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तशरीह के साथ हदीसें

सहाबा रज़ियल्लाहु अनहुम की फ़ज़ीलतें

35 हदीसें

अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो मैं और मेरे जैसा एक और लड़का पानी का बरतन और एक छोटी-सी बरछी लेकर साथ हो जाते। तब आप उस पानी से इस्तिंजा (पवित्रता प्राप्त) करते।

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدْخُلُ الْخَلَاءَ، فَأَحْمِلُ أَنَا وَغُلَامٌ نَحْوِي إِدَاوَةً مِنْ مَاءٍ وَعَنَزَةً فَيَسْتَنْجِي بِالْمَاءِ.
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैंः अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो मैं और मेरे जैसा एक और लड़का पानी का बरतन और एक छोटी-सी बरछी लेकर साथ हो जाते। चुनांचे आप उस पानी से इस्तिंजा (पवित्रता प्राप्त) करते।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सेवक अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) बयान करते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब शौच के स्थान पर जाते, तो वह और उनके साथ एक और लड़का आपके लिए चमड़े के बरतन में इस्तिंजा का पानी लेकर जाते, इसी तरह एक छोटी-सी बरछी भी लेकर जाते, जिसे ज़मीन पर गाड़ देते और उसपर चादर या इस तरह की कोई ओर चीज़ डाल देते, जो गुज़रने वालों की नज़र से बचाने का काम करती। साथ ही यदि नमाज़ पढ़ने का इरादा होता, तो वह सुतरा का भी काम देती।

हवाला

صحيح البخاري (1/ 42) (152). صحيح مسلم (1/ 227) (271). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص40). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 43). الإفهام في شرح عمدة الأحكام، لابن باز (ص84).

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मैं इसलिए नहीं रो रही हूँ कि मुझे यह मालूम नहीं कि अल्लाह के पास जो कुछ है, वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए उत्तम है, बल्कि इसलिए रो रही हूँ कि आकाश से वह्य उतरने का सिलसिला बंद हो गया है। इस तरह, उन्होंने दोनों को रोने पर विवश कर दिया और वह भी उनके साथ रोने लगे।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: قَال أَبُو بَكر لِعُمَر رضي الله عنهما بَعْدَ وَفَاةِ رَسُول الله صلى الله عليه وسلم : انْطَلِق بِنَا إِلَى أُمِّ أَيمَنَ -رَضِي الله عنها- نَزُورُهَا كَمَا كَانَ رَسول الله صلى الله عليه وسلم يَزُورُها، فَلَمَّا انتَهَيَا إِلَيهَا، بَكَت، فَقَالاَ لَهَا: مَا يُبكِيك؟ أَمَا تَعْلَمِين أَنَّ ما عِنْد الله خَيرٌ لِرَسول الله صلى الله عليه وسلم ؟ فَقَالَت: مَا أَبْكِي أَنْ لاَ أَكُون أَعلَم أَنَّ مَا عِندَ الله تعالى خَيرٌ لِرَسُول الله صلى الله عليه وسلم ، وَلَكِن أَبكِي أَنَّ الوَحي قَدْ انْقَطَع مِنَ السَّمَاء؛ فَهَيَجَتْهُمَا عَلَى البُكَاء؛ فَجَعَلاَ يَبْكِيَان مَعَهَا.
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मृत्यु के बाद अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) ने उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) से कहाः आओ, हम उम्मे ऐमन के पास चलें। उन्हें देखने जाएँ, जैसे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उन्हें देखने जाया करते थे। जब दोनों उनके पास पहुँचे, तो वह रो पड़ीं। दोनों ने उनसे पूछा कि आप क्यों रो रही हैं? क्या आपको मालूम नहीं कि अल्लाह के पास जो कुछ है, वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए उत्तम है? तो उन्होंने कहाः मैं इसलिए नहीं रो रही हूँ कि मुझे यह मालूम नहीं कि अल्लाह के पास जो कुछ है, वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए उत्तम है, बल्कि इसलिए रो रही हूँ कि आकाश से वह्य उतरने का सिलसिला बंद हो गया है। इस तरह, उन्होंने दोनों को रोने पर विवश कर दिया और वह भी उनके साथ रोने लगे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الدمام، الطبعة: الأولى 1415هـ. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، الطبعة: الأولى 1428هـ. شرح رياض الصالحين، محمد بن صالح العثيمين، دار الوطن، الرياض، الطبعة: 1426هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الرابعة عشر 1407هـ، 1987م. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423 هـ.

