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तशरीह के साथ हदीसें

शरीर के विभिन्न अंगों से होने वाले कर्मों से फ़ज़ीलत

8 हदीसें

विधवाओं और निर्धनों के लिए दौड़-धूप करने वाला अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने वाले की तरह है, या रात में उठकर नमाज़ पढ़ने वाले, दिन में रोज़ा रखने वाले की तरह है।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «السَّاعِي عَلَى الأَرْمَلَةِ وَالمِسْكِينِ، كَالْمُجَاهِدِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ، أَوِ القَائِمِ اللَّيْلَ الصَّائِمِ النَّهَارَ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "विधवाओं और निर्धनों के लिए दौड़-धूप करने वाला अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने वाले की तरह है, या रात में उठकर नमाज़ पढ़ने वाले, दिन में रोज़ा रखने वाले की तरह है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जो व्यक्ति किसी ऐसी विधवा स्त्री के हितों की रक्षा के लिए खड़ा हो, जिसकी देख-रेख करने वाला कोई न हो, इसी तरह किसी ज़रूरतमंद निर्धन की मदद के लिए आगे आए और इस तरह के लोगों पर इस विश्वास के साथ खर्च करे कि इसका बदला अल्लाह के यहाँ मिलने वाला है, तो वह प्रतिफल के मामले में अल्लाह के मार्ग में युद्ध करने वाले या थके बिना तहज्जुद की नमाज़ पढ़ने वाले एवं निरंतर रोज़ा रखने वाले की तरह है जो कभी रोज़ा न छोड़े।

फ़ायदे
  1. परस्पर सहयोग, एक-दूसरे की मदद करने और ज़रूरतमंदों की ज़रूरतें पूरी करने की प्रेरणा।
  2. इबादत के अंदर हर अच्छा काम शामिल है। विधवाओं एवं निर्धनों की मदद करना भी इबादत है।
  3. इब्न-ए-हुबैरा कहते हैं : इसका मतलब यह है कि अल्लाह उसे एक साथ रोज़ा रखने वाले, तहज्जुद पढ़ने वाले और अल्लाह के मार्ग में युद्ध करने वाले का प्रतिफल प्रदान करता है। इसका कारण यह है कि उसने विधवाओं की देख-भाल उनके पति की तरह की तथा अपना खर्च चलाने में असमर्थ निर्धन पर अपना बचा हुआ धन खर्च किया एवं श्रम दान किया, इसलिए उसका लाभ रोज़े, तहज्जुद और अल्लाह के मार्ग में युद्ध के बराबर होगा।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 62) (5353). صحيح مسلم (4/ 2286) (2982). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم بن عيد الهلالي (1/ 351). تطريز رياض الصالحين، لفيصل بن عبد العزيز المبارك (ص198). رياض الصالحين (ص107) (265). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 99). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (275).

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सबसे उत्तम दीनार जिसे इंसान ख़र्च करता है, वह दीनार है जिसे वह अपने परिवार पर ख़र्च करता है, फिर वह दीनार है जो वह अल्लाह की राह में जिहाद करने के लिए खास किए हुए जानवर पर ख़र्च करता है, और फिर वह दीनार है जिसे वह अल्लाह के रास्ते में अपने साथियों पर ख़र्च करता है।

