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तशरीह के साथ हदीसें

क़ब्र की भयावहताएँ

3 हदीसें

इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।

عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما قَالَ: مَرَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقَبْرَيْنِ، فَقَالَ: «إِنَّهُمَا لَيُعَذَّبَانِ، وَمَا يُعَذَّبَانِ فِي كَبِيرٍ، أَمَّا أَحَدُهُمَا فَكَانَ لاَ يَسْتَتِرُ مِنَ البَوْلِ، وَأَمَّا الآخَرُ فَكَانَ يَمْشِي بِالنَّمِيمَةِ» ثُمَّ أَخَذَ جَرِيدَةً رَطْبَةً، فَشَقَّهَا نِصْفَيْنِ، فَغَرَزَ فِي كُلِّ قَبْرٍ وَاحِدَةً، قَالُوا: يَا رَسُولَ اللَّهِ، لِمَ فَعَلْتَ هَذَا؟ قَالَ: «لَعَلَّهُ يُخَفِّفُ عَنْهُمَا مَا لَمْ يَيْبَسَا».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया : "इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।" फिर आपने एक ताज़ा शाखा ली, उसे आधा-आधा फाड़ा और हर एक क़ब्र में एक-एक भाग को गाड़ दिया। सहाबा ने पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आपने ऐसा क्यों किया? तो आपने जवाब दिया : "शायद इन दोनों की यातना को उस समय तक के लिए हल्का कर दिया जाए, जब तक यह दोनों शाखाएँ सूख न जाएँ।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे और फ़रमाया : इन क़ब्रों में दफ़न दोनों लोग यातना झेल रहे हैं और ये यातना ऐसी चीज़ों के कारण झेल रहे हैं, जो तुम्हारी नज़र में बड़ी चीज़ें नहीं हैं। यह और बात है कि ये अल्लाह की नज़र में बड़ी चीज़ें हैं। इन दोनों में से एक व्यक्ति पेशाब-पाखाने के समय अपने शरीर तथा कपड़ों को पेशाब से बचाने पर ध्यान नहीं देता था। जबकि दूसरा व्यक्ति लोगों के बीच लगाई-बुझाई करता फिरता था। वह एक व्यक्ति की बात दूसरे व्यक्ति को नुक़सान पहुँचाने एवं मतभेद पैदा करने के उद्देश्य से पहुँचाया करता था।

फ़ायदे
  1. लगाई-बुझाई करना और पेशाब से बचने पर ध्यान न देना कबीरा गुनाह और क़ब्र की यातना का सबब है।
  2. अल्लाह ने अपने नबी के सामने कुछ ग़ैब की चीज़ें, जैसे क़ब्र की यातना, खोल दीं, ताकि यह आपके नबी होने की एक निशानी बन सके।
  3. एक शाख लेने और उसे फाड़कर क़ब्र पर रखने का यह अमल अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ खास है। क्योंकि अल्लाह ने आपको उन दोनों क़ब्रों में दफ़न लोगों का हाल बता दिया था। इस मसले में आपपर किसी को क़यास इसलिए नहीं किया जा सकता कि कोई क़ब्र में दफ़न लोगों का हाल जान नहीं सकता।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 53) (218). صحيح مسلم (1/ 240) (292). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص43). خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، لفيصل آل مبارك (ص22). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 29).

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क़ब्र आख़िरत का पहला पड़ाव है। यदि बंदा यहाँ बच गया, तो बाद के पड़ाव इससे आसान हैं। और अगर यहाँ न बच सका, तो बाद के पड़ाव इससे कठिन हैं।

عَن هَانِئ مَوْلَى عُثْمَانَ رَضيَ اللهُ عنهُ قَالَ: كَانَ عُثْمَانُ إِذَا وَقَفَ عَلَى قَبْرٍ بَكَى حَتَّى يَبُلَّ لِحْيَتَهُ، فَقِيلَ لَهُ: تُذْكَرُ الْجَنَّةُ وَالنَّارُ فَلَا تَبْكِي، وَتَبْكِي مِنْ هَذَا؟ فَقَالَ: إِنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ: «إِنَّ الْقَبْرَ أَوَّلُ مَنْزِلٍ مِنْ مَنَازِلِ الْآخِرَةِ، فَإِنْ نَجَا مِنْهُ فَمَا بَعْدَهُ أَيْسَرُ مِنْهُ، وَإِنْ لَمْ يَنْجُ مِنْهُ فَمَا بَعْدَهُ أَشَدُّ مِنْهُ».
उसमान के आज़ाद किए हुए ग़ुलाम हानी कहते हैंः उसमान -रज़ियल्लाहु अन्हु- जब किसी क़ब्र के पास ख़ड़े होते, तो इतना रोते कि उनकी दाढ़ी भीग जाती। उनसे कहा गया कि आप जन्नत और जहन्नम का ज़िक्र करते हैं, तो नहीं रोते, लेकिन इससे रोते हैं? तो फ़रमायाः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया हैः "क़ब्र आख़िरत का पहला पड़ाव है। यदि बंदा यहाँ बच गया, तो बाद के पड़ाव इससे आसान हैं। और अगर यहाँ न बच सका, तो बाद के पड़ाव इससे कठिन हैं।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
हवाला

سنن الترمذي (4/ 142) (2308). سنن ابن ماجه (5/ 333) (4267). مشكاة المصابيح، للتبريزي (1/ 48). تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي، المباركفوري (6/ 490). مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي القاري (1/ 215).

