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तशरीह के साथ हदीसें

नफ़ल नमाज़ की फ़ज़ीलत

2 हदीसें

नबी (सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम) किसी नफ़ल नमाज़ की उतनी पाबंदी नहीं करते थे, जितनी फ़ज्र की दो रकातों की करते थे।

عن عائشةَ أمِّ المؤْمنِين رضي الله عنها قالت: لَمْ يَكُنِ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى شَيْءٍ مِنَ النَّوَافِلِ أَشَدَّ مِنْهُ تَعَاهُدًا عَلَى رَكْعَتَيِ الفَجْرِ.
आइशा बिंत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि नबी (सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम) किसी नफ़ल नमाज़ की उतनी पाबंदी नहीं करते थे, जितनी फ़ज्र की दो रकातों की करते थे। तथा एक रिवायत में हैः "फ़ज्र की दो रकात सुन्नतें दुनिया और उसकी तमाम चीज़ों से उत्तम हैं।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस़ में फ़ज्र की दो रकअत सुन्नत का महत्व और उसकी ताकीद का उल्लेख है। आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) वर्ण करती हैं कि नबी (सल्लाल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इन दो रकअतों को अपने कार्य द्वारा महत्व देते हुए इन्हें पाबंदी से पढ़ा है तथा अपने मुँह से इनके महत्व का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह दुनिया तथा उसकी तमाम वस्तुओं से बेहतर हैं।

हवाला

صحيح البخاري (2/ 57) (1169). صحيح مسلم (1/ 501) (724). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص113). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 144).

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अल्लाह उस आदमी पर रहम करे, जिसने अस्र से पहले चार रकात पढ़ी।

عن عبدالله بن عمر رضي الله عنهما قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «رحم الله امرأ صلى قبل العصر أربعًا».
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "अल्लाह उस आदमी पर रहम करे, जिसने अस्र से पहले चार रकात पढ़ी।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
तशरीह

यह हदीस अस्र से पहले चार रकात नफ़ल पढ़ने की फ़ज़ीलत बयान करती है। फ़ज़ीलत यह है कि आपने उसके लिए रहमत की दुआ की है।

हवाला

سنن أبي داود، سليمان بن الأشعث أبوداود، دار الفكر، تحقيق : محمد محيي الدين عبد الحميد. مسند الإمام أحمد بن حنبل، أحمد بن حنبل أبو عبدالله الشيباني، تحقيق: شعيب الأرنؤوط و عادل مرشد، وآخرون، تحت إشراف: عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى1421هـ، 2001م. سنن الترمذي، محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق: أحمد محمد شاكر وآخرين، دار إحياء التراث العربي، بيروت. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، اعتنى بإخراجه عبدالسلام بن عبد الله السليمان، الرسالة، بيروت، الطبعة: الأولى 1427هـ، 2006م. توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة 1423هـ، 2003م. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، عبد الله صالح الفوزان، دار ابن الجوزي، الطبعة: الأولى 1428هـ، 1432هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com