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तशरीह के साथ हदीसें

हज तथा उमरा के अहकाम एवं मसायल

16 हदीसें

मुझे हज्जतुल वदा के अवसर पर अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हज कराया गया, जबकि उस समय मेरी आयु सात साल थी।

عن السَّائب بن يزيد رضي الله عنهما قال: «حُجَّ بي مع رسول الله صلى الله عليه وسلم في حجة الوداع، وأنا ابن سبع سنين».
साइब बिन यज़ीद- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि मुझे हज्जतुल वदा के अवसर पर अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हज कराया गया, जबकि उस समय मेरी आयु सात साल थी)।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين؛ لمحمد بن علان الشافعي، دار الكتاب العربي-بيروت. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى، 1430ه.

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अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक ऊँट पर बैठकर हज किया, जिसमें आपके खाने के सामान तथा अन्य वस्तुएँ रखी थीं।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه : أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم حَجَّ على رَحْلٍ وكانتْ زَامِلَتَهُ.
अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक ऊँट पर बैठकर हज किया, जिसमें आपके खाने के सामान तथा अन्य वस्तुएँ रखी थीं।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى 1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا، الطبعة الأولى 1430هـ.

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उकाज़, मजिन्ना और ज़ुल-मजाज़ जाहिलियत काल के बाज़ार थे। पर सहाबा ने हज के दिनों में व्यापार करने को पाप समझा, तो यह आयत उतरीः "ليس عليكم جناح أن تبتغوا فضلاً من ربكم" (अर्थातः तुमपर इसमें कोई गुनाह नहीं है कि अपने पालनहार की अनुकंपा तलाश करो।)

عن عبد الله بن عباس رضي الله عنهما قال: كانت عُكَاظُ، ومَجِنَّةُ، وذُو المجَازِ أسوَاقَاً في الجاهلية، فَتَأَثَّمُوا أنْ يَتَّجِرُوا في المواسم، فنزلت: {ليس عليكم جناح أن تبتغوا فضلاً من ربكم} "البقرة" (198) في مواسم الحج.
अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि उकाज़, मजिन्ना और ज़ुल-मजाज़ जाहिलियत काल के बाज़ार थे। पर सहाबा ने हज के दिनों में व्यापार करने को पाप समझा, तो यह आयत उतरीः "ليس عليكم جناح أن تبتغوا فضلاً من ربكم" (अर्थातः तुमपर इसमें कोई गुनाह नहीं है कि अपने पालनहार की अनुकंपा- आजीविका- तलाश करो।) (सूरा अल-बक़राः 198) हज्ज के दिनों में।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض،1426هـ. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا، الطبعة الأولى 1430ه. - تطريز رياض الصالحين؛ تأليف فيصل آل مبارك، تحقيق د. عبد العزيز آل حمد، دار العاصمة-الرياض، الطبعة الأولى، 1423هـ.

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जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके सहाबा मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार ने दुर्बल बना दिया है! यह सुनकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने सहाबियों को आदेश दिया कि शुरू के तीन चक्करों में दुलकी चाल से चलें, किंतु काबा के यमनी रुक्न और हजर-ए- असवद वाले रुक्न के बीच साधारण चाल से चलें