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मैंने देखा कि आप क़िबले के अतिरिक्त किसी और दिशा की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ रहे हैं? तो उन्होंने जवाब दियाः यदि मैंने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ऐसा करते न देखा होता, तो ऐसा न करता।

عن أنس بن سيرين قال: «اسْتَقبَلنَا أَنَسًا حِين قَدِم مِن الشَّام، فَلَقِينَاه بِعَينِ التَّمرِ، فَرَأَيتُهُ يُصَلِّي على حِمَار، وَوَجهُهُ مِن ذَا الجَانِب -يعني عن يَسَارِ القِبلَة- فقلت: رَأَيتُك تُصَلِّي لِغَيرِ القِبلَة؟ فقال: لَولاَ أنِّي رَأيتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يَفْعَلُه ما فَعَلتُه».
अनस बिन सीरीन कहते हैं कि अनस (रज़ियल्लाहु अंहु) की शाम प्रांत से वापसी के अवसर पर हमने उनका स्वागत किया। हम उनसे ऐन-अत-तमर नामी स्थान में मिले। मैंने उनको देखा कि गधे पर सवार होकर नमाज़ पढ़ रहे हैं और उनका चेहरा इस ओर (अर्थात क़िब्ले के दाहिनी ओर) है। मैंने उनसे कहाः मैंने देखा कि आप क़िबले के अतिरिक्त किसी और दिशा की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ रहे हैं? तो उन्होंने जवाब दियाः यदि मैंने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ऐसा करते न देखा होता, तो ऐसा न करता।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) शाम आए। चूँकि वह एक प्रतिष्ठित एवं ज्ञानवान सहाबी थे, इसलिए लोग उनके स्वागत के लिए निकले। सहीह मुस्लिम की रिवायत में यही है कि "शाम आए", लेकिन उसका अर्थ हैः "जब वह शाम आए थे, तो वापसी के समय हम उनके स्वागत के लिए निकले।" यहाँ वापसी की बात का उल्लेख मालूम होने के कारण नहीं किया गया। क्योंकि जब वह शाम से आ रहे थे, तो वे उनसे मिलने के लिए बसरा से निकले थे। वर्णनकर्ता, (जो खुद भी स्वागत करने वालों में शामिल थे), कहते हैं कि उन्होंने अनस बिन मालिक को देखा कि वे गधे पर सवार होकर नमाज़ पढ़ रहे हैं और क़िब्ला उनकी दाईं जानिब है। अतः इस विषय में उनसे पूछ ही डाला। चुनांचे वह बोले कि उन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ऐसा करते देखा है। यदि उन्होंने आपको ऐसा करते न देखा होता, तो ऐसा न करते।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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मैंने अंसारियों को अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक ऐसा आदरपूर्ण व्यवहार करते देखा है कि मैंने क़सम खा ली है कि जब भी उनमें से किसी के साथ रहूँगा, तो उसकी सेवा करूँगा।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: خَرَجتُ معَ جَرِير بنِ عَبدِ الله البَجَلِي رضي الله عنه في سَفَرٍ، فَكَانَ يَخْدُمُنِي، فقُلتُ لَهُ: لا تفْعَل، فقَال: إِنِّي قَدْ رَأَيتُ الأَنْصَارَ تَصْنَعُ بِرَسُولِ الله صلى الله عليه وسلم شَيئًا آلَيتُ عَلَى نَفْسِي أَنْ لاَ أَصْحَبَ أَحدًا مِنْهُم إِلاَّ خَدَمْتُه.
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैं जरीर बिन अब्दुल्लाह बजली (रज़ियल्लाहु अंहु) के साथ एक यात्रा में निकला, तो वह मेरी सेवा करने लगे। मैंने उनसे कहा कि ऐसा न करें, तो उन्होंने कहाः मैंने अंसारियों को अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक ऐसा आदरपूर्ण व्यवहार करते देखा है कि मैंने क़सम खा ली है कि जब भी उनमें से किसी के साथ रहूँगा, तो उसकी सेवा करूँगा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. رياض الصالحين، للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، ط1، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، دار طوق النجاة، (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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मैंने अपने मन में सोचा कि आज मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का द्वारपाल बनने का सौभाग्य प्राप्त करूँगा। इतने में अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) आए और दरवाज़ा खटखटाया। मैंने कहाः कौन हैं? तो फ़रमायाः अबू बक्र। मैंने कहाः तनिक रुकिए। फिर मैं आपके पास गया और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) अनुमति माँग रहे हैं। आपने फ़रमायाः "उन्हें अनुमति दो तथा जन्नत की शुभ सूचना भी दो।"

