सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

साधारण अज़कार

7 हदीसें

सबसे उत्तम ज़िक्र 'ला इलाहा इल्लल्लाह' और सबसे उत्तम दुआ 'अल-हम्दु लिल्लाह' है।

عن جابر رضي الله عنه قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «أَفْضَلُ الذِّكْرِ: لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ، وَأَفْضَلُ الدُّعَاءِ: الْحَمْدُ لِلهِ».
जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैं ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह फरमाते हुए सुना : "सबसे उत्तम ज़िक्र 'ला इलाहा इल्लल्लाह' और सबसे उत्तम दुआ 'अल-हम्दु लिल्लाह' है।"
इसे तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में एवं इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि सबसे उत्तम ज़िक्र "ला इलाहा इल्लल्लाह" है, जिसका अर्थ है, अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है। जबकि सबसे उत्तम दुआ "अल-हम्दु लिल्लाह" है, जो इस बात का एतराफ़ है कि सारी नेमतें (अनुग्रह) प्रदान करने वाला अल्लाह है, जो संपूर्ण सुंदर गुणगान का हक़दार है।

फ़ायदे
  1. कलिमा-ए-तौहीद के द्वारा अधिक से अधिक अल्लाह का ज़िक्र और अल्लाह की प्रशंसा के द्वारा अधिक से अधिक उससे दुआ करने की प्रेरणा।
हवाला

سنن الترمذي (5/ 393) (3383). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمصطفى الخِن وغيره (2/ 984). زاد المعاد في هدي خير العباد، ابن قيم الجوزية (1/ 36).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

“अल्लाह के निकट सबसे प्रिय वाक्य चार हैं : सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल-हम्दु लिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए हैं), ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के अतिरिक्त कोई सच्चा पूज्य नहीं है) और अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है)। इनमें से जिस से चाहो आरंभ करो, हानि की कोई बात नहीं है ”

عن سَمُرَة بن جندبٍ رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «أَحَبُّ الْكَلَامِ إِلَى اللهِ أَرْبَعٌ: سُبْحَانَ اللهِ، وَالْحَمْدُ لِلهِ، وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ، وَاللهُ أَكْبَرُ، لَا يَضُرُّكَ بِأَيِّهِنَّ بَدَأْتَ».
समुरा बिन जुनदुब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : “अल्लाह के निकट सबसे प्रिय वाक्य चार हैं : सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल-हम्दु लिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए हैं), ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के अतिरिक्त कोई सच्चा पूज्य नहीं है) और अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है)। इनमें से जिस से चाहो आरंभ करो, हानि की कोई बात नहीं है ”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि अल्लाह के निकट सबसे प्रिय वाक्य चार हैं : सुबहान अल्लाह : इसका अर्थ है अल्लाह को हर कमी से पवित्र घोषित करना। अल-हम्दु लिल्लाह : इसका मतलब है अल्लाह को हर एतबार से संपूर्ण बताना, उससे प्रेम रखना और उसका सम्मान करना। ला इलाहा इल्लल्लाह : इसका अर्थ यह है कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सच्चा पूज्य नहीं है। अल्लाहु अकबर : अल्लाह सबसे शक्तिशाली, सबसे महान और सबसे सामर्थ्यवान है। इन वाक्यों की फ़ज़ीलत तथा इनके सवाब की प्राप्ति के लिए इनको हदीस में उल्लिखित कर्म के अनुसार कहना अनिवार्य नहीं है।

फ़ायदे
  1. इस्लामी शरीयत एक आसान शरीयत है। यही कारण है कि इस बात की अनुमति दी गई है कि इन चार शब्दों में से जिससे चाहें आरंभ कर सकते हैं।
हवाला

صحيح مسلم (3/ 1685) (2137)، (4/ 2093) (2731)، (4/ 2072) (2695). توضيح الأحكام من بلوغ المرام، للبسام (7/ 540). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (10/ 411). فتح ذي الجلال والإكرام، لابن عثيمين (6/ 477). سبل السلام بشرح بلوغ المرام، للصنعاني (2/ 706).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

शेष रहने वाली नेक चीज़ें हैंः ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है), सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) अल-हम्दुलिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है) तथा ला ह़ौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह (अल्लाह की मदद बिना न हालात बदलने की ताक़त है और न कुछ करने का साहस)।

