عَنْ حُذَيْفَةَ بْنِ اليَمَانِ رَضيَ اللهُ عنه: أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا أَرَادَ أَنْ يَنَامَ وَضَعَ يَدَهُ تَحْتَ رَأْسِهِ، ثُمَّ قَالَ: «اللَّهُمَّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَجْمَعُ أَوْ تَبْعَثُ عِبَادَكَ».
हुज़ैफ़ा बिन यमान (रज़ियल्लाहु अनहुमा) और हफ़सा बिंत उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब सोने का इरादा करते तो अपना दायाँ हाथ अपने गाल के नीचे रख लेते, फिर कहतेः "اللَّهُمَّ قِني عذابك يوم تبعث عبادك" अर्थात, ऐ अल्लाह! मुझे उस दिन अपने अज़ाब से बचाना, जिस दिन तू अपने बंदों को जीवित करके उठाएगा। एक रिवायत में है कि आप यह दुआ तीन बार पढ़ते थे।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
سنن الترمذي (5/ 404) (3398). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 533). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (17/ 335). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 1001).