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه أَنَّهُ تَوَضَّأ في بيتِهِ، ثُمَّ خَرَج، فقَال: لَأَلْزَمَنَّ رسُول الله صلى الله عليه وسلم ولَأَكُونَنَّ مَعَهُ يَومِي هَذَا، فَجَاءَ الْمَسْجِدَ، فَسَألَ عَنِ النبيِّ -صلَّى الله عليه وسلَّم- فَقَالُوا وَجَّهَ هَاهُنَا، قال: فَخَرَجْتُ عَلَى أَثَرِهِ أَسأَلُ عنْهُ، حتَّى دخَلَ بِئْرَ أَرِيسٍ، فَجَلَستُ عِندَ البَابِ حتَّى قَضَى رسُولُ الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- حَاجَتَهُ وَتَوَضَّأ، فَقُمتُ إِلَيهِ، فَإِذَا هُوَ قَدْ جَلَسَ عَلَى بِئْرِ أَرِيسٍ وَتَوَسَّطَ قُفَّهَا، وكَشَفَ عَنْ سَاقَيهِ وَدلَّاهُمَا فِي البِئرِ، فَسَلَّمتُ علَيه ثُمَّ انْصَرَفْتُ، فَجَلَسْتُ عِند البَابِ، فقُلتُ: لأَكُونَنَّ بَوَّابَ رسُول الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- اليَومَ، فجَاءَ أَبُو بَكر -رضِيَ الله عنْهُ- فَدَفَعَ البَابَ، فقُلتُ: مَنْ هَذَا؟ فَقَالَ: أَبُو بَكْرٍ، فقُلتُ: عَلَى رِسْلِكَ، ثُمَّ ذَهَبتُ، فَقُلْتُ: يَا رسُولَ الله، هَذَا أبُو بكرٍ يَسْتَأذِنُ، فقَالَ: «ائْذَنْ لَهُ وَبَشِّرْهُ بِالجَنَّةِ» فَأَقْبَلْتُ حتَّى قُلتُ لَأَبِي بَكْرٍ: ادْخُلْ وَرَسُولُ الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- يُبَشِّرُكَ بِالْجَنَّةِ، فَدَخَلَ أَبُو بَكرٍ حَتَّى جَلَسَ عَن يَمِينِ النبيِّ -صلَّى الله عليه وسلَّم- مَعَهُ فِي القُفِّ، ودَلَّى رِجْلَيهِ فِي البِئْرِ كَمَا صَنَعَ رَسُولُ الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- وَكَشَفَ عَنْ سَاقَيهِ، ثُمَّ رَجَعْتُ وَجَلَسْتُ، وَقَدْ تَرَكْتُ أَخِي يَتَوَضَّأ وَيَلْحَقُنِي، فَقُلْتُ: إِنْ يُرِدِ اللهُ بِفُلاَنٍ - يُريِدُ أَخَاهُ - خَيرًا يَأتِ بِهِ، فَإِذَا إِنسَانٌ يُحَرِّكُ البَّابَ، فقُلتُ: مَنْ هَذَا؟ فقَالَ: عُمَرُ بن الخَطَّابِ، فقُلتُ: عَلَى رِسْلِكَ، ثُمَّ جِئْتُ إِلَى رسُول الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- فَسَلَّمْتُ عَلَيهِ وقُلْتُ: هَذَا عُمَرُ يَسْتَأْذِنُ؟ فَقَال: «ائْذَنْ لَهُ وَبَشِّرْهُ بِالجَنَّةِ» فَجِئْتُ عُمَرَ، فَقُلتُ: أَذِنَ وَيُبَشِّرُكَ رَسُولُ الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- بِالجَنَّةِ، فَدَخَلَ فَجَلَسَ مَعَ رسُولِ الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- فِي القُفِّ عَنْ يَسَارِهِ وَدَلَّى رِجْلَيهِ فِي البِئْرِ، ثُمَّ رَجَعْتُ فَجَلَسْتُ، فَقُلتُ: إِن يُرِدِ اللهُ بِفُلاَنٍ خَيرًا -يعنِي أَخَاهُ- يَأتِ بِهِ، فَجَاءَ إِنسَانٌ فَحَرَّكَ البَابَ، فقُلتُ: مَنْ هَذَا؟ فقَالَ: عُثمَانُ بنُ عَفَّان، فقُلتُ: عَلَى رِسْلِكَ، وَجِئتُ النبِيَّ -صلَّى الله عليه وسلَّم- فَأَخبَرتُهُ، فقَالَ: «ائْذَنْ لَهُ وَبَشِّرهُ بِالجَنَّةِ مَعَ بَلوَى تُصِيبُهُ» فَجِئتُ، فقُلتُ: ادْخُل وَيُبَشِّرُكَ رسُول الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- بِالجَنَّةِ مَعَ بَلوَى تُصِيبُكَ، فَدَخَلَ فَوَجَدَ القُفَّ قَدْ مُلِئَ، فَجَلَسَ وِجَاهَهُم مِنَ الشِقِّ الآخَرِ. قال سعيد بنُ الْمُسَيِّبِ: فَأَوَّلْتُهَا قُبُورَهُم. وزاد في رواية: وَأَمَرَنِي رسُول الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- بِحفظِ البابِ، وفيها: أنَّ عُثمَانَ حِينَ بَشَّرَهُ حَمِدَ الله -تَعَالَى-، ثُمَّ قَالَ: اللهُ الْمُسْتَعَانُ.
अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि उन्होंने अपने घर में वज़ू किया और फिर यह कहते हुए निकले कि मैं आज दिन भर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ रहूँगा। चुनांचे मस्जिद आए और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के बारे में पूछा, तो लोगों ने कहा कि आप उधर गए हैं। वह कहते हैंः मैं आपके बारे में पूछते हुए आपकी तलाश में निकल पड़ा, यहाँ तक कि आप अरीस नामी कुएँ के पास गए। मैं कुएँ वाले बाग़ के द्वार पर बैठ गया। जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी हाजत पूरी कर चुके और वज़ू कर लिया, तो मैं आपके पास आया। देखा कि आप अरीस कुएँ की मुंडेर के बीच मे बैठे हैं और अपनी पिंडलियों को खोलकर कुएँ में पाँव लटकाए हुए हैं। मैं आपको सलाम करके वापस आ गया और द्वार के पास बैठ गया। मैंने अपने मन में सोचा कि आज मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का द्वारपाल बनने का सौभाग्य प्राप्त करूँगा। इतने में अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) आए और दरवाज़ा खटखटाया। मैंने कहाः कौन हैं? तो फ़रमायाः अबू बक्र। मैंने कहाः तनिक रुकिए। फिर मैं आपके पास गया और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) अनुमति माँग रहे हैं। आपने फ़रमायाः "उन्हें अनुमति दो तथा जन्नत की शुभ सूचना भी दो।" मैं आया और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) से कहाः ऐ अबू बक्र, अंदर जाईए तथा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आपको जन्नत की शुभ सूचना दी है। चुनांचे अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) अंदर गए और आपके साथ मुंडेर पर आपकी दाएँ ओर बैठ गए और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ही की तरह दोनों पिंडलियों को खोलकर दोनों पाँव कुएँ में लटका दिए। फिर मैं वापस आकर बैठ गया। चूँकि मैं अपने भाई को वज़ू करते हुए छोड़ आया था और उसे भी मेरे पीछे आना था, इसलिए दिल में सोचा कि यदि अल्लाह अमुक (उनका आशय अपने भाई से था) के साथ भलाई चाहता है, तो उसे ले आएगा। इसी बीच किसी ने द्वार खटखटाया। मैंने कहाः कौन हैं? कहाः उमर बिन ख़त्ताब। मैंने कहाः ज़रा रुकिए। फिर मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास गया, सलाम किया और कहाः उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) अनुमति माँग रहे हैं। आपने फ़रमायाः अनुमति दो और जन्नत की शुभ सूचना सुना दो। मैंने उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास वापस आकर कहाः अनुमति दी है तथा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आपको जन्नत की शुभ सूचना दे रहे हैं। चुनांचे उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) अंदर गए और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ मुंडेर पर आपकी बाएँ जानिब बैठ गए और दोनों पाँव कुएँ में लटका दिए। फिर मैं वापस आकर बैठ गया और सोचा कि यदि अल्लाह अमुक (उनका आशय़ अपने भाई से था) के साथ भलाई का इरादा करे, तो उसे ले आएगा। इतने में एक आदमी आए और द्वार हिलाया। मैंने कहाः कौन हैं? उत्तर मिलाः उसमान बिन अफ़्फ़ान। मैंने कहाः ज़रा रुकिए। फिर मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास गया और बताया, तो फ़रमायाः अनुमति दो और उन्हें जन्नत की शुभ सूचना सुना दो, मगर एक आज़माइश के साथ, जिसका सामना उनको करना पड़ेगा। मैं आया और बोलाः अंदर जाईए और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आपको जन्नत की शुभ सूचना दे रहे हैं, एक आज़माइश के साथ, जिसका सामना आपको करना पड़ेगा। वह अंदर गए, तो देखा कि मुंडेर भर गई है। अतः, उनके सामने दूसरे किनारे पर बैठ गए। सईद बिन मुसय्यिब कहते हैं कि मैंने इसका अर्थ उनकी क़ब्रों से लिया। एक अन्य रिवायत में यह इज़ाफ़ा हैः अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मुझे द्वार की सुरक्षा करने का आदेश दिया। तथा उसी रिवायत में हैः उसमान (रज़ियल्लाहु अंहु) को जब जन्नत की शुभ सूचना दी, तो अल्लाह (तआला) की प्रशंसा की और फिर फ़रमायाः अल्लाह ही सहायक है।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415ه. تطريز رياض الصالحين للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. شرح رياض الصالحين للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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मैं इस मामले में कोई कोताही नहीं करूँगा कि तुम्हें वैसी ही नमाज़ पढ़ाऊँ, जैसी अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें नमाज़ पढ़ाया करते थे।