عن عبد الله بن عباس رضي الله عنهما قال: «لَمَّا قَدِم رسُول الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- وأصحابه مكة، فقَال المُشرِكُون: إِنَّه يَقدَمُ عَلَيكُم قَومٌ وَهَنَتهُم حُمَّى يَثرِب، فَأَمَرَهُم النَّبيُّ -صلَّى الله عليه وسلَّم- أن يَرمُلُوا الأَشوَاطَ الثلاَثَة، وأن يَمشُوا ما بَين الرُّكنَين، ولم يَمنَعهُم أَن يَرمُلُوا الأَشوَاطَ كُلَّها: إلاَّ الإِبقَاءُ عَليهِم».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है, वह कहते हैंः जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके साथी मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार ने दुर्बल बना दिया है! यह सुनकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने साथियों को आदेश दिया कि शुरू के तीन चक्करों में दुलकी चाल से चलें, किन्तु काबा के यमनी रुक्न और हजर-ए- असवद वाले रुक्न के बीच साधारण चाल से चलें। उन्हें सभी चक्करों में दुलकी चाल से चलने का आदेश केवल इसलिए नहीं दिया गया कि उनके साथ आसानी बरती जाए।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सन छः हिजरी में उमरा के इरादे से मक्का आए। साथ में बहुत-से सहाबी भी थे। उधर मक्का के काफ़िर आपसे युद्ध करने तथा आपको अल्लाह के घर काबा से रोकने के लिए निकल पड़े। फिर अंततः, सुलह हो गई। जिसके अनुसार आपको उस साल वापस जाना था और आने वाले साल उमरा के लिए आना था। वे मक्का में केवल तीन दिन रुक सकते थे। अतः, आप सन सात हिजरी में पिछले साल का बाकी उमरा अदा करने के लिए आए। ऐसे में मुश्रिकों ने अपने दिलों को सुकून पहुँचाते और मुसलमानों की हालत पे खुश होते हुए एक-दूसरे से कहाः देखो, तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुख़ार ने दुर्बल बना दिया है। जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को इसकी सूचना मिली, तो उन्हें जवाब देने और उनके क्रोध को और बढ़ाने का मन बना लिया। अपने साथियों को आदेश दिया कि तवाफ़ के समय शुरू के तीन चक्करों में तेज़-तेज़ क़दमों से चलें। हाँ, यमनी रुक्न और हजरे असवद वाले रुक्न के बीच साधारण चाल ही चलें। साधारण चाल चलने का आदेश आप ने मुसलमानों का ख़याल रखते हुए दिया। वैसे भी, जब वे उक्त दोनों रुक्न के बीच होते, तो बहुदेववादियों की नज़रों से ओझल हो जाते थे, जो मुसलमानों को तवाफ़ करते हुए देखने के लिए 'क़ुऐक़िआन' पहाड़ी पर चढ़ गए थे। जब बहुदेववादियों ने मुसलमानों को तेज़-तेज़ कदमों से तवाफ़ करते हुए देखा, तो उनके द्वेष की भावना और तेज़ हो गई। कहने लगेः यह लोग तो हिरण के बच्चों जैसे फुरतीले दिखाई पड़ते हैं! बाद में, इसे मक्का आने वालों के लिए तवाफ़ के समय, सुन्नत बना दिया गया। ताकि हम अपने गुज़रे हुए लोगों को याद रखें और विपरीत परिस्थितियों में उनके धैर्य तथा इस्लाम के लिए पेश की जाने वाली उनकी क़ुरबानियों और कारनामों को आदर्श मानते हुए उनके पद्चिह्नों पर चलें। अल्लाह हमें उनके अनुसरण तथा उनके पद्चिह्नों पर चलने की सामर्थ्य प्रदान करे। याद रहे कि दोनों रुक्नों के बीच तेज़ चलने के बजाय साधारण चाल चलने का आदेश मंसूख (निरस्त) हो चुका है। क्योंकि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) 'हज्जतुल वदा' के अवसर पर हजरे असवद से हजरे असवद तक तेज़-तेज़ कदमों से चले। इमाम मुस्लिम ने जाबिर और इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से रिवायत किया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हजरे असवद से हजरे असवद तक तीन चक्कर तेज़-तेज़ कदमों से चले और चार चक्करों में साधारण चाल चले।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में कदा की ओर से, बतहा की ऊँची घाटी से होते हुए दाखिल हुए और नीची घाटी से निकले