عَنْ ثَوْبَانَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَفْضَلُ دِينَارٍ يُنْفِقُهُ الرَّجُلُ، دِينَارٌ يُنْفِقُهُ عَلَى عِيَالِهِ، وَدِينَارٌ يُنْفِقُهُ الرَّجُلُ عَلَى دَابَّتِهِ فِي سَبِيلِ اللهِ، وَدِينَارٌ يُنْفِقُهُ عَلَى أَصْحَابِهِ فِي سَبِيلِ اللهِ» قَالَ أَبُو قِلَابَةَ: وَبَدَأَ بِالْعِيَالِ، ثُمَّ قَالَ أَبُو قِلَابَةَ: وَأَيُّ رَجُلٍ أَعْظَمُ أَجْرًا مِنْ رَجُلٍ يُنْفِقُ عَلَى عِيَالٍ صِغَارٍ، يُعِفُّهُمْ أَوْ يَنْفَعُهُمُ اللهُ بِهِ وَيُغْنِيهِمْ.
स़ौबान रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णनित है, वह बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सबसे उत्तम दीनार जिसे इंसान ख़र्च करता है, वह दीनार है जिसे वह अपने परिवार पर ख़र्च करता है, फिर वह दीनार है जो वह अल्लाह की राह में जिहाद करने के लिए खास किए हुए जानवर पर ख़र्च करता है, और फिर वह दीनार है जिसे वह अल्लाह के रास्ते में अपने साथियों पर ख़र्च करता है।" अबू क़िलाबा कहते हैं कि शुरूआत परिवार से की। फिर अबू क़िलाबा ने कहा कि भला कौन व्यक्ति, उस आदमी से पुण्य में बढ़ सकता है, जो अपने छोटे-छोटे बच्चों पर खर्च करता है, ताकि वे दूसरों के सामने हाथ फैलाने पर मजबूर न हों या अल्लाह तआला उन्हें उसके द्वारा लाभ पहुँचाए तथा उनको निस्पृह कर दे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

यहाँ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने खर्च करने के कुछ रूप बयान किए हैं और बताया है कि जब खर्च करने के कई अवसर आपस में टकराने लगें, तो क्रमानुसार जो जितना महत्वपूर्ण हो, उसे महत्व दिया जाना चाहिए। आपने बताया कि एक मुसलमान द्वारा खर्च किया गया सबसे अधिक सवाब वाला धन वह है, जिसे उन लोगों पर खर्च किया जाए, जिनका भरण-पोषण उसपर अनिवार्य है। जैसे पत्नी और बच्चे आदि। उसके बाद नम्बर आता है अल्लाह की राह में जिहाद के लिए तैयार रखे गए सवारी पर खर्च करने का। उसके बाद नम्बर आता है अपने दोस्तों और साथियों पर खर्च करने का, जो अल्लाह की राह में जंग कर रहे हों।

फ़ायदे
  1. महत्व की दृष्टि से खर्च करने का क्रम वही है, जो इस हदीस में उल्लिखित है। टकराव की अवस्था में इस क्रम का ख़याल रखा जाएगा।
  2. बाल-बच्चों पर खर्च करना अन्य लोगों पर खर्च कने की तुलना में अधिक महत्व रखता है।
  3. अल्लाह की राह में जिहाद पर, जैसे हथियारों और मुजाहिदों को तैयार करने में किया जाने वाला खर्च, खर्च करने का एक बहुत बड़ा रूप है।
  4. कुछ लोगों का कहना है कि अल्लाह के मार्ग से मुराद हर नेकी का काम, जैसे हज आदि है।
हवाला

صحيح مسلم (2/ 691) (994). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (5/ 315). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 156). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 291). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 374).

