4/ 61) (3014).
صحيح مسلم (3/ 1364) (1744).
الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (2/ 189).
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص746).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبد الله بن أبي أوفى رضي الله عنه أَنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم فِي بَعْض أَيَّامه التي لَقِي فيها العدو انتظر، حتى إذا مَالَتِ الشمس قام فِيهم، فقال: «أَيُّها الناس، لا تَتَمَنَّوْا لِقَاء الْعَدُوِّ، وَاسْأَلوا الله الْعافية فَإِذا لَقِيتموهم فَاصْبِرُوا، وَاعلموا أَنَّ الْجَنَّة تحت ظِلال السُّيوف ثُمَّ قَال النَّبِي صلى الله عليه وسلم: اللهمَّ مُنزِلَ الْكتاب، وَمُجْرِيَ السَّحاب، وَهازم الأَحْزاب: اهْزِمهم، وَانصُرنا علَيهم».
अब्दुल्लाह बिन अबू औफ़ा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल-सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक युद्ध में, जिसमें शत्रु का सामना था, प्रतीक्षा में रहे, यहाँ तक कि जब सूर्य ढल गया, तो अपने साथियों के बीच खड़े हुए और कहाः "लोगो, दुश्मन से मुठभेड़ की कामना न करो, बल्कि अल्लाह से आफ़ियत तलब करो। परन्तु जब मुठभेड़ हो जाए, तो डटकर मुक़ाबला करो और जान लो कि जन्नत तलवारों की छाँव में है।" फिर यह दुआ फ़रमाईः "ऐ अल्लाह, किताब उतारने वाले, बादलों को चलाने वाले और गिरोहों को पराजित करने वाले, इन्हें पराजय का मुँह दिखा और हमें इनपर विजय प्रदान कर।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
अब्दुल्लाह बिन अबी औफ़ा -अल्लाह उन से प्रसन्न हो- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक जंग में सुरज ढलने तक प्रतिक्षा करने के बाद लोगों के समक्ष खड़े हुए -और आम आदत के अनुसार ज़ुहर की नमाज़ के बाद ही खड़े हुए होंगे- तो उन्हें शत्रुओं से जंग की कामना करने से मनाही की, क्योंकि इस में अभिमान है और अल्लाह से आफ़ियत (सलामती) मांगने का आदेश दिया। फिर फ़रमायाः यदि तुम्हारी शत्रुओं से जंग हो जाए, तो डटे रहो, अधीर न बनो और यक़ीन करलो कि दो उत्तम वस्तुओं में से एक अवश्य मिलेगी, अल्लाह तुम्हारी शत्रु के खिलाफ़ सहायता करेगा और तुम्हारी जीत होगी, तथा दुनिया में दुशमनों पर जीत और प्रलय में नेकी दोनों से अल्लाह तुम्हें सम्मानित करेगा अथवा जिहात के दौरान अपनी क्षमता का पूर्ण इस्तेमाल के बावजूद तुम हारोगे, तो तुम्हें आखिरत का सवाब मिलेगा। आप का यह कहना कि जन्नत तलवारों की छाया में है, इसका अभिप्राय यह है कि जिहाद जन्नत का रास्ता है। उसके बाद अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने रब से उसकी उतारी हुई शरीयत और पूर्ण क्षमता के वसीले से प्रार्थना की कि वह मुसलमानों की शत्रुओं पर सहायता करे और अल्लाह ही सामर्थ्य देने वाला है।
हवाला
- صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه.
- صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423 هـ.
- عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ
- تأسيس الأحكام للنجمي، ط2، دار علماء السلف، 1414ه
- الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381ه
- تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ
- الإعلام بفوائد عمدة الأحكام لابن الملقن المحقق: عبد العزيز بن أحمد بن محمد المشيقح دار العاصمة للنشر والتوزيع، المملكة العربية السعودية الطبعة: الأولى، 1417 هـ - 1997 م.
- الاستذكار لابن عبد البر، تحقيق سالم محمد عطا، محمد علي معوض، دار الكتب العلمية - بيروت، الطبعة: الأولى، 1421 - 2000.
- تحفة الأحوذي للمباركفوري - دار الكتب العلمية - بيروت.