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : "الْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ، لَا إلَهَ إلَّا اللَّهُ، وَسُبْحَانَ اللَّهِ، وَاَللَّهُ أَكْبَرُ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إلَّا بِاَللَّهِ".
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “शेष रहने वाली नेक चीज़ें हैंः ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है), सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) अल-हम्दुलिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है) तथा ला ह़ौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह (अल्लाह की मदद बिना न हालात बदलने की ताक़त है और न कुछ करने का साहस)।”
इसे इब्ने ह़िब्बान ने रिवायत किया है । - इसे ह़ाकिम ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है।दर्जाशवाहिद के आधार पर सह़ीह़
हवाला

الإحسان في تقريب صحيح ابن حبان، لمحمد بن حبان بن أحمد بن حبان بن معاذ، التميمي، أبو حاتم، الدارمي، البُستي، ترتيب: الأمير علاء الدين علي بن بلبان الفارسي، حققه وخرج أحاديثه وعلق عليه: شعيب الأرنؤوط، ط مؤسسة الرسالة، بيروت. المستدرك على الصحيحين، لأبي عبد الله الحاكم محمد بن عبد الله بن محمد بن حمدويه النيسابوري المعروف بابن البيع، تحقيق: مصطفى عبد القادر عطا، ط دار الكتب العلمية – بيروت. السنن الكبرى، لأبي عبد الرحمن أحمد بن شعيب بن علي الخراساني، النسائي، تحقق: حسن عبد المنعم شلبي، ط مؤسسة الرسالة – بيروت. سلسلة الأحاديث الصحيحة وشيء من فقهها وفوائدها، لأبي عبد الرحمن محمد ناصر الدين، بن الحاج نوح بن نجاتي بن آدم الألباني، ط مكتبة المعارف للنشر والتوزيع، الرياض. توضيح الأحكام من بلوغ المرام، الشيخ عبد الله بن عبد الرحمن البسام، ط مكتبة الأسد الإسلامية، الطبعة الخامسة. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، الشيخ عبد الله بن صالح الفوزان، ط دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، الشيخ صالح الفوزان بن عبد الله الفوزان، اعتنى بها عبد السلام بن عبد الله السليمان، الطبعة الأولى. فتح ذي الجلال والإكرام، الشيخ محمد بن صالح العثيمين، ط المكتبة الإسلامية، الطبعة الأولى. سبل السلام بشرح بلوغ المرام، للإمام محمد بن إسماعيل الصنعاني، ط دار الحديث.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

दो शब्द रहमान (अल्लाह) को बड़े प्रिय हैं

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «كَلِمَتَانِ خَفِيفَتَانِ عَلَى اللِّسَانِ، ثَقِيلَتَانِ فِي الْمِيزَانِ، حَبِيبَتَانِ إِلَى الرَّحْمَنِ: سُبْحَانَ اللهِ الْعَظِيمِ، سُبْحَانَ اللهِ وَبِحَمْدِهِ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : दो शब्द रहमान (अल्लाह) को बड़े प्रिय हैं, ज़ुबान पर बड़े हलके हैं और तराज़ू में बड़े भारी होंगे : सुबहानल्लाहिल अज़ीम, सुबहानल्लाहि व बिहम्दिहि (अल्लाह पाक है अपनी प्रशंसा समेत, पाक है अल्लाह जो बड़ा महान है)।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि दो वाक्य हैं, जिनको इन्सान आसानी के साथ किसी भी हाल में बोल सकता है, तराज़ू में इनका प्रतिफल बहुत भारी साबित होगा और हमारा रब इन दोनों वाक्यों से मोहब्बत रखता है। यह दोनों वाक्य हैं : सुबहानल्लाहिल अज़ीम, सुबहानल्लाहि व बिहम्दिहि (पाक है अल्लाह जो बड़ा महान है, अल्लाह पाक है अपनी प्रशंसा समेत)। इन दोनों वाक्यों का इतना महत्व इसलिए है कि इनके अंदर अल्लाह की महिमा और संपूर्णता बयान की गई है और उसे तमाम कमियों से पाक घोषित किया गया है।

फ़ायदे
  1. सबसे बड़ा ज़िक्र वह है, जिसके अंदर अल्लाह की पाकी बयान की जाए और उसकी प्रशंसा की जाए।
  2. बंदों पर अल्लाह का व्यापक अनुग्रह कि वह छोटे-छोटे कार्य पर भी बड़े-बड़े बदले दे दिया करता है।
हवाला

