عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ رَضيَ اللهُ عنهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِنَّ فِي الْجَنَّةِ شَجَرَةً يَسِيرُ الرَّاكِبُ الْجَوَادَ الْمُضَمَّرَ السَّرِيعَ مِائَةَ عَامٍ مَا يَقْطَعُهَا».
अबू सईद खुदरी -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से वर्णित है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “बेशक जन्नत में एक ऐसा पेड़ है कि एक तेज़ रफ़्तार घुड़सवार सौ साल तक चलता रहेगा, लेकिन उसे पार नहीं कर पाएगा।” इसे बुखारी तथा मुुस्लिम ने अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से भी रिवायत किया है कि अल्लाह के रसूल -सल्ललल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “सवार उसकी छाया में सौ साल तक चलता रहेगा, परन्तु उसकी दूरी तय नहीं कर पाएगा।”
इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
صحيح البخاري (8/ 114) (6553). صحيح مسلم (4/ 2176) (2828). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 1289). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (3/ 345). تطريز رياض الصالحين، لفيصل مُبَارَك (ص1086).