जो रोज़ा रख कर भूल कर खा ले अथवा पी ले, वह अपना रोज़ा पूरा करे, क्योंकि उसे अल्लाह ने खिलाया एवं पिलाया है।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जिसने फ़र्ज़ या नफ़ल रोज़ा की हालत में भूलकर कुछ खा या पी लिया, वह अपना रोज़ा पूरा करे। उसे न तोड़। क्योंकि उसने जान-बूझकर खाया या पिया नहीं है। बल्कि ख़ुद अल्लाह ने उसे खिलाया और पिलाया है।
- जिसने भूलकर कुछ खा-पी लिया, उसका रोज़ा सही हो जाएगा।
- भूलकर खा-पी लेने पर कोई गुनाह नहीं है, क्योंकि इसमें इन्सान का अपना इरादा शामिल नहीं है।
- अल्लाह का अपने बन्दों पर अनुग्रह और कृपा, अल्लाह द्वारा उन्हें प्रदान की गई सुविधा, तथा उन्हें कठिनाई और परेशानी से बचाने के उपाय।
- रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों के कारण किसी भी रोज़ेदार का रोज़ा उसी समय टूटेगा, जब उसके अंदर तीन शर्तें पाई जाएँ : 1. उसने रोज़ा तोड़ने वाला काम ज्ञान रखते हुए किया हो, अगर ज्ञान न हो, तो रोज़ा नहीं टूटेगा। 2- याद रहते हुए किया हो, अगर भूलकर किया हो, तो रोज़ा सही हो जाएगा और क़ज़ा करनी नहीं होगी। 3- रोज़ा तोड़ने वाला काम अपनी मर्ज़ी से किया हो, उसपर कोई ज़बरदस्ती न हुई हो।
صحيح البخاري (3/ 31) (1933). صحيح مسلم (2/ 809) (1155). تيسير العلام، لعبد الله البسام (ص319). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (3/ 422). خلاصة الكلام على عمدة الأحكام، لفيصل آل مبارك (ص148).