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जब कोई मुस्लिम या मोमिन बंदा वज़ू करता है और अपना चेहरा धोता है, तो उसके चेहरे से वह सारे गुनाह पानी के साथ या पानी की अंतिम बूँद के साथ निकल जाते हैं, जो उसने अपनी आँखों से देखने के क्रम में किए थे।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضيَ اللهُ عنهُ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِذَا تَوَضَّأَ الْعَبْدُ الْمُسْلِمُ -أَوِ الْمُؤْمِنُ- فَغَسَلَ وَجْهَهُ خَرَجَ مِنْ وَجْهِهِ كُلُّ خَطِيئَةٍ نَظَرَ إِلَيْهَا بِعَيْنَيْهِ مَعَ الْمَاءِ -أَوْ مَعَ آخِرِ قَطْرِ الْمَاءِ-، فَإِذَا غَسَلَ يَدَيْهِ خَرَجَ مِنْ يَدَيْهِ كُلُّ خَطِيئَةٍ كَانَ بَطَشَتْهَا يَدَاهُ مَعَ الْمَاءِ -أَوْ مَعَ آخِرِ قَطْرِ الْمَاءِ-، فَإِذَا غَسَلَ رِجْلَيْهِ خَرَجَتْ كُلُّ خَطِيئَةٍ مَشَتْهَا رِجْلَاهُ مَعَ الْمَاءِ -أَوْ مَعَ آخِرِ قَطْرِ الْمَاءِ- حَتَّى يَخْرُجَ نَقِيًّا مِنَ الذُّنُوبِ».
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब कोई मुस्लिम या मोमिन बंदा वज़ू करता है और अपना चेहरा धोता है, तो उसके चेहरे से वह सारे गुनाह पानी के साथ या पानी की अंतिम बूँद के साथ निकल जाते हैं, जो उसने अपनी आँखों से देखने के क्रम में किए थे। फिर जब वह अपने हाथों को धोता है, तो पानी के साथ या पानी की अंतिम बूँद के साथ उसके हाथ के वह सारे गुनाह निकल जाते हैं, जो उसके हाथों के पकड़ने से हुए थे। फिर जब वह अपने पैरों को धोता है, तो पानी के साथ या पानी की अंतिम बूँद के साथ उसके पैरों से वह सारे गुनाह निकल जाते हैं, जिनकी ओर उसके पाँव चलकर गए थे। इस तरह वह गुनाहों से पवित्र होकर निकल जाता है।''
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि जब कोई मुसलमान या मोमिन वज़ू करता है और वज़ू करते समय अपने चेहरे को धोता है, तो उसके चेहरे से वह सारे छोटे गुनाह धोने के बाद गिरते हुए पानी के साथ या पानी की अंतिम बूँद के साथ निकल जाते हैं, जो उसने अपनी आँख से देखने के क्रम में किए थे। जब अपने दोनों हाथों को धोता है, तो उसके दोनों हाथों से वह सारे छोटे गुनाह पानी के साथ या पानी की अंतिम बूँद के साथ निकल जाते हैं, जो उसके हाथ से हुए थे। जब दोनों पैरों को धोता है, तो उसके पैरों से वह सारे छोटे गुनाह पानी के साथ या पानी की अंतिम पूँद के साथ निकल जाते हैं, जो उसके पैरों से चलने के क्रम में हुए थे। फलस्वरूप जब वज़ू पूरा होता है, तो छोटे गुनाहों से साफ़-सुथरा होकर निकल जाता है।

फ़ायदे
  1. वज़ू में रहने की फ़ज़ीलत। वज़ू गुनाहों का कफ़्फ़ारा बनता है।
  2. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नेकी के कामों और इबादतों का प्रतिफल बयान करके उनके लिए प्रेरित किया करते थे।
  3. इन्सान के शरीर के हर अंग से कुछ न कुछ गुनाह हो जाया करते हैं और ये गुनाह उन अंगों से लगे रहते हैं तथा तौबा कर लेने के बाद उनसे निकल जाते हैं।
  4. वज़ू करते समय, शरीर के अंगों को धोने से इंद्रियों की शुद्धि होती है और साथ ही विभिन्न अंगों के माध्यम से किए गए पापों से आध्यात्मिक शुद्धि भी प्राप्त होती है।
हवाला

صحيح مسلم (1/ 215) (244). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (3/ 108). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (2/ 181). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 208). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 157).

