सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

वह व्यक्ति सफल हो गया, जिसने इस्लाम ग्रहण कर लिया तथा उसे ज़रूरत भर रोज़ी मिल गई और अल्लाह ने जो कुछ उसे दिया है, उससे संतुष्ट रहा।

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ رضي الله عنهما أنَّ رَسولَ اللَّهِ صلَّى اللَّهُ عليْه وسلَّمَ، قال: «قَدْ أَفْلَحَ مَن أَسْلَمَ، وَرُزِقَ كَفَافًا، وَقَنَّعَهُ اللَّهُ بما آتَاهُ».
अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "वह व्यक्ति सफल हो गया, जिसने इस्लाम ग्रहण कर लिया तथा उसे ज़रूरत भर रोज़ी मिल गई और अल्लाह ने जो कुछ उसे दिया है, उससे संतुष्ट रहा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि वह व्यक्ति सफल हो गया, जो अपने पालनहार का आज्ञाकारी बन गया, उसे इस्लाम धर्म का पालन करने का सुयोग मिला, आवश्यकता अनुसार हलाल रोज़ी मिल गई तथा अल्लाह के अनुग्रह से उसकी दी हुई नेमतों पर संतुष्ट रहा।

फ़ायदे
  1. किसी व्यक्ति की खुशी इस बात में निहित है कि उसका धर्म परिपूर्ण हो, उसकी आजीविका पर्याप्त हो और वह अल्लाह द्वारा दी हुई चीज़ों से संतुष्ट रहे।
  2. इस्लाम का पालन तथा सुन्नत का अनुसरण करने के साथ-साथ अल्लाह की दी हुई चीज़ों से संतुष्ट रहने की प्रेरणा।
हवाला

صحيح مسلم (2/ 730) (1054). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 447). فيض القدير شرح الجامع الصغير، للمناوي (4/ 508). تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي، لأبي العلا المباركفوري (7/ 11).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
संसार प्रेम की मज़म्मत

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com