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बरा बिन आज़िब -रज़ियल्लाहु अन्हु- की हदीस के आलोक में क़ब्र की नेमतों और यातनओं का वर्णन

عن البراء بن عازب رضي الله عنه ، قال: خرجنا مع رسول الله صلى الله عليه وسلم في جنازة رجل من الأنصار، فانتهينا إلى القبر ولمَّا يُلْحَد، فجلس رسول الله صلى الله عليه وسلم وجلسنا حوله كأنما على رءوسنا الطير، وفي يده عود يَنكتُ به في الأرض، فرفع رأسه، فقال: «استعيذوا بالله من عذاب القبر» مرتين، أو ثلاثا، زاد في رواية: "وإنه ليسمع خَفْقَ نعالهم إذا وَلَّوا مُدْبِرين حين يقال له: يا هذا، من ربك؟ وما دينك؟ ومن نبيك؟" قال هناد: قال: "ويأتيه ملكان فيُجلِسانه فيقولان له: من ربك؟ فيقول: ربي الله، فيقولان له: ما دينك؟ فيقول: ديني الإسلام، فيقولان له: ما هذا الرجل الذي بُعث فيكم؟" قال: "فيقول: هو رسول الله صلى الله عليه وسلم ، فيقولان: وما يُدريك؟ فيقول: قرأتُ كتاب الله فآمنت به وصدقت، «زاد في حديث جرير» فذلك قول الله عز وجل {يُثَبِّتُ اللهُ الذين آمنوا} [إبراهيم: 27]" الآية -ثم اتفقا- قال: "فينادي مُناد من السماء: أن قد صدق عبدي، فأفرشوه من الجنة، وافتحوا له بابا إلى الجنة، وألبسوه من الجنة" قال: «فيأتيه من رَوْحها وطِيبها» قال: «ويُفتَح له فيها مدَّ بصره» قال: «وإن الكافر» فذكر موته قال: "وتُعاد روحه في جسده، ويأتيه ملكان فيُجلسانه فيقولان: له من ربُّك؟ فيقول: هَاهْ هَاهْ هَاهْ، لا أدري، فيقولان له: ما دينك؟ فيقول: هَاهْ هَاهْ، لا أدري، فيقولان: ما هذا الرجل الذي بُعث فيكم؟ فيقول: هَاهْ هَاهْ، لا أدري، فينادي مناد من السماء: أن كذب، فأفرشوه من النار، وألبسوه من النار، وافتحوا له بابا إلى النار" قال: «فيأتيه من حَرِّها وسَمُومها» قال: «ويُضيَّق عليه قبره حتى تختلف فيه أضلاعه» زاد في حديث جرير قال: «ثم يُقَيَّض له أعمى أَبْكَم معه مِرْزَبّة من حديد، لو ضُرب بها جبل لصار ترابا» قال: «فيضربه بها ضربة يسمعها ما بين المشرق والمغرب إلا الثَّقَلين، فيصير ترابا» قال: «ثم تُعاد فيه الروح».
बरा बिन आज़िब -रज़ियल्लाहु अंहु- कहते हैं कि हम अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ एक अनसारी के जनाज़े में निकले। हम क़ब्र के पास पहुँचे। अभी मुर्दे को दफ़न करने का कार्य संपन्न नहीं हुआ था। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बैठ गए और हम भी आपके आस-पास बैठ गए। ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे हमारे सरों पर पक्षी बैठे हों। आपके हाथ में एक लकड़ी थी, जिससे आप धरती को कुरेद रहे थे। इसी बीच आपने अपना सर उठाया और फ़रमायाः "क़ब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगो।" आपने यह बात दो या तीन बार कही। एक रिवायत में यह इज़ाफ़ा हैः "मुर्दा, लोगों के जूतों की आहट सुनता है, जब लोग वहाँ से वापस चल देते हैं औरउस समय उससे कहा जाता है कि ऐ अमुक, तेरा रब कौन है, तेरा दीन क्या है और तेरा नबी कौन है? हन्नाद कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "उसके पास दो फ़रिश्ते आते हैं, उसे बिठाते हैं और उससे कहते हैंः तेरा रब कौन है? वह कहता हैः मेरा रब अल्लाह है। दोनों उससे पूछते हैंः तेरा धर्म क्या है? वह कहता हैः मेरा धर्म इसलाम है। फिर दोनों उससे पूछते हैंः यह कौन हैं, जो तुम्हारे बीच भेजे गए थे?" आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाते हैं: "वह कहता हैः वह अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हैं। दोनों फ़रिश्ते कहते हैंः तुम्हें कैसे पता चला? वह कहता हैः मैंने अल्लाह की किताब पढ़ी और उस पर विश्वास किया तथा उसकी पुष्टि की।" जरीर -रज़ियल्लाहु अंहु- की हदीस में यह इज़ाफ़ा हैः इसी का ज़िक्र सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह के इस फ़रमान में हैः {يُثَبِّتُ اللهُ الذين آمنوا} (अल्लाह उन लोगों को, जो ईमान लाए, स्थिरता प्रदान करता है।) [सूरा इबराहीमः 27] (फिर दोनों की रिवायतों के शब्द एक जैसे हैं) : आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "तब एक आवाज़ देने वाला आकाश से आवाज़ देता हैः मेरे बंदे ने सच कहा है। अतः, उसके लिए जन्नत का बिछौना बिछा दो, उसके लिए जन्नत की ओर एक द्वार खोल दो और उसे जन्नत का वस्त्र पहना दो।" आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाते हैंः "फिर उसके पास जन्नत की हवा और उसकी ख़ुशबू आने लगती है।" आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाते हैंः "उसकी क़ब्र को वहाँ तक फैला दिया जाता है, जहाँ तक उसकी नज़र जाए।" फिर आपने काफ़िर की मृत्यु का ज़िक्र किया और फ़रमायाः "उसकी रूह को उसके शरीर में लौटाया जाता है और उसके पास दो फ़रिश्ते आते हैं तथा उसे उठाकर बिठाते हैं और उससे कहते हैंः तेरा रब कौन है? वह कहता हैः हाय, हाय! मैं नहीं जानता। दोनों कहते हैंः तेरा धर्म किया है? वह कहता हैः हाय, हाय,हाय! मैं नहीं जानता। दोनों कहते हैंः यह व्यक्ति कौन हैं, जो तुम्हारे बीच भेजे गए थे? वह कहता हैः हाय, हाय! मैं नहीं जानता। इतने में एक आवाज़ देने वाला आकाश से आवाज़ देता हैः इसने झुठ कहा है। अतः, इसके लिए आग का बिछौना बिछा दो, इसे आग का वस्त्र पहना दो और इसके लिए जहन्नम की ओर एक द्वार खोल दो।" आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाते हैंः "इसके बाद उसके पास जहन्नम की तपिश और उसकी गर्म हवा आती रहती है।" आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाते हैंः "तथा उसकी क़ब्र को उसके ऊपर तंग कर दिया जाता है, यहाँ तक कि उसकी एक तरफ़ की पसलियाँ दूसरी तरफ़ आ जाती हैं।" जरीर -रज़ियल्लाहु अन्हु- की हदीस में यह इज़ाफ़ा है कि आपने फ़रमायाः "फिर उस पर एक अंधे तथा गूँगे फ़रिश्ते को निर्धारित कर दिया जाता है, जिसके पास लोहे का एक हथोड़ा होता है कि यदि उसे पर्वत पर मारा जाए, तो वह मिट्टी बन जाए।" आप फ़रमाते हैंः "वह फ़रिश्ता उस हथोड़े से उसे ऐसी मार मारता है कि जिसे पूरब और पश्चिम के बीच की सारी चीज़ें, इनसान और जिन्न के सिवा,सुनती हैं और वह मिट्टी बन जाता है।" आप फ़रमाते हैंः "फिर उसमें जान लौटा दी जाती है।"
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