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما «أنَّ رسُول الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- دَخَل مكَّة مِن كَدَاٍء، مِن الثَنِيَّة العُليَا التِّي بالبَطحَاءِ، وخرج من الثَنِيَّة السُفلَى».
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) वर्णन करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में कदा की ओर से, बतहा की ऊँची घाटी से होते हुए दाखिल हुए और नीची घाटी से निकले।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब 'हज्जतुल वदा' के लिए निकले, तो चार ज़िल-हिज्जा की रात 'ज़ी तुवा' नामी स्थान में गुज़ारी। अगली सुबह ऊँची घाटी से होते हुए मक्का में दाखिल हुए। क्योंकि आप मदीने से आए थे और आपके लिए इधर से प्रवेश करना अधिक आसान था। फिर जब हज के सारे कार्य पूरे कर चुके, तो मक्का के निचले भाग से मदीने की ओर निकले। यह वही रास्ता है, जो 'जरवल' से होकर गुज़रता है। शायद रास्ता बदलने के पीछे यह उद्देश्य रहा हो कि अधिक से अधिक स्थानों में इबादत के अवसर प्राप्त हों। ऐसा आपने 'अरफ़ा' जाते-आते समय भी किया था। ईदगाह जाते-आते समय भी आप रास्ता बदल लिया करते थे और नफ़ल नमाज़ के लिए भी फ़र्ज़ नमाज़ के स्थान से हटकर खड़े होते थे। ताकि धरती उस दिन उन के अमल की गवाही दे, जिस दिन वह अपने सीने में दफ़न सारी बातें सामने रख देगी। और ऐसा भी हो सकता है कि आपने आने-जाने के लिए वही रास्ते चुने हों, जो यात्रा के लिए उचित थे। बाकी, अल्लाह अधिक जानता है।

हवाला

صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى 1426هـ، 2005م. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، دار الميمان، الطبعة: الأولى 1426هـ، 2005م. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم- لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ، 1988م.

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मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।

عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ: أَنَّهُ جَاءَ إِلَى الحَجَرِ الأَسْوَدِ فَقَبَّلَهُ، فَقَالَ: إِنِّي أَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ، لاَ تَضُرُّ وَلاَ تَنْفَعُ، وَلَوْلاَ أَنِّي رَأَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَبِّلُكَ مَا قَبَّلْتُكَ.
उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- से वर्णित है कि वह हजर-ए-असवद के पास आए, उसे चूमा और फ़रमाया : मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अमीरुल मोमिनीन उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अनहु काबा के एक किनारे में लगे, हजर-ए-असवद के पास आए, उसे चूमा और फिर कहा : मैं भली-भाँति जानता हूँ कि तुम एक पत्थर हो, न तो हानि पहुँचा सकते हो और न ही लाभ, यदि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को तुम्हें चूमते हुए न देखा होता, तो मैं तुम्हें न चूमता।

फ़ायदे
  1. तवाफ़ के समय अगर आसानी से संभव हो, तो हजर-ए-असवद के सामने पहुँचने पर उसे चूमना शरीयत सम्मत है।
  2. हजर-ए-असवद को चूमने का उद्देश्य अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण है।
  3. नववी कहते हैं : इस हदीस का अर्थ यह है कि हजर-ए-असवद के अंदर किसी का भला या बुरा करने की शक्ति नहीं है। अन्य सृष्टियों की तरह, जिनमें लाभ या हानि पहुँचाने की शक्ति नहीं होती, यह भी एक सृष्टि है। उमर रज़ियल्लाहु अनहु ने हज के दौरान यह बात इसलिए कही, ताकि विभिन्न क्षेत्रों और शहरों से आए हुए लोग इसे सुनें और अपने मन-मस्तिष्क में बसा लें।
  4. सारी इबादतें 'तौकीफ़िया' हैं (अर्थात ये अल्लाह के आदेशों पर रुकी हुई हैं); केवल वही इबादत शरीयत सम्मत मानी जाएगी, जिसकी अनुमति अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दी हो।
  5. जब कोई इबादत साबित हो, तो उसपर अमल किया जाएगा, यद्यपि उसकी हिकमत मालूम न भी हो। क्योंकि आदेश का पालन तथा अनुसरण करना भी अपेक्षित हिकमतों में से एक है।
  6. इबादत के तौर पर पत्थरों आदि, जिनको चूमना शरीयत से साबित न हो, को चूमना मना है।
हवाला

صحيح البخاري (2/ 149) (1597). صحيح مسلم (2/ 925) (1270). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص394). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (3/ 527).

