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तशरीह के साथ हदीसें

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ज़ुहर से पहले की चार रकातें और फ़ज्र से पहले की दो रकातें नहीं छोड़ते थे।

عن عائشةَ أُمِّ المُؤْمِنينَ رضي الله عنها: أن النبي صلى الله عليه وسلم كان لا يَدع أربعا قَبل الظهر وركعتين قبل الغَدَاة.
मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ज़ुहर से पहले की चार रकातें और फ़ज्र से पहले की दो रकातें नहीं छोड़ते थे।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

आइशा रज़ियल्लाहु अनहा बताती हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- निम्नलिखित दो नफ़ल नमाज़ों को पाबंदी से अपने घर में पढ़ते थे और इन्हें छोड़ते नहीं थे : ज़ुहर से पहले दो सलाम से चार रकात और फ़ज्र की नमाज़ से पहले दो रकात।

फ़ायदे
  1. ज़ुहर की नमाज़ से पहले चार रकात और फ़ज्र की नमाज़ से पहले दो रकात नमाज़ पाबंदी से पढ़ना मुसतहब है।
  2. सबसे उत्तम यह है कि रवातिब (मुअक्कद सुन्नतों) को घर में पढ़ा जाए। यही कारण है कि आइशा रज़ियल्लाहु अनहा ने उनके बारे में यह सूचना दी है।
हवाला

صحيح البخاري (2/ 59) (1182). توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، لعبد الله البسام (2/ 379).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
फ़र्ज़ नमाजों से पहले तथा बाद में पढ़ी जाने वाली सुन्नतें

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com