صحيح البخاري (8/ 86) (6406). صحيح مسلم (4/ 2072) (2694). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (10/ 480). فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (6/ 519).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जो लोग किसी सभा में बैठते हैं और वहाँ अल्लाह को याद नहीं करते तथा अपने नबी पर दरूद नहीं भेजते, तो उनका वह बैठना उनके लिए पछतावे का कारण बनेगा। अब यदि अल्लाह चाहेगा, तो उन्हें यातना देगा और चाहेगा तो माफ़ करेगा।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «مَا جَلَسَ قَوْمٌ مَجْلِسًا لَمْ يَذْكُرُوا اللَّهَ فِيهِ وَلَمْ يُصَلُّوا عَلَى نَبِيِّهِمْ إِلاَّ كَانَ عَلَيْهِمْ تِرَةً، فَإِنْ شَاءَ عَذَّبَهُمْ وَإِنْ شَاءَ غَفَرَ لَهُمْ».
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जो लोग किसी सभा में बैठते हैं और वहाँ अल्लाह को याद नहीं करते तथा अपने नबी पर दरूद नहीं भेजते, तो उनका वह बैठना उनके लिए पछतावे का कारण बनेगा। अब यदि अल्लाह चाहेगा, तो उन्हें यातना देगा और चाहेगा तो माफ़ करेगा।"
इसे अबू दावूद ने, तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अल्लाह के ज़िक्र में कोताही करने से मना किया है और बताया है कि जब लोग किसी सभा में बैठे और फिर वहाँ से अल्लाह का ज़िक्र किए और उसके रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर दरूद भेजे बिना उठ गए, तो वह सभा क़यामत के दिन उनके लिए खेद, अफ़सोस, हानि और नुक़सान का कारण बनेगी। ऐसे में अगर अल्लाह चाहेगा, तो उनको उनके पिछले गुनाहों और बाद में होने वाली कोताहियों के कारण अज़ाब देगा और अगर चाहेगा तो अपने अनुग्रह से क्षमा कर देगा।

फ़ायदे
  1. ज़िक्र की प्रेरणा और उसकी फ़ज़ीलत का बयान।
  2. ऐसी सभाओं की फ़ज़ीलत, जिनमें अल्लाह का ज़िक्र और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का ज़िक्र किया जाए। जो सभाएँ इन दोनों बातों से ख़ाली हों, वह क़यामत के दिन वहाँ बैठने वालों के लिए हानिकारक सिद्ध होंगी।
  3. अल्लाह के ज़िक्र को नज़रअंदाज़ करने के ख़िलाफ़ चेतावनी सिर्फ़ सभाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दूसरी जगहों पर भी लागू होती है। इमाम नववी (अल्लाह उन पर रहम करे) ने कहा है : किसी व्यक्ति के लिए किसी जगह पर बैठकर अल्लाह का ज़िक्र किए बिना उसे छोड़ देना नापसंद है।
  4. क़यामत के दिन उन्हें जो पछतावा होगा वह या तो अल्लाह की आज्ञाकारिता में अपना समय न बिताने के कारण पुरस्कार और प्रतिफल से वंचित रहने के कारण होगा, या अल्लाह की अवज्ञा में अपना समय बर्बाद करने के कारण पाप और दंड की वजह से होगा।
  5. जब जायज़ कार्यों में व्यस्त होकर अल्लाह के ज़िक्र का अनदेखा करने वालों के लिए यह चेतावनी है, तो उन हराम सभाओं का क्या हाल होगा, जिनमें ग़ीबत और चुग़ली आदि होती है।
हवाला

سنن أبي داود (7/ 221) (4855). سنن الترمذي (5/ 391) (3380). السنن الكبرى للنسائي (9/ 155) (10163). توضيح الأحكام من بلوغ المرام، لعبد الله البسام (7/ 524). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (10/ 396). فتح ذي الجلال والإكرام، لابن عثيمين (6/ 464).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