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तुम जन्नत में उस समय तक प्रवेश नहीं कर सकते, जब तक ईमान न लाओ, और तुम उस समय तक मोमिन नहीं हो सकते, जब तक एक-दूसरे से प्रेम न करने लगो। क्या मैं तुम्हारा पथ पर्दशन ऐसे कार्य की ओर न कर दूँ, जिसे यदि तुम करोगे, तो एक-दूसरे से प्रेम करने लगोगे? अपने बीच में सलाम को आम करो।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا تَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ حَتَّى تُؤْمِنُوا، وَلَا تُؤْمِنُوا حَتَّى تَحَابُّوا، أَوَلَا أَدُلُّكُمْ عَلَى شَيْءٍ إِذَا فَعَلْتُمُوهُ تَحَابَبْتُمْ؟ أَفْشُوا السَّلَامَ بَيْنَكُمْ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम जन्नत में उस समय तक प्रवेश नहीं कर सकते, जब तक ईमान न लाओ, और तुम उस समय तक मोमिन नहीं हो सकते, जब तक एक-दूसरे से प्रेम न करने लगो। क्या मैं तुम्हारा पथ पर्दशन ऐसे कार्य की ओर न कर दूँ, जिसे यदि तुम करोगे, तो एक-दूसरे से प्रेम करने लगोगे? अपने बीच में सलाम को आम करो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जन्नत में केवल ईमान वाले ही प्रवेश करेंगे, जबकि ईमान के संपूर्ण होने और मुस्लिम समाज के सठीक होने के लिए ज़रूरी है कि लोग एक-दूसरे से मोहब्बत रखें। फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मोहब्बत आम करने वाली सबसे उत्तम चीज़ बताई। वह चीज़ यह है कि मुसलमानों के बीच सलाम आम किया जाए।

फ़ायदे
  1. जन्नत में प्रवेश के लिए ईमान ज़रूरी है।
  2. संपूर्ण ईमान की एक निशानी यह है कि मुसलमान अपने भाई के लिए वही पसंद करे, जो अपने लिए पसंद करता हो।
  3. सलाम आम करना और मुसलमानों को सलाम देना मुसतहब है। क्योंकि इससे लोगों के बीच मोहब्बत एवं शांति फैलती है।
  4. सलाम केवल मुसलमान ही को दिया जाएगा। क्योंकि हदीस में "तुम्हारे बीच" के शब्द आए हैं।
  5. सलाम करने से संबंध विच्छेद, अलगाव और दुश्मनी जैसी चीज़ें ख़त्म होती हैं।
  6. मुसलमानों के बीच मोहब्बत का महत्व और इसका ईमान के संपूर्ण होने के लिए ज़रूरी होना।
  7. एक अन्य हदीस में आया है कि सलाम के संपूर्ण शब्द "السلام عليكم ورحمة الله وبركاته" हैं, जबकि "السلام عليكم" कहना भी काफ़ी है।
हवाला

صحيح مسلم (1/ 74) (54). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 129). تطريز رياض الصالحين، لفيصل المبارك (ص515). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (4/ 394). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 661).

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जिसने पहले ही वार में किसी छिपकली को मारा, उसके लिए सौ नेकी लिख दी जाएगी और दूसरे वार में मारने पर उस से कम और तीसरे वार में मारने पर उससे भी कम

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «من قتل وَزَغَةً فِي أَوَّلِ ضَرْبَةٍ فله كذا وكذا حسنة، ومن قتلها في الضَّرْبَةِ الثانية فله كذا وكذا حسنة دون الأولى، وإن قتلها في الضربة الثالثة فله كذا وكذا حسنة». وفي رواية: «من قتل وَزَغًا في أول ضربة كتب له مائة حسنة، وفي الثانية دون ذلك، وفي الثالثة دون ذلك».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जिसने पहले ही वार में किसी छिपकली को मारा, उसे इतनी नेकी मिलेगी और जिसने दूसरे वार में मारा उसे इतनी नेकी मिलेगी और जिसने तीसरे वार में मारा, उसे इतनी नेकी मिलेगी। एक रिवायत में है: जिसने पहली वार में छिपकली को मार दिया, उसके लिए सौ नेकी लिख दी जाएगी और दूसरे वार में मारने पर उस से कम और तीसरे वार में मारने पर उस से भी कम।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى 1418ه - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا، الطبعة الأولى1430ه - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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तुममें से जिस महिला की तीन संतानें मर जाएँ, वह उसके लिए जहन्नम से आड़ बन जाती हैं

