صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. كشف المشكل من حديث الصحيحين، لجمال الدين أبي الفرج عبد الرحمن بن علي بن محمد الجوزي، المحقق: علي حسين البواب، الناشر: دار الوطن – الرياض. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان، الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002م. منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، لحمزة محمد قاسم، راجعه: الشيخ عبد القادر الأرناؤوط، عني بتصحيحه ونشره: بشير محمد عيون، الناشر: مكتبة دار البيان، دمشق - الجمهورية العربية السورية، مكتبة المؤيد، الطائف - المملكة العربية السعودية، عام النشر: 1410 هـ - 1990 م.
तशरीह के साथ हदीसें
किसी भी नबी को जब उठाया गया, तो उसे जन्नत में उसका ठिकाना दिखा दिया गया और फिर उसे अख़्तियार दिया गया (कि चाहे तो दुनिया में रहे या जन्नत में अपना स्थान ग्रहण कर ले)।" फिर जब आपकी मृत्यु का समय आया, तो आप बेहोश हो गए। उस समय आपका सर मेरी जाँघ पर था। होश आया, तो घर की छत की ओर नज़र उठाई और फ़रमायाः "ऐ अल्लाह, सबसे ऊँचा मित्र!"
عن عائشة قالت: كان النبي صلى الله عليه وسلم يقول وهو صحيح: «إنَّه لم يُقبض نبيٌّ حتى يرى مقعدَه من الجنة، ثم يُخَيَّر» فلمَّا نزل به، ورأسه على فخِذي غُشِي عليه، ثم أفاق فأشْخَصَ بصرَه إلى سقف البيت، ثم قال: «اللهمَّ الرَّفِيقَ الأعلى». فقلتُ: إذًا لا يختارنا، وعرفتُ أنَّه الحديثُ الذي كان يحدِّثنا وهو صحيح، قالت: فكانت آخر كلمة تكلَّم بها: «اللهمَّ الرَّفِيقَ الأعلى».
आइशा -रज़ियल्लाहु अंहा- का वर्णन है कि अल्लाह रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब स्वस्थ थे, तो कहा करते थेः "जब किसी नबी को उठाया गया, तो उसे जन्नत में उसका ठिकाना दिखा दिया गया और फिर उसे अख़्तियार दिया गया (कि चाहे तो दुनिया में रहे या जन्नत में अपना स्थान ग्रहण कर ले)।" फिर जब आपकी मृत्यु का समय आया, तो आप बेहोश हो गए। उस समय आपका सर मेरी जांघ पर था। होश आया, तो घर की छत की ओर नज़र उठाई और फ़रमायाः "ऐ अल्लाह, सबसे ऊँचा मित्र!" यह देख मैंने कहाः अब आप (आख़िरत को छोड़ कर) हमें नहीं चुनने वाले। उसी समय मुझे उस हदीस का ज्ञान हुआ जिसे आपने हम से बयान किया था जब वह स्वस्थ थे। वह कहती हैंः अंतिम शब्द जो आपकी ज़ुबान से निकले, यह थेः "ऐ अल्लाह, सबसे ऊँचा मित्र!"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com