إرواء الغليل في تخريج أحاديث منار السبيل للألباني، إشراف: زهير الشاويش، ط2، المكتب الإسلامي - بيروت، 1405هـ. توضيح الأحكام للشيخ البسام، ط5، مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، 1423هـ. تسهيل الإلمام للشيخ صالح الفوزان، بعناية: عبدالسلام السليمان، ط1، 1427هـ. منحة العلَّام للشيخ عبد الله بن صالح الفوزان، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1427هـ. سنن أبي داود، تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، المكتبة العصرية، بيروت. فتاوى اللجنة الدائمة، المجموعة الأولى: اللجنة الدائمة للبحوث العلمية والإفتاء، جمع وترتيب: أحمد بن عبد الرزاق الدويش.
तशरीह के साथ हदीसें
(नमाज़) की क़जा नहीं करेगी। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बीवियाँ निफ़ास की दशा में चालीस रात तक बैठी रहतीं, लेकिन अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उन्हें निफ़ास के समय की छूटी हुई नमाज़ें पढ़ने का आदेश नहीं देते थे
عَنْ كَثِيرِ بن زِيَاد، قال: حدثتني الأزْدِيَّة يعني مُسَّةَ قالت: حَجَجْتُ فَدَخَلْتُ عَلَى أُمِّ سَلَمَةَ فَقُلْتُ: يَا أُمَّ المؤْمِنِين، إِنَّ سَمُرَةَ بن جندب يَأْمُرُ النِّسَاءَ يَقْضِينَ صَلَاةَ الْمَحِيضِ فَقَالَتْ: «لَا يَقْضِينَ كَانَتِ المَرْأَةُ من نِسَاءِ النبي صلى الله عليه وسلم تَقْعُدُ فِي النِّفَاسِ أَرْبَعِينَ لَيْلَةً لَا يَأْمُرُهَا النبي صلى الله عليه وسلم بِقَضَاءِ صَلَاةِ النِّفَاسِ»
وفي رواية: و«كنا نطلي على وُجُوهنا بِالوَرْسِ -تعني- من الكَلَف».
कसीर बिन ज़ियाद कहते हैं कि मुझे अज़्दिया अर्थात मुस्सा ने बताया कि मैंने तर्क किया और उम्मे सलमा (रज़ियल्लाहु अनहा) के पास गई और उनसे मैंने कहा: ऐ उम्मुल मोमिनीन! समुरा बिन जुनदुब महिलाओं को माहवारी ख़ून की दशा की नमाज़ की कज़ा का आदेश देते हैं, तो आपने कहा: (नमाज़ की) क़जा नहीं करेगी। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बीवियाँ निफ़ास की दशा में चालीस रात तक बैठी रहतीं, लेकिन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उन्हें निफ़ास के समय की छूटी हुई नमाज़ें पढ़ने का आदेश नहीं देते। एक रिवायत में है: हम अपने सरों को वर्स (एक पौधे का नाम) के लाल एवं काले रंग से रंग लेती थीं।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com