अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सूचित कर रहे हैं कि बंदे से अल्लाह के भलाई के इरादे की निशानी यह है कि वह उसके गुनाहों की सज़ा दुनिया ही में शीघ्र दे दे; ताकि वह दुनिया से इस अवस्था में जाए कि उसके सिर पर गुनाह का बोझ न हो, जिसे क़यामत के दिन लेकर हाज़िर हो, क्योंकि जिसके अमल का बदला दुनिया ही में दे दिया गया, आखिरत में उसका हिसाब हल्का होगा। तथा बंदे के साथ अल्लाह के बुराई के इरादे की निशानी यह है कि दुनिया में उसके गुनाहों का बदला न दिया जाए, ताकि क़यामत के दिन वह अपने गुनाहों का बोझ लादकर आए और उचित बदला पाए।
الملخص في شرح كتاب التوحيد، للشيخ صالح الفوزان, دار العاصمة, الطبعة الأولى، 1422ه. الجديد في شرح كتاب التوحيد، لمحمد بن عبد العزيز السليمان القرعاوي, تحقيق: محمد بن أحمد سيد, مكتبة السوادي، الطبعة: الخامسة، 1424ه. جامع الترمذي, تحقيق: أحمد شاكر, شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي, الطبعة: الثانية، 1395هـ. صحيح الجامع الصغير, للألباني, المكتب الإسلامي.