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ أَبِي مُوسَى رضي الله عنه قَالَ: سُئِلَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنِ الرَّجُلِ يُقَاتِلُ شَجَاعَةً، وَيُقَاتِلُ حَمِيَّةً، وَيُقَاتِلُ رِيَاءً، أَيُّ ذَلِكَ فِي سَبِيلِ اللهِ؟ فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ قَاتَلَ لِتَكُونَ كَلِمَةُ اللهِ هِيَ الْعُلْيَا، فَهُوَ فِي سَبِيلِ اللهِ».
अबू मूसा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से उस व्यक्ति के बारे में पूछा गया, जो बहादुरी दिखाने के लिए लड़ता हो, तथा उस व्यक्ति के बारे में पूछा गया जो अपनी क़ौम या देश के बचाव के लिए लड़ता हो एवं उस व्यक्ति के बारे में पूछा गया जो दिखावे के लिए लड़ता हो, इनमें से किसकी लड़ाई अल्लाह की राह में है? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उत्तर दिया : "जिसने युद्ध अल्लाह के शब्द को ऊँचा करने के लिए किया, उसका युद्ध अल्लाह की राह में है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से जंग करने वालों के अलग-अलग उद्देश्यों के बारे में पूछा गया कि एक व्यक्ति बहादुरी दिखाने के लिए जंग करता है, एक व्यक्ति स्वाभिमान के लिए जंग करता है और एक व्यक्ति लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने के लिए युद्ध करता है, तो उनमें से किसकी जंग अल्लाह के मार्ग में की जाने वाली जंग शुमार होगी? जवाब में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया : अल्लाह के मार्ग में जंग करने वाला वह शुमार होगा, जिसने अल्लाह के कलिमा को ऊँचा करने के लिए युद्ध किया।
फ़ायदे
- आमाल के शुद्ध और अशुद्ध होने की निर्भरता नीयत और अल्लाह के प्रति निष्ठा पर है।
- जब जिहाद का उद्देश्य अल्लाह के कलिमा (वाणी) को ऊँचा करना हो और कोई दूसरा जायज़ उद्देश्य, जैसे माल-ए-ग़नीमत की प्राप्ति आदि उससे जुड़ जाए, तो उससे असल नीयत का कोई नुक़सान नहीं होगा।
- वतन (देश) एवं मान-सम्मान की रक्षा के लिए दुश्मनों से लड़ना भी अल्लाह के मार्ग में की जाने वाली जिहाद के अन्तर्गत है।
- मुजाहिदों से संबंधित फ़ज़ीलत का हक़दार वही व्यक्ति है, जो अल्लाह के कलिमा (वाणी) को ऊँचा करने के लिए जिहाद करे।
हवाला
صحيح البخاري (9/ 136) (7458).
صحيح مسلم (3/ 1513) (1904).
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص753).
الإعلام بفوائد عمدة الأحكام، لابن الملقن (10/ 380).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي هريرة رضي الله عنه قال: بَعَثَنَا رسول الله صلى الله عليه وسلم في بَعْثٍ، فقال: «إن وجَدْتُم فُلانا وفُلانا» لرجلين من قُرَيْش سَمَّاهُما «فأَحْرِقُوهُمَا بالنَّار» ثم قال رسول الله صلى الله عليه وسلم حين أردنا الخروج: «إني كنت أَمَرْتُكُمْ أن تُحْرِقُوا فلانًا وفلانًا، وإن النَّار لا يُعَذِّبُ بها إلا الله، فإن وجَدْتُمُوهُما فاقْتُلُوهُما».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, उन्होंने कहा कि हमें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने किसी लश्कर (फ़ौज) के साथ भेजा और हमसे फ़रमाया: जब तुम क़ुरैश के अमुक और अमुक आदमी को पाओ तो उन्हें आग में जला देना। आपने उनका नाम भी लिया था। अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि फिर हम सफर पर जाने लगे तो आपने फ़रमाया: मैंने तुम लोगों को आदेश दिया था कि फ़लाँ फ़लाँ को जला दो लेकिन अल्लाह के सिवा कोई आग से यातना नहीं दे सकता, इसलिए यदि तुम उन्हें पाओ तो क़त्ल कर दो।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ الطبعة الرابعة عشر 1407 هـ.
كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار ، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430 هـ.
بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م.
رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي ، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل ، الطبعة: الأولى، 1428 هـ.
صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ.
دليل الفالحين، تأليف: محمد بن علان، الناشر: دار الكتاب العربي، نسخة الكترونية ، لا يوجد بها بيانات نشر.
شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426 ه.
यह हदीस HadeethEnc.com परعنْ ابنِ مَسْعُودٍ رَضيَ اللهُ عنهُ قَالَ: كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفَرٍ، فَانْطَلَقَ لِحَاجَتِهِ، فَرَأَيْنَا حُمَّرَةً مَعَهَا فَرْخَانِ، فَأَخَذْنَا فَرْخَيْهَا، فَجَاءَتِ الْحُمَرَةُ فَجَعَلَتْ تَفْرِشُ، فَجَاءَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ: «مَنْ فَجَعَ هَذِهِ بِوَلَدِهَا؟ رُدُّوا وَلَدَهَا إِلَيْهَا»، وَرَأَى قَرْيَةَ نَمْلٍ قَدْ حَرَّقْنَاهَا، فَقَالَ: «مَنْ حَرَّقَ هَذِهِ؟» قُلْنَا: نَحْنُ. قَالَ: «إِنَّهُ لَا يَنْبَغِي أَنْ يُعَذِّبَ بِالنَّارِ إِلَّا رَبُّ النَّارِ».
इब्ने मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के संग एक यात्रा में थे, तो आप किसी आवश्यकता के लिए गए। हमने एक चिड़िया देखा, जिसके दो बच्चे थे। हमने उसके बच्चे पकड़ लिए, तो चिड़िया आई और उनके ऊपर उड़ने लगी। इसी बीच अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आए और फ़रमाया: किसने इसके बच्चे लेकर इसे परेशान किया है? उसे उसके चूज़े वापस करदो। और आपने चींटियों का गावँ देखा, जिसे हमने जला दिया था तो आपने फ़रमाया: किसने इसे जलाया है? हमने कहा: हमने। आपने फ़रमाया: किसी के लिए उपयुक्त नहीं कि आग से सज़ा दे सिवाय आग के रब के।
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
سنن أبي داود (4/ 309) (2675).
نزهة المتقين، لمجموعة من الباحثين (2/ 1105).
كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (19/ 150).
بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (3/ 120).
شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (6/ 300).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن رويفع بن ثابت الأنصاري أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «من كان يؤمن بالله وباليوم الآخر فلا يَركَب دابة مِن فَيءِ المسلمين حتى إذا أَعْجَفَها رَدَّها فيه، ومن كان يؤمن بالله وباليوم الآخر فلا يَلبس ثوبا مِن فَيءِ المسلمين حتى إذا أَخْلَقَه رَدَّه فيه».
रुवैफ़े बिन साबित अंसारी का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जो अल्लाह तथा आख़िरत के दिन पर ईमान रखता हो, वह मुसलमानों के फ़य (मुश्रिकों से बिना युद्ध के प्राप्त होने वाला धन) के जानवर पर इस तरह सवार न हो कि जब उसे कमज़ोर कर दे, तो उसे फ़य लौटा दे और जो अल्लाह तथा आख़िरत के दिन पर ईमान रखता हो, वह मुसलमानों के फ़य के किसी कपड़े को इस तरह न पहने कि जब उसे पुराना कर दे, तो वापस कर दे।"
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
हवाला
- سنن أبي داود، ت: محمد محي الدين, المكتبة العصرية.
- مسند أحمد، تحقيق شعيب الأرنؤوط، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م.
- سنن الدارمي، تحقيق: حسين سليم أسد الداراني, دار المغني للنشر والتوزيع، المملكة العربية السعودية, الطبعة: الأولى، 1412 هـ.
- صحيح أبي داود - الأم، للألباني، مؤسسة غراس للنشر والتوزيع، الطبعة: الأولى، 1423 هـ.
- بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية، الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م.
- تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427 ه - 2006 م.
- منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان، دار ابن الجوزي، ط1 1428هـ.
- فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية، الطبعة الأولى 1427.
- توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام، مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ.
- عون المعبود شرح سنن أبي داود، للعظيم آبادي، دار الكتب العلمية، بيروت, الطبعة: الثانية، 1415 هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परयहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com