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तशरीह के साथ हदीसें

एक साथ जमा होकर खाओ और अल्लाह का नाम लो, तुम्हारे खाने में बरकत दी जाएगी।

عَنْ وَحْشِيِّ بْنِ حَرْبٍ رَضيَ اللهُ عنه: أَنَّهُمْ قَالُوا: يَا رَسُولَ اللَّهِ، إِنَّا نَأْكُلُ وَلَا نَشْبَعُ، قَالَ: «فَلَعَلَّكُمْ تَأْكُلُونَ مُتَفَرِّقِينَ؟» قَالُوا: نَعَمْ. قَالَ: «فَاجْتَمِعُوا عَلَى طَعَامِكُمْ، وَاذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ عَلَيْهِ، يُبَارَكْ لَكُمْ فِيهِ».
वहशी बिन हर्ब- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कुछ साथियों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! हम खाते हैं लेकिन संतुष्ट नहीं होते? आपने कहाः शायद तुम अलग-अलग खाते हो? उन्होंने कहाः हाँ! फ़रमायाः एक साथ जमा होकर खाओ और अल्लाह का नाम लो, तुम्हारे खाने में बरकत दी जाएगी।
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
हवाला

سنن أبي داود (5/ 588) (3764). سنن ابن ماجه (4/ 418) (3286). مسند أحمد (25/ 485) (16078). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (4/ 217). نزهة المتقين بشرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 607). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 59).

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खाने-पीने के आदाब

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com