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तशरीह के साथ हदीसें

ग़ुस्ल अनिवार्य करने वाली चीज़ें

3 हदीसें

जब पुरुष, स्त्री की चार शाखाओं के बीच बैठ जाए और उसको भैंचे तो स्नान आवश्यक हो जाता है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: ((إِذَا جَلَسَ بين شُعَبِهَا الأَربع، ثم جَهَدَهَا، فَقَد وَجَبَ الغُسْلُ)) . وفي لفظ ((وإن لم يُنْزِل)).
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जब पुरुष, स्त्री की चार शाखाओं के बीच बैठ जाए और उसको भैंचे तो स्नान आवश्यक हो जाता है। एक रिवायत में हैः " वीर्य का स्खलन न हुआ हो, तब भी।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जब पति पत्नी के दोनों हाथों तथा दोनों पैरों के बीच बैठ जाए और अपना जननेंद्रिय पत्नी की योनि में दाख़िल कर दे, तो दोनों पर जनाब का स्नान अनिवार्य हो जाता है; चाहे वीर्य का पतन हुआ हो या न हुआ हो। क्योंकि दाखिल करने मात्र ही स्नान अनिवार्य हो जाता है।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

ऐ अल्लाह के रसूल! आपका उस व्यक्ति के बारे में क्या ख़्याल है, जिसे उसकी पत्नी से जल्दी हटा दिया जाए और उसका वीर्य न निकला हो, उसे क्या करना है? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: स्नान तो केवल वीर्य निकलने से करना होता है

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه قال: خَرَجْتُ مع رسول الله صلى الله عليه وسلم يوم الاثنين إلى قباء إِذَا كُنَّا فِي بَنِي سَالِمٍ وقف رسول الله صلى الله عليه وسلم على باب عِتْبَانَ فَصَرَخَ بِهِ، فَخَرَجَ يَجُرُّ إزاره، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «أَعْجَلْنَا الرَّجُلَ» فقال عتبان: يا رسول الله، أَرَأَيْتَ الرَّجُلَ يُعْجَلُ عن امرأته ولم يُمْنِ، ماذا عليه؟ قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إِنَّمَا المَاءُ مِنَ الماءِ».
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ सोमवार के दिन क़ुबा की ओर निकला। जब हम बनी सालिम क़बीले तक पहुँचे, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) इतबान (रज़ियल्लाहु अनहु) के द्वार पर रुक गए और उन्हें आवाज़ दी। वह तहबंद खींचते हुए निकले, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: हमने इस व्यक्ति को जल्दी में डाल दिया है। इतबान ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! आपका उस व्यक्ति के बारे में क्या ख़्याल है, जिसे उसकी पत्नी से जल्दी हटा दिया जाए और उसका वीर्य न निकला हो, उसे क्या करना है? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: स्नान तो केवल वीर्य निकलने से ही करना होता है।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، الطبعة الخامِسَة، 1423هـ، 2003 م. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، عبد الله صالح الفوزان، دار ابن الجوزي، الطبعة: الأولى 1428هـ، 1432هـ. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، اعتنى بإخراجه عبدالسلام بن عبد الله السليمان، الرسالة، بيروت، الطبعة: الأولى 1427هـ، 2006م.

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मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास इस्लाम ग्रहण करने के लिए आया, तो आपने मुझे पानी तथा बेर के पत्तों से नहाने का आदेश दिया।

عن قيس بن عاصم رضي الله عنه قال: أتيتُ النبيَّ صلى الله عليه وسلم أُريدُ الإسلامَ، فأَمَرَني أن أغتَسِلَ بماءٍ وسِدرٍ.
क़ैस बिन आसिम रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास इस्लाम ग्रहण करने के लिए आया, तो आपने मुझे पानी तथा बेर के पत्तों से नहाने का आदेश दिया।
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

क़ैस बिन आसिम अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास इस्लाम ग्रहण करने के लिए आए, तो आपने उनको पानी तथा बेर के पत्तों से नहाने का आदेश दिया। बेर के पत्तों का इस्तेमाल करने का आदेश इसलिए दिया कि एक तो उनका प्रयोग साफ़-सफ़ाई के लिए किया जाता है और दूसरा उसमें अच्छा गंध भी होता है।

फ़ायदे
  1. ग़ैर-मुस्लिम के लिए इस्लाम में प्रवेश करते समय नहाने का शरीयत सम्मत होना।
  2. इस्लाम की फ़ज़ीलत तथा उसका आत्मा एवं शरीर दोनों पर ध्यान देना।
  3. पानी के साथ पाक चीज़ों के मिलने से पानी के पाक करने की शक्ति खत्म नहीं होती।
  4. आधुनिक स्वच्छता प्रदान करने वाली चीज़ों, जैसे साबुन आदि का प्रयोग बेरी के पत्तों के स्थान पर किया जा सकता है।
हवाला

سنن أبي داود (1/ 266) (355)، سنن الترمذي (1/ 595) (605)، سنن النسائي (1/ 109) (188)، معالم السنن (1/111)، ذخيرة العقبى (4/131)، شرح سنن أبي داود للعباد (54/ 10).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com