अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मौत से पहले तथा अपने जीवन की अंतिम घड़ियों में अपनी उम्मत को जिस बात की सबसे अधिक ताकीद की, वह यह थी : तुम नमाज़ अवश्य ही पाबंदी से अदा करना और उसकी उपेक्षा न करना और अपने मातहत दासों, दासियों के अधिकार तथा उनके साथ अच्छा व्यवहार करना। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इन शब्दों को लगातार दोहराते रहे, यहाँ तक कि आवाज़ गले में फँसने लगी और आपकी बात समझनी मुश्किल हो गई।
- नमाज़ का महत्व तथा दास-दासियों के अधिकारों की अहमियत। क्योंकि इन दोनों के बारे में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बिलकुल अंतिम समय में वसीयत की थी।
- नमाज़, बंदों पर अल्लाह के सबसे बड़े अधिकारों में से एक अधिकार है। जबकि सृष्टियों और विशेष रूप से कमज़ोर लोगों यानी अपने बाल बच्चों के अतिरिक्त अन्य मातहतों के अधिकारों को अदा करना सृष्टियों के सबसे बड़े अधिकारों में से एक अधिकार है।
السنن الكبرى للنسائي (6/ 387) (7058). سنن ابن ماجه (4/ 6) (2697). مسند أحمد (19/ 209) (12169). النهاية في غريب الحديث والأثر (668).