عن أبي سعيد الخُدْرِي رضي الله عنه قال: جاءت امرأة إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فقالت: يا رسول الله، ذهب الرجال بِحَدِيثِكَ، فاجْعَل لنَا من نَفْسِك يومًا نَأتِيكَ فيه تُعَلِّمُنَا مما عَلَّمَكَ الله، قال: «اجْتَمِعْنَ يَوَم كَذَا وكَذَا» فَاجْتَمَعْنَ، فأتَاهُنَّ النبي صلى الله عليه وسلم فَعَلَّمَهُنَّ مما عَلَّمَهُ الله، ثم قال: «ما مِنْكُنَّ من امرأة تُقَدِّمُ ثَلاَثَة من الولد إلا كانوا حِجَابًا من النَّارِ» فقالت امرأة: واثنين؟ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «واثنين».
अबू सईद खु़दरी (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई और उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! मर्द लोग आपकी हदीस लेकर चले गए। इसलिए आप हमारे लिए भी एक दिन निर्धारित कर दें, जिसमें हम उपस्थित हों और आप हमें वह चीज़ सिखाएँ जो आपको अल्लाह ने सिखाई है। आप ने फ़रमाया: फ़लाँ फ़लाँ दिन तुम लोग एकत्रित हो जाओ। वायदे के मुताबिक, औरतें एकत्रित हो गईं और अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उनके पास आए और उन्हें अल्लाह की सिखाई हुई बातों में से कुछ सिखाया, फिर फ़रमाया: तुममें से जिस महिला की तीन संतानें मर जाएँ, वह उसके लिए जहन्नम से आड़ बन जाती हैं। इस पर एक महिला ने पूछा: और यदि दो मरें तो? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: यदि दो मरें तो भी।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ الطبعة الرابعة عشر 1407هـ. بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م. صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل ، الطبعة: الأولى، 1428هـ. صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ. دليل الفالحين، تأليف: محمد بن علان، الناشر: دار الكتاب العربي، نسخة الكترونية، لا يوجد بها بيانات نشر. شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426هـ. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، تأليف: علي بن سلطان القاري، الناشر: دار الفكر، الطبعة: الأولى، 1422هـ.

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जिस मुस्लिम के तीन बच्चे मर जाएँ, उसे जहन्नम की आग केवल क़सम पूरी करने भर छूएगी

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «لا يَمُوتُ لأحَدٍ من المسلمين ثلاثة من الوَلَد فتَمسُّه النَّار إلا تَحِلَّة القَسَم».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जिस मुस्लिम व्यक्ति के तीन बच्चे मर जाएँ, उसे जहन्नम की आग केवल क़सम पूरी करने भर छूएगी।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح البخاري، للإمام محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد الناصر، دار طوق النجاة. - صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - سنن أبي داود، لأبي داود السجستاني، تحقيق محمد محيي الدين، المكتبة العصرية. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان بن إبراهيم البكري الصديقي الشافعي اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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अमल छह प्रकार के हैं और लोग चार प्रकार के हैं। रही बात छह आमाल की, तो उनमें से दो प्रकार के अमल वाजिब करने वाले हैं, दो प्रकार के अमल बराबर-बराबर हैं, एक प्रकार का अमल ऐसा नेक अमल है कि उसका सवाब दस गुना मिलता है और एक प्रकार का अमल ऐसा नेक अमल है कि उसका सवाब सात सौ गुना मिलता है