عن أنس رضي الله عنه أنه قال: «إني لا آلُو أن أُصَلِّيَ بكم كما كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي بنا، قال ثابت فكان أَنَس يصنع شيئا لا أراكم تصنعونه: كان إذا رفع رأسه من الركوع انْتَصَبَ قائما، حتى يقول القائل: قد نَسِيَ، وإذا رفع رأسه من السَّجْدَةِ مكث، حتى يقول القائل: قد نَسِيَ».
अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि उन्होंने कहाः मैं इस मामले में कोई कोताही नहीं करूँगा कि तुम्हें वैसी ही नमाज़ पढ़ाऊँ, जैसी अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें नमाज़ पढ़ाया करते थे। (इस हदीस के वर्णनकर्ता साबित कहते हैंः) चुनांचे अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- एक ऐसा कार्य करते थे, जो तुम करते हुए नज़र नहीं आते। जब रुकू से सिर उठाते, तो इतनी देर तक सीधे खड़े रहते कि कहने वाला कहताः आप भूल गए हैं। और जब सजदे से सिर उठाते, तो ईतनी देर ठहरते कि कहने वाला कहताः आप भूल गए हैं।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहा करते थे कि मैं पूरी कोशिश करूँगा कि तुम्हें उसी तरह नमाज़ पढ़ाऊँ, जैसे रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमें पढ़ाया करते थे। ताकि तुम उसका अनुसरण करते हुए उसी जैसी नमाज़ पढ़ सको। साबित बुनानी कहते हैंः अनस (रज़ियल्लाहु अंहु) नमाज़ को संपूर्ण एवं सुंदर बनाने के लिए एक ऐसा काम करते थे, जो मैं तुम्हें करते हुए नहीं देखता हूँ। वह रुकू के बाद देर तक खड़े रहते और सजदे के बाद देर तक बैठे रहते। जब रुकू से सिर उठाते, तो सीधे खड़े रहते, यहाँ तक कि देर तक खड़े रहना देखकर कहने वाला कहताः आप भूल गए हैं कि रुकू तथा सजदे के बीच क़याम की हालत में हैं। और जब सजदे से सिर उठाते, तो इतनी देर बैठे रहते कि लंबी बैठक को देखकर कहने वाला कहताः आप भूल गए हैं।

