उन लोगों के समीप अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक प्रिय कोई भी नहीं था, (इसके बावजूद) वह लोग आप को देख कर खड़े नहीं होते थे क्योंकि वह जानते थे कि अल्लाह के रसूल (- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-) इस से घृणा करते हैं।
عن أنس رضي الله عنه ، قال: «لم يكن شخصٌ أَحَبَّ إليهم مِن رسول الله -صلى الله عليه وسلم، وكانوا إذا رَأَوْه لم يقوموا لِمَا يَعْلَمون مِن كَرَاهِيَته لذلك».
अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है वह कहते हैं कि उन लोगों (सहाबा) के समीप अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक प्रिय कोई भी नहीं था, (इसके बावजूद) वह लोग आप को देख कर खड़े नहीं होते थे क्योंकि वह जानते थे कि अल्लाह के रसूल (-सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-) इस से घृणा करते हैं।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
इस हदीस में अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- बता रहे हैं कि सहाबा के निकट अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से प्रिय कोई नहीं था। लेकिन इस अत्याधिक प्रेम के बावजूद जब वे अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को आते हुए देखते तो आपके स्वागत में खड़े नहीं होते थे। क्योंकि उन्हें पता था कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने लिए किसी के खड़े होने को अप्रिय जानते हैं।
हवाला
- سنن الترمذي، نشر: شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي – مصر، الطبعة: الثانية، 1395هـ - 1975م.
- مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421هـ - 2001م.
- مشكاة المصابيح، تحقيق الألباني، نشر: المكتب الإسلامي – بيروت، الطبعة: الثالثة، 1985م.
- فتح الباري شرح صحيح البخاري, أحمد بن علي بن حجر العسقلاني الشافعي, دار المعرفة - بيروت، 1379, رقم كتبه وأبوابه وأحاديثه: محمد فؤاد عبد الباقي, قام بإخراجه وصححه وأشرف على طبعه: محب الدين الخطيب.
- فتاوى اللجنة الدائمة - المجموعة الأولى, اللجنة الدائمة للبحوث العلمية والإفتاء, جمع وترتيب: أحمد بن عبد الرزاق الدويش, الناشر: رئاسة إدارة البحوث العلمية والإفتاء - الإدارة العامة للطبع – الرياض.
- مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان، الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002م.
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com