अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जिसने फ़ज्र की नमाज़ पढ़ ली, वह अल्लाह के संरक्षण में होता है। अल्लाह उसकी रक्षा तथा मदद करता है। फिर आपने इस संरक्षण को भंग करने से सावधान कर दिया। इस संरक्षण को भंग करने का एक रूप फ़ज्र की नमाज़ छोड़ देना है और दूसरा रूप फ़ज्र की नमाज़ पढ़ने वाले के साथ छेड़-छाड़ तथा उसपर अत्याचार करना है। जिसने ऐसा किया, उसने इस संरक्षण को भंग कर दिया और इस चेतावनी का हक़दार बन गया कि अल्लाह उसे अपने हक़ में कोताही करने की वजह से तलब करेगा। ज़ाहिर-सी बात है कि जिसे अल्लाह तलब करेगा, उसे पा ही लेगा। फिर उसे चेहरे के बल जहन्नम में डाल देगा।
- फ़ज्र की नमाज़ का महत्व तथा फ़ज़ीलत।
- फ़ज्र की नमाज़ पढ़ने वाले के साथ छेड़-छाड़ करने पर कठोर चेतावनी।
- अल्लाह ऐसे लोगों से प्रतिशोध लेता है, जो उसके नेक बंदों के साथ छेड़-छाड़ करते हैं।
صحيح مسلم (1/ 454) (657). المعجم الأوسط (4/ 5) (3464). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين (1/ 249). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (2/ 561). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 323).