हवाला

تيسير العلام، للبسام، الناشر: مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة العاشرة، 1426هـ - 2006م. تنبيه الأفهام، للعثيمين، طبعة مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة الأولى، 1426ه. الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري، طبعة دار الفكر، دمشق، الأولى، 1381ه. صحيح البخاري، لأبو عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد زهير بن ناصر الناصر، الناشر: دار طوق النجاة، الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار المنهاج، القاهرة، مصر، الطبعة الأولى.

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तुम लोग कुछ ऐसे कार्य करते हो, जो तुम्हारी नज़र में बाल के बराबर भी महत्व नहीं रखते। जबकि हम उन्हें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में विनाशकारी गुनाहों में से समझते थे।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: «إنكم لتعملون أعمالا هي أَدَقُّ في أعينكم من الشَّعْرِ، كنا نَعُدُّهَا على عهد رسول الله - صلى الله عليه وسلم - من المُوبِقَاتِ».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह फरमाते हैंः तुम लोग कुछ ऐसे कार्य करते हो, जो तुम्हारी नज़र में बाल के बराबर भी महत्व नहीं रखते। जबकि हम उन्हें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में विनाशकारी गुनाहों में से समझते थे।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415ه. تطريز رياض الصالحين للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423 هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة،بيروت، 1425 ه. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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तुम लोग मेरे बाद भेदभाव का सामना करोगे। अतः, सब्र से काम लेना, यहाँ तक कि हौज़ पर मुझसे मिलो।

عن أسيد بن حضير وأنس بن مالك رضي الله عنهما أنَّ رجُلاً من الأنصار، قال: يا رسول الله، ألاَ تَستَعمِلُنِي كما استَعمَلت فُلانًا، فقال: «إِنَّكُم سَتَلقَون بَعدِي أَثَرَة فَاصبِرُوا حَتَّى تَلقَونِي على الحَوض».
उसैद बिन हु़ज़ैर तथा अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि एक अंसारी ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, आप मुझे कोई प्रशासनिक ज़िम्मेवारी नहीं देंगे, जैसा कि आपने अमुक को दिया है? तो आपने फरमायाः "तुम लोग मेरे बाद भेदभाव का सामना करोगे। अतः, सब्र से काम लेना, यहाँ तक कि हौज़ पर मुझसे मिलो।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. الشرح الممتع على زاد المستقنع، لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، ط1، دار ابن الجوزي، 1422 - 1428هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، ط1، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، دار طوق النجاة، (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407ه.