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नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हज्जतुल वदा के अवसर पर ऊँट पर सवार होकर तवाफ़ किया। आप मुड़े हुए किनारे वाली छड़ी से हजरे असवद को छू रहे थे।

عن عبد الله بن عباس رضي الله عنهما قال: «طَافَ النبيُّ -صلَّى الله عليه وسلَّم- فِي حَجَّةِ الوَدَاعِ على بَعِير، يَستَلِم الرُّكنَ بِمِحجَن».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से रिवायत है, कहते हैंः नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हज्जतुल वदा के अवसर पर ऊँट पर सवार होकर तवाफ़ किया। आप मुड़े हुए किनारे वाली छड़ी से हजरे असवद को छू रहे थे।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हज्जतुल वदा के अवसर पर काबा का तवाफ़ किया। लोगों की बड़ी भीड़ थी। कुछ लोग आपको तवाफ़ करते हुए देखना चाहते थे और कुछ लोग आपको एक नज़र देखने के लिए बेताब थे। इस तरह हर तरफ़ लोग ही लोग थे। ऐसे में आप अपनी उम्मत पर कृपा करते हुए और उनके बीच समानता का ध्यान रखते हुए ऊँट पर सवार होकर तवाफ़ करने लगे; ताकि सब लोग बराबर रूप से आप को देख सकें। आपके साथ एक छड़ी भी थी, जिसका एक सिरा मुड़ा हुआ था। आप उसीसे रुक्न को छू लेते और छड़ी को बोसा देते। जैसा कि इसी हदीस की मुस्लिम की रिवायत में है।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى 1426هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم- لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.

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मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को, काबा के दो यमनी रुक्नों के अतिरिक्त किसी और भाग को छूते हुए नहीं देखा।

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما قال: «لَمْ أَرَ النبِيَّ -صلَّى الله عليه وسلَّم يَستَلمُ- منَ البيتِ إِلا الرُّكنَينِ اليَمَانِيَينِ».
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से वर्णित है, कहते हैंः मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को, काबा के दो यमनी रुक्नों के अतिरिक्त किसी और भाग को छूते नहीं देखा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) काबा के चारों रुक्नों में से केवल हजरे असवद वाले रुक्न और यमनी रुक्न को छूते थे। चारों रुक्नों में पूरबी रुक्न की दो विशेषताएँ (फ़ज़ीलतें) हैंः 1. वह इबराहीम (अलैहिस्सलाम) की रखी हुई नींव पर क़ायम है। 2. उसमें हजरे असवद लगा हुआ है। जबकि यमनी रुक्न की एक ही विशेषता है। वह इबराहीम (अलैहिस्सलाम) की रखी हुई नींव पर क़ायम है। लेकिन शामी और इराक़ी रुक्न को इस तरह की कोई विशेषता प्राप्त नहीं है। क्योंकि उनकी बुनियाद इबराहीम (अलैहिस्सलाम) की रखी हुई नींव पर नहीं है। यही कारण है कि हजरे असवद को छूना और बोसा देना और यमनी रुक्न को बोसा देना तो नहीं, लेकिन छूना शरई काम है। लेकिन शेष दो रुक्नों को छूना और बोसा देना शरई काम नहीं है। यहाँ यह ध्यान में रहे कि शरीयत की बुनियाद अनुसरण पर है। यहाँ अपनी ओर से कोई नई चीज़ रिवाज देने की अनुमति नहीं है। वैसे अल्लाह के हर शरई निर्णय में बहुत-सी हिकमतें छिपी हुई हैं।

हवाला

صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى 1426هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، دار الميمان، الطبعة: الأولى 1426هـ، 2005م. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم- لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ.

