सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

हज के स्तंभ

1 हदीसें

यह बाँझ हो तथा इसका गला दुखे, क्या इसने क़ुरबानी के दिन तवाफ़ कर लिया है?" कहा गया कि हाँ! तो फ़रमायाः "फिर चलो चलें।"

عن عائشة رضي الله عنها قالت: «حَجَجْنَا مع النبي صلى الله عليه وسلم فَأَفَضْنَا يوم النَّحْرِ، فحاضت صَفِيَّةُ، فأراد النبي صلى الله عليه وسلم منها ما يريد الرجل من أهله، فقلت: يا رسول الله، إنها حائض، قال: أَحَابِسَتُنَا هي؟ قالوا: يا رسول الله، إنها قد أفاضت يوم النَّحْرِ، قال: اخْرُجُوا». وفي لفظ: قال النبي صلى الله عليه وسلم : «عَقْرَى، حَلْقَى، أطافت يوم النَّحْرِ؟ قيل: نعم، قال: فَانْفِرِي».
आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि हमने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ हज किया। चुनांचे हमने क़ुरबानी के दिन ही तवाफ़-ए-इफ़ाज़ा कर लिया। इसी बीच सफ़ीया (रज़ियल्लाहु अंहा) को माहवारी आ गई। फिर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनसे वह करना चाहा, जो आदमी अपनी पत्नी से करता है, तो मैंने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल, वह माहवारी में है। यह सुन आपने फ़रमायाः "क्या यह हमें रोक लेगी?" लोगों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, उन्होंने क़ुरबानी के दिन तवफ़-ए-इफ़ाज़ा कर लिया था। तो फरमायाः "फिर अब निकल पड़ो।" तथा एक रिवायत में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "यह बाँझ हो तथा इसका गला दुखे, क्या इसने क़ुरबानी के दिन तवाफ़ कर लिया है?" कहा गया कि हाँ! तो फ़रमायाः "फिर चलो चलें।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- कहती हैं कि सहाबा -रज़ियल्लाहु अनहुम- ने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हज्जतुल वदा के अवसर पर हज किया। जब वे हज के काम कर चुके, तो तवाफ़-ए-इफ़ाज़ा कर लिया। लोगों के साथ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नी सफ़िय्या -रज़ियल्लाहु अनहा- भी थीं। जब रवानगी की रात आई, तो सफ़िय्या -रज़ियल्लाहु अनहा- को माहवारी आ गई। इसी बीच अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उनके पास वह करने के लिए आए, जो आदमी अपनी पत्नी के साथ करता है, तो आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- ने बताया कि उनको माहवारी आ गई है। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने समझा कि उनको माहवारी पहले ही आ गई थी और वह तवाफ़-ए-इफ़ाज़ा नहीं कर सकी है। फिर, चूँकि तवाफ़-ए-इफ़ाज़ा हज का एक रुक्न है और उसके बिना हज पूरा नहीं हो सकता। अतः, उनके पवित्र होने तथा तवाफ़ करने से पहले लोग मक्का से निकल नहीं पाएँगे, इसलिए आपने वह प्रसिद्ध वाक्य कह दिया, जो ज़बान पर आ जाता है और उसके असली मायने मुराद नहीं होते। यानी यह कि वह बाँझ हो तथा उसका गला दुखे। फिर आगे फ़रमाया कि क्या वह माहवारी से पवित्र होने और तवाफ़ करने तक हमें रोक लेगी? लेकिन जब लोगों ने बताया कि वह माहवारी आरंभ होने से पहले ही तवाफ़-ए-इफ़ाज़ा कर चुकी हैं तो फ़रमाया : तब तो वह चल दे। क्योंकि अब उनका केवल तवाफ़-ए-वदा बाक़ी है, जिसे छोड़ने का उनके पास उचित कारण है।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى 1426هـ، 2005م. الإفهام في شرح عمدة الأحكام لابن باز، تحقيق: سعيد القحطاني، مؤسسة عبد العزيز بن باز الخيرية، الرياض، الطبعة: الأولى 1435هـ. خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، فيصل بن عبد العزيز المبارك، الطبعة: الثانية 1412هـ، 1992م. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار المنهاج، القاهرة، الطبعة: الأولى 1427هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com