सुबहानल्लाह, अल-हम्दु लिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह और अल्लाहु अकबर कहना, मेरे निकट उन सारी चाज़ों की तुलना में अधिक उत्तम है, जिनपर सूरज निकलता है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «لَأَنْ أَقُولَ: سُبْحَانَ اللهِ، وَالْحَمْدُ لِلهِ، وَلَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ، وَاللهُ أَكْبَرُ، أَحَبُّ إِلَيَّ مِمَّا طَلَعَتْ عَلَيْهِ الشَّمْسُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सुबहानल्लाह, अल-हम्दु लिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह और अल्लाहु अकबर कहना, मेरे निकट उन सारी चाज़ों की तुलना में अधिक उत्तम है, जिनपर सूरज निकलता है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि इन महत्वपूर्ण शब्दों द्वारा अल्लाह का ज़िक्र करना दुनिया और उसकी सारी चीज़ों से बेहतर है। ये शब्द इस प्रकार हैं : "सुबहानल्लाह" : इन शब्दों द्वारा तमाम कमियों से अल्लाह की पाकी बयान की जाती है। "अल-हम्दु लिल्लाह" : अल्लाह की यह प्रशंसा कि वह अपने सारे गुणों में संपूर्ण है। साथ में उससे मोहब्बत तथा उसका सम्मान भी हो। "ला इलाहा इल्लल्लाह" : अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है। "अल्लाहु अकबर" : अल्लाह हर चीज़ से बड़ा तथा शक्तिशाली है।

फ़ायदे
  1. अल्लाह के ज़िक्र की प्रेरणा और इस बात का उल्लेख कि अल्लाह का ज़िक्र उन सभी चीज़ों से प्रिय है, जिनपर सूरज निकलता है।
  2. अधिक से अधिक ज़िक्र करने की प्रेरणा, क्योंकि इसका बहुत बड़ा प्रतिफल है।
  3. दुनिया के आनंद की चीज़ें थोड़ी हैं और सब ख़त्म हो जाएँगी।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 2072) (2695). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 496). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (5/ 485). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمصطفى الخِن وغيره (2/ 970). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل المبارك (ص772).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जो ला इलाहा इल्ललाह वल्लाहु अकबर कहता है, अल्लाह उसकी पुष्टि करता है और कहता हैः मेरे सिवा कोई सत्य पुज्य नहीं और मैं ही सबसे महान हूँ

عن أبي سعيد الخدري وأبي هريرة رضي الله عنهما أَنهُما شَهِدَا عَلَى رسول اللَّه -صَلّى اللهُ عَلَيْهِ وسَلَّم- أَنه قالَ: «من قال: لا إله إلا الله والله أكبر، صَدَّقه ربه، فقال: لا إله إلا أنا وأنا أكبر. وإذا قال: لا إله إلا الله وحده لا شريك له، قال: يقول: لا إله إلا أنا وَحدِي لا شريك لي. وإذا قال: لا إله إلا الله له الملك وله الحمد، قال: لا إله إلا أنا لي الملك ولي الحمد. وإذا قال: لا إله إلا الله ولا حول ولا قوة إلا بالله، قال: لا إله إلا أنا ولا حول ولا قوة إلا بي» وكان يقول: «من قالها في مرضه ثم مات لم تَطْعَمْهُ النار».
अबू सईद ख़ुदरी तथा अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहुमा) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को साक्षी ठहराते हुए कहा कि आपने फ़रमायाः जो (لا إله إلا الله والله أكبر) कहता है तो अल्लाह कहता हैः मेरे सिवा कोई सत्य़ पूज्य नहीं और मैं ही सबसे महान हूँ) और जब (لا إله إلا الله وحده لا شريك له) कहता है, तो कहता हैः मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं और मेरा साझी भी कोई नहीं। और जब (لا إله إلا الله له الملك وله الحمد) कहता है, तो अल्लाह कहता हैः मेरे सिवा कोई सत्य़ पूज्य नहीं और मेरी ही बादशाहत है तथा सारी प्रशंसा भी मेरे लिए है और जब لا إله إلا الله ولا حول ولا قوة إلا بالله कहता है, तो अल्लाह कहता हैः मेरे सिवा कोई सत्य़ पूज्य नहीं और मेरी अनुमति के बिना कोई क्षमता और ताक़त भी नहीं। आप कहा करते थे किः जो रोगग्रस्त हालत में कह कर मरता है, उसे आग जला नहीं सकती।
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

1- بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي. 2- الجامع الصحيح –وهو سنن الترمذي-؛ للإمام محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق أحمد شاكر وآخرين، مكتبة الحلبي-مصر، الطبعة الثانية، 1388هـ. 3- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ. 4- سلسلة الأحاديث الصحيحة؛ للشيخ محمد ناصر الدين الألباني، مكتبة المعارف-الرياض، 1415هـ. 5- سنن ابن ماجه؛ للحافظ محمد بن يزيد القزويني، حققه محمد فؤاد عبدالباقي، دار إحياء الكتب العربية. 6- شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن-الرياض، 1426هـ. 7- نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com