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तशरीह के साथ हदीसें

Rulings of the Prophet's Mosque

1 हदीसें

मेरी इस मस्जिद में पढ़ी गई एक नमाज़ मस्जिद-ए-हराम को छोड़ अन्य मस्जिदों में पढ़ी गई एक हज़ार नमाज़ों से बेहतर है।

عَنْ ‌أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ: أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «صَلَاةٌ فِي مَسْجِدِي هَذَا خَيْرٌ مِنْ أَلْفِ صَلَاةٍ فِيمَا سِوَاهُ إِلَّا الْمَسْجِدَ الْحَرَامَ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मेरी इस मस्जिद में पढ़ी गई एक नमाज़ मस्जिद-ए-हराम को छोड़ अन्य मस्जिदों में पढ़ी गई एक हज़ार नमाज़ों से बेहतर है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मस्जिद-ए-नबवी में नमाज़ पढ़ने की फ़ज़ीलत बयान की है। आपने बताया कि आपकी मस्जिद में पढ़ी गई एक नमाज़ मस्जिद-ए-हराम को छोड़ दूसरी मस्जिदों में पढ़ी गई एक हज़ार नमाज़ से बेहतर है। अलबत्ता, मस्जिद-ए-हराम में नमाज़ पढ़ने की फ़ज़ीलत इससे भी ज़्यादा है।

फ़ायदे
  1. मस्जिद-ए-हराम तथा मस्जिद-ए-नबवी में पढ़ी गई नमाज़ का सवाब अन्य मस्जिदों में पढ़ी गई नमाज़ से ज़्यादा है।
  2. मस्जिद-ए-हराम में पढ़ी गई एक नमाज़ अन्य मस्जिदों में पढ़ी गई एक लाख नमाज़ों से बेहतर है।
हवाला

صحيح البخاري (2/ 60) (1190)، صحيح مسلم (2/ 1012) (1394)، فتح الباري (3/67)، البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (24/ 684).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com