مسند الإمام أحمد بن حنبل، أحمد بن حنبل أبو عبدالله الشيباني، تحقيق: شعيب الأرنؤوط و عادل مرشد، وآخرون، تحت إشراف: عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى1421هـ، 2001م. سنن أبي داود، سليمان بن الأشعث أبوداود، تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، المكتبة العصرية،صيدا، بيروت. صحيح الجامع الصغير وزيادته، محمد ناصر الدين الألباني، المكتب الإسلامي، بيروت، الطبعة: الثالثة 1408هـ. مرقاة المفاتيح، علي بن سلطان القاري ، دار الفكر، بيروت، لبنان، الطبعة: الأولى 1422هـ، 2002م. معجم اللغة العربية المعاصرة، أحمد مختار عبد الحميد عمر بمساعدة فريق عمل، الناشر: عالم الكتب، الطبعة: الأولى 1429هـ، 2008م. تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي، محمد عبد الرحمن بن عبد الرحيم المباركفورى، دار الكتب العلمية، بيروت. شرح سنن النسائي المسمى «ذخيرة العقبى في شرح المجتبى»، محمد بن علي الإثيوبي الوَلَّوِي، الناشر: دار المعراج الدولية للنشر، دار آل بروم للنشر والتوزيع، الطبعة الأولى. عون المعبود شرح سنن أبي داود، ومعه حاشية ابن القيم: تهذيب سنن أبي داود وإيضاح علله ومشكلاته، محمد أشرف بن أمير العظيم آبادي، دار الكتب العلمية، بيروت، الطبعة الثانية، 1415هـ. إكمال المعلم بفوائد مسلم، عياض بن موسى اليحصبي السبتي، المحقق: يحيى إسماعيل، الناشر: دار الوفاء للطباعة والنشر والتوزيع، مصر، الطبعة: الأولى، 1419هـ، 1998م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

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