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तशरीह के साथ हदीसें

नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़्याल रखना।

عَنْ أَنَسٍ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: كَانَتْ عَامَّةُ وَصِيَّةِ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ حَضَرَهُ الْمَوْتُ: «الصَّلَاةَ وَمَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ، الصَّلَاةَ وَمَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ»، حَتَّى جَعَلَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُغَرْغِرُ بِهَا صَدْرُهُ، وَمَا يَكَادُ يُفِيضُ بِهَا لِسَانُهُ.
अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : जब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु का समय आ गया, तो आपने सबसे ज़्यादा जिस बात की वसीयत की, वह यह थी : "नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़्याल रखना। नमाज़ तथा अपने मातहत काम कर रहे लोगों का ख़्याल रखना।" अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- इन शब्दों को दोहराते रहे, यहाँ कि ये आपके गले में आकर फँसने लगे और ज़बान से सही तरीक़े से अदा न हो सके।
इसे नसई ने अल-कुबरा में तथा इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मौत से पहले तथा अपने जीवन की अंतिम घड़ियों में अपनी उम्मत को जिस बात की सबसे अधिक ताकीद की, वह यह थी : तुम नमाज़ अवश्य ही पाबंदी से अदा करना और उसकी उपेक्षा न करना और अपने मातहत दासों, दासियों के अधिकार तथा उनके साथ अच्छा व्यवहार करना। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इन शब्दों को लगातार दोहराते रहे, यहाँ तक कि आवाज़ गले में फँसने लगी और आपकी बात समझनी मुश्किल हो गई।

फ़ायदे
  1. नमाज़ का महत्व तथा दास-दासियों के अधिकारों की अहमियत। क्योंकि इन दोनों के बारे में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बिलकुल अंतिम समय में वसीयत की थी।
  2. नमाज़, बंदों पर अल्लाह के सबसे बड़े अधिकारों में से एक अधिकार है। जबकि सृष्टियों और विशेष रूप से कमज़ोर लोगों यानी अपने बाल बच्चों के अतिरिक्त अन्य मातहतों के अधिकारों को अदा करना सृष्टियों के सबसे बड़े अधिकारों में से एक अधिकार है।
हवाला

السنن الكبرى للنسائي (6/ 387) (7058). سنن ابن ماجه (4/ 6) (2697). مسند أحمد (19/ 209) (12169). النهاية في غريب الحديث والأثر (668).

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आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मृत्यु

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