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तशरीह के साथ हदीसें

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन लोगों को जंगों में भेजते थे, उन में से कुछ लोगों को विशेष रुप से कुछ ग़नीमत का माल देते थे। यह सेना के आम सदस्यों के भाग से अलग होता था

عن عَبْدُ الله بن عمر رضي الله عنهما «أَنَّ رَسُولَ الله صلى الله عليه وسلم كَانَ يُنَفِّلُ بَعْضَ مَنْ يَبْعَثُ فِي السَّرَايَا لأَنْفُسِهِمْ خَاصَّةً سِوَى قَسْمِ عَامَّةِ الْجَيْشِ».
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन लोगों को जंगों में भेजते थे, उनमें से कुछ लोगों को विशेष रुप से कुछ ग़नीमत का माल देते थे। यह सेना के आम सदस्यों के भाग से अलग होता था।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अब्दुल्लाह बिन उमर -अल्लाह उन दोनों से प्रसन्न हो- बता रहे हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जिन लोगों को जंगों में भेजते थे, उनमें से कुछ लोगों को विशेष रूप से कुछ गनीमत का माल देते थे, जो सेना के आम सिपाहियों को मिलने वाले हिस्सों से अलग होता था। ऐसा इसलिए करते थे, ताकि उनकी हिम्मत बढ़ाई जा सके और जिहाद के प्रति उनका उत्साह बढ़ाया जा सके।

हवाला

- صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة: الأولى 1422هـ. - صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ. - تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار علماء السلف، الطبعة: الثانية 1414هـ. - عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم- لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
जिहाद के अहकाम तथा मसायल

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