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16 में से 8
16 हदीसें
  1. मुझे हज्जतुल वदा के अवसर पर अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हज कराया गया, जबकि उस समय मेरी आयु सात साल थी।
  2. अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक ऊँट पर बैठकर हज किया, जिसमें आपके खाने के सामान तथा अन्य वस्तुएँ रखी थीं।
  3. उकाज़, मजिन्ना और ज़ुल-मजाज़ जाहिलियत काल के बाज़ार थे। पर सहाबा ने हज के दिनों में व्यापार करने को पाप समझा, तो यह आयत उतरीः "ليس عليكم جناح أن تبتغوا فضلاً من ربكم" (अर्थातः तुमपर इसमें कोई गुनाह नहीं है कि अपने पालनहार की अनुकंपा तलाश करो।)
  4. जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके सहाबा मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार ने दुर्बल बना दिया है! यह सुनकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने सहाबियों को आदेश दिया कि शुरू के तीन चक्करों में दुलकी चाल से चलें, किंतु काबा के यमनी रुक्न और हजर-ए- असवद वाले रुक्न के बीच साधारण चाल से चलें
  5. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में कदा की ओर से, बतहा की ऊँची घाटी से होते हुए दाखिल हुए और नीची घाटी से निकले
  6. मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।
  7. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हज्जतुल वदा के अवसर पर ऊँट पर सवार होकर तवाफ़ किया। आप मुड़े हुए किनारे वाली छड़ी से हजरे असवद को छू रहे थे।
  8. मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को, काबा के दो यमनी रुक्नों के अतिरिक्त किसी और भाग को छूते हुए नहीं देखा।
  9. ऐ लोगो, शांति बनाए रखो, क्योंकि नेकी तेज़ चलने ही से नहीं मिलती।
  10. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (मदीने से) अल-शजरा के रास्ते से निकलते और अल-मुअर्रस के रास्ते से अंदर आते। और जब मक्का में प्रवेश करते, तो ऊँची घाटी से प्रवेश करते और निचली घाटी से निकलते।
  11. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मिना आए, तो जमरा पहुँचकर कंकड़ी मारी, फिर मिना में अपने ठहरने के स्थान पर आए और क़ुरबानी की तथा सर के बाल मूँड़ने वाले से कहाः "सर के बाल मूँड़ दो।" साथ ही आपने पहले सर के दाएँ भाग की ओर इशारा किया और फिर बाएँ भाग की ओर इशारा किया। फिर मुँड़े हुए बाल लोगों को देने लगे।
  12. 'तमत्तो' (अर्थात हज के अवसर पर उमरा करके एहराम खोल देने और नए सिरे से एहराम बाँधकर हज करने) की आयत उतरी और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें उसपर अमल करने का आदेश भी दिया। बाद में कोई ऐसी आयत नहीं उतरी, जो इस आयत के आदेश को निरस्त करती हो तथा रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने जीवन काल में कभी इससे मना नहीं किया।
  13. मैंने अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से 'हज्जे तमत्तो' के बारे में पूछा, तो उन्होंने मुझे उसका आदेश दिया। फिर मैंने उनसे क़ुरबानी के बारे में पूछा, तो बतायाः उसमें ऊँट, गाय, बकरी या जानवर का एक हिस्सा ज़बह करना है। वह कहते हैंः लेकिन ऐसा लगा कि कुछ लोग उसे नापसंद कर रहे हैं।
  14. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एहराम की अवस्था में कैसे अपना सिर धोते थे?
  15. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके सहाबा चार ज़िल-हिज्जा की सुब्ह को मक्का पहुँचे तो आपने उन्हें आदेश दिया कि हज के एहराम को उमरा का एहराम बना लें (और उमरा के बाद हलाल हो जाएँ)। ऐसे में उन्होंने पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! हमारे लिए कौन-कौन सी वस्तुएँ हलाल होंगी? तो आपने उत्तर दियाः तमाम वस्तुएँ हलाल हैं।
  16. पाँच प्रकार के जीव-जन्तु हानिकारक हैं, उन्हें हरम के अंदर भी मारा जाएगा, कौआ, चील, बिच्छू, चूहा और काटने वाला कुत्ता।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com