عَنْ خُرَيْمِ بْنِ فَاتِكٍ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «الْأَعْمَالُ سِتَّةٌ، وَالنَّاسُ أَرْبَعَةٌ، فَمُوجِبَتَانِ، وَمِثْلٌ بِمِثْلٍ، وَحَسَنَةٌ بِعَشْرِ أَمْثَالِهَا، وَحَسَنَةٌ بِسَبْعِ مِائَةٍ، فَأَمَّا الْمُوجِبَتَانِ: فَمَنْ مَاتَ لَا يُشْرِكُ بِاللهِ شَيْئًا دَخَلَ الْجَنَّةَ، وَمَنْ مَاتَ يُشْرِكُ بِاللهِ شَيْئًا دَخَلَ النَّارَ، وَأَمَّا مِثْلٌ بِمِثْلٍ: فَمَنْ هَمَّ بِحَسَنَةٍ حَتَّى يَشْعُرَهَا قَلْبُهُ، وَيَعْلَمَهَا اللهُ مِنْهُ كُتِبَتْ لَهُ حَسَنَةً، وَمَنْ عَمِلَ سَيِّئَةً، كُتِبَتْ عَلَيْهِ سَيِّئَةً، وَمَنْ عَمِلَ حَسَنَةً فَبِعَشْرِ أَمْثَالِهَا، وَمَنْ أَنْفَقَ نَفَقَةً فِي سَبِيلِ اللهِ فَحَسَنَةٌ بِسَبْعِ مِائَةٍ، وَأَمَّا النَّاسُ، فَمُوَسَّعٌ عَلَيْهِ فِي الدُّنْيَا مَقْتُورٌ عَلَيْهِ فِي الْآخِرَةِ، وَمَقْتُورٌ عَلَيْهِ فِي الدُّنْيَا مُوَسَّعٌ عَلَيْهِ فِي الْآخِرَةِ، وَمَقْتُورٌ عَلَيْهِ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، وَمُوَسَّعٌ عَلَيْهِ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ».
ख़ुरैम बिन फ़ातिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अमल छह प्रकार के हैं और लोग चार प्रकार के हैं। रही बात छह आमाल की, तो उनमें से दो प्रकार के अमल वाजिब करने वाले हैं, दो प्रकार के अमल बराबर-बराबर हैं, एक प्रकार का अमल ऐसा नेक अमल है कि उसका सवाब दस गुना मिलता है और एक प्रकार का अमल ऐसा नेक अमल है कि उसका सवाब सात सौ गुना मिलता है। जहाँ तक दो वाजिब करने वाले अमल की बात है, तो जो व्यक्ति इस अवस्था में दुनिया से मृत्यु को प्राप्त हुआ कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं ठहराया, वह जन्नत में जाएगा और जो इस अवस्था में दुनिया से मृत्यु पाया कि किसी को अल्लाह का साझी ठहराया, वह जहन्नम में जाएगा। जहाँ तक बराबर-बराबर वाले दो अमल की बात है, तो ध्यान में रहे कि जिसने किसी नेकी के काम की इस तरह नीयत कर ली कि उसके दिल ने उसे महसूस किया और अल्लाह ने उसकी नीयत को जाना, तो उसके लिए एक नेकी लिखी जाएगी। इसी तरह जिसने कोई बुरा काम किया, उसके लिए एक गुनाह लिखा जाएगा। पाँचवें प्रकार का अमल यह है कि जिसने कोई नेकी का काम कर लिया, उसे उस नेकी के काम का सवाब दस गुना दिया जाएगा। और छठे प्रकार का अमल यह है कि जिसने अल्लाह के रास्ते में कोई चीज़ खर्च की, उसे इस एक अच्छे काम का सवाब सात सौ गुना मिलेगा। जहाँ तक चार प्रकार के लोगों की बात है, तो कुछ लोग दुनिया में खुशहाल हैं और आख़िरत में कंगाल होंगे, कुछ लोग दुनिया में कंगाल हैं और आख़िरत में खुशहाल होंगे, कुछ लोग दुनिया में भी कंगाल हैं और आख़िरत में भी कंगाल होंगे, जबकि कुछ लोग दुनिया में भी खुशहाल हैं और आख़िरत में भी खुशहाल होंगे।
इसे अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि आमाल छह प्रकार के हैं और लोग चार प्रकार के हैं। छह प्रकार के आमाल इस प्रकार हैं : 1- जो व्यक्ति इस अवस्था में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं ठहराया, उसके लिए जन्नत वाजिब हो जाएगी। 2- जो व्यक्ति इस हालत में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी ठहराया, उसपर जहन्नम वाजिब हो जाएगी और वह उसके अंदर हमेशा रहेगा। यही दोनों अमल वाजिब करने वाले हैं। 3- ऐसा नेकी का काम जिसका इरादा किया गया हो। जिसने कोई नेकी का काम करने की इच्छा मात्र किया और उसका इरादा सच्चा था कि उसे अपने दिल में महसूस किया और अल्लाह ने भी उसकी नीयत को जाना, फिर किसी कारणवश उस नेकी के काम को वह कर न सका, तो उसके लिए एक पूरी नेकी लिखी जाती है। 4- किया हुआ गुनाह का काम। जिसने कोई बुरा काम किया, उसके लिए एक गुनाह लिखा जाता है। यह दोनों ऐसे अमल हैं, जिनका प्रतिफल काम के बराबर ही मिलता है। 5- नेकी का ऐसा काम, जिसका सवाब उस काम का दस गुनाह मिलता है। जिसने किसी नेकी के काम का इरादा किया और उसे कर भी डाला, उसके लिए दस नेकियाँ लिखी जाती हैं। 6- नेकी का ऐसा काम, जिसका सवाब सात सौ गुना मिलता है। जिसने अल्लाह के मार्ग में कोई चीज़ खर्च की, तो उसके लिए नेकी का यह काम सात सौ गुना लिखा जाता है। यह दरअसल बंदों पर अल्लाह का अनुग्रह एवं कृपा है। जबकि चार प्रकार के लोग इस तरह हैं : 1- दुनिया में खुशहाल तथा सुखी-संपन्न एवं आख़िरत में कंगाल लोग, जो जहन्नम में जाएँगे। इनसे मुराद मालदार अविश्वासी लोग हैं। 2- दुनिया में कंगाल लेकिन आख़िरत में खुशहाल तथा जन्नत में जाने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले लोग। इनसे मुराद निर्धन मोमिन हैं। 3- दुनिया तथा आख़िरत दोनों स्थानों में कंगाल लोग। इनसे मुराद निर्धन अविश्वासी हैं। 4- दुनिया तथा आख़िरत दोनों जगहों में खुशहाल लोग। इनसे मुराद धनवान् मोमिन हैं।

