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तशरीह के साथ हदीसें

सुफ़्फ़ा वालों तथा आम सहाबा की दुनिया से निस्पृहता

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: لَقَد رَأَيت سبعين من أهل الصُّفَّةِ، مَا مِنهُم رَجُل عَلَيه رِدَاء، إِمَّا إِزَار، وإِمَّا كِسَاء، قد رَبَطوا في أعناقِهم، فمنها ما يبلغُ نصف الساقين، ومنها ما يبلغ الكعبين، فَيَجْمَعُهُ بيده كَرَاهِيَةَ أن تُرى عورَتُه.
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः मैंने सत्तर सुफ़्फ़ा वालों को देखा। उनमें से किसी के पास चोगा नहीं होता था। या तो लुंगी होती थी या फिर चादर, जिसे वे अपने गले से बाँध लेते थे, जो कभी आधी पिंडलियों तक पहुँचती थी, तो कभी टखनों तक। उसे वे अपने हाथों से पकड़े रहते थे, ताकि उनके गुप्तांग खुलने न पाएँ।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

1-فتح الباري (277/11). 2-كنوز رياض الصالحين (273/7). 3-شرح رياض الصالحين لابن عثيمين (267/3).

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फ़ज़ीलतें तथा आदाब

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com