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तशरीह के साथ हदीसें

ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई जनाबत (नापाकी) की अवस्था में सो सकता है? आपने फ़रमायाः हाँ, जब तुममें से कोई वज़ू कर ले, तो सो सकता है।

عن عبد الله بنِ عمر رضي الله عنهما أن عمرَ بْن الخطاب رضي الله عنه قال: ((يا رسول الله، أّيَرقُدُ أَحَدُنا وهو جُنُب؟ قال: نعم، إِذَا تَوَضَّأ أَحَدُكُم فَليَرقُد)).
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है कि उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अनहुमा) ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई जनाबत (वीर्य पतन से होने वाली नापाकी) की अवस्था में सो सकता है? आपने फ़रमायाः हाँ, जब तुममें से कोई वज़ू कर ले, तो सो सकता है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- ने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा कि यदि कोई रात के प्रथम भाग में अपनी स्त्री से संभोग कर ले, यद्यपि वीर्य स्खलन न हुआ हो, या फिर उसे स्वप्नदोष हो जाए, तो क्या वह जनाबत की अवस्था में सो सकता है? तो आपने उन्हें इसकी अनुमति यह कहते हुए दे दी कि इस बड़ी नापाकी को शरई वज़ू के द्वारा हलका करना होगा। उसके बाद यदि जनाबत की अवस्था में सो जाता है, तो कोई बात नहीं है।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى 1426هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام، إسماعيل بن محمد الأنصاري، دار الفكر، دمشق، الطبعة: الأولى 1381هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
सोने तथा जागने के आदाब

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com