फ़ायदे
  1. बंदों पर अल्लाह का बहुत बड़ा अनुग्रह तथा उसका बंदों की नेकियों को बढ़ाकर लिखना।
  2. अल्लाह का न्याय तथा उसकी दया कि वह गुनाह का बदला न्याय के अनुरूप देता है। यानी एक बुरे काम का बदला एक गुनाह।
  3. शिर्क की भयावहता, क्योंकि इसकी बिना पर बंदा जन्नत से वंचित हो जाता है।
  4. अल्लाह के मार्ग में खर्च करने की फ़ज़ीलत का बयान।
  5. अल्लाह के मार्ग में खर्च करने के सवाब में बढ़ोतरी सात सौ गुना से शुरू होती है। क्योंकि इससे अल्लाह के दीन के पताका को ऊँचा करने में मदद मिलती है।
  6. इस हदीस में लोगों के अलग-अलग प्रकार बयान किए गए हैं।
  7. दुनिया में खुशहाली मोमिन तथा ग़ैर-मोमिन सब को प्राप्त होती है, जबकि आख़िरत की खुशहाली केवल मोमिन को प्राप्त होती है।
हवाला

مسند أحمد (31/ 196) (18900)، (31/ 384)، الفتح الرباني لترتيب مسند أحمد بن حنبل الشيباني (19/198).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

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