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34 में से 8
34 हदीसें
  1. अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो मैं और मेरे जैसा एक और लड़का पानी का बरतन और एक छोटी-सी बरछी लेकर साथ हो जाते। तब आप उस पानी से इस्तिंजा (पवित्रता प्राप्त) करते।
  2. मैं इसलिए नहीं रो रही हूँ कि मुझे यह मालूम नहीं कि अल्लाह के पास जो कुछ है, वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए उत्तम है, बल्कि इसलिए रो रही हूँ कि आकाश से वह्य उतरने का सिलसिला बंद हो गया है। इस तरह, उन्होंने दोनों को रोने पर विवश कर दिया और वह भी उनके साथ रोने लगे।
  3. मैंने देखा कि आप क़िबले के अतिरिक्त किसी और दिशा की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ रहे हैं? तो उन्होंने जवाब दियाः यदि मैंने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ऐसा करते न देखा होता, तो ऐसा न करता।
  4. मैंने अंसारियों को अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक ऐसा आदरपूर्ण व्यवहार करते देखा है कि मैंने क़सम खा ली है कि जब भी उनमें से किसी के साथ रहूँगा, तो उसकी सेवा करूँगा।
  5. मैंने अपने मन में सोचा कि आज मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का द्वारपाल बनने का सौभाग्य प्राप्त करूँगा। इतने में अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) आए और दरवाज़ा खटखटाया। मैंने कहाः कौन हैं? तो फ़रमायाः अबू बक्र। मैंने कहाः तनिक रुकिए। फिर मैं आपके पास गया और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) अनुमति माँग रहे हैं। आपने फ़रमायाः "उन्हें अनुमति दो तथा जन्नत की शुभ सूचना भी दो।"
  6. मैं इस मामले में कोई कोताही नहीं करूँगा कि तुम्हें वैसी ही नमाज़ पढ़ाऊँ, जैसी अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें नमाज़ पढ़ाया करते थे।
  7. तुम लोग कुछ ऐसे कार्य करते हो, जो तुम्हारी नज़र में बाल के बराबर भी महत्व नहीं रखते। जबकि हम उन्हें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में विनाशकारी गुनाहों में से समझते थे।
  8. तुम लोग मेरे बाद भेदभाव का सामना करोगे। अतः, सब्र से काम लेना, यहाँ तक कि हौज़ पर मुझसे मिलो।
  9. अल्लाह की क़सम, अल्लाह तुम्हारे द्वारा यदि एक भी व्यक्ति को हिदायत दे दे, तो यह तुम्हारे लिए लाल ऊँटों से उत्तम है।
  10. दो सहाबी नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास से अंधेरी रात में निकले, तो उनके साथ आगे-आगे दो चिराग जैसे चलने लगे।
  11. मैंने उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) को जब भी किसी चीज़ के बारे में 'मैं समझता हूँ कि यह ऐसी है' कहते सुना, तो वह वैसी ही निकली।
  12. अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- की माँ ने कहाः देखो, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का भेद किसी के सामने न खोलना। अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- ने कहाः अल्लाह की क़सम, यदि मैं किसी को वह राज़ की बात बताता तो साबित! तुझे अवश्य बताता।
  13. इसने कार्य थोड़ा किया और प्रतिफल बड़ा प्रदान किया गया।
  14. कुछ लोग अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहा कि हमारे साथ कुछ लोगों को भेजें, जो हमें क़ुरआन और सुन्नत सिखाएँ। अतः आपने उनकी ओर सत्तर अंसारियों को भेजा, जिन्हें 'अल-क़ुर्रा' (क़ुरआन पढ़ने वाले) कहा जाता था। उनमें मेरे मामा ह़राम भी शामिल थे।
  15. अल्लाह तआला ने मुझे आदेश दिया है कि तेरे सामने 'لم يكن الذين كفروا...' पढ़ूँ।
  16. ऐ साद बिन मुआज़! काबा के रब की क़सम, मुझे उहुद पर्वत के निकट से जन्नत की सुगंध आ रही है।
  17. बहुत ख़ूब, यह तो बहुत लाभदायक माल है। यह तो वाकई लाभदायक धन है। जो कुछ तुमने कहा, उसे मैंने सुन लिया। मेरी राय यह है कि तुम इसे अपने रिश्तेदारों में बाँट दो।
  18. ऐ अंसारियो! क्या मैंने तुम्हें सत्य की राह से भटका हुआ नहीं पाया तो अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा सीधा रास्ता दिखाया? तुम बिखरे हुए नहीं थे कि अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा आपस में जोड़ दिया? तुम कंगाल नहीं थे कि अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा धनी बनाया?
  19. एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से यात्रा के दौरान रोज़ा रखने के संबंध में प्रश्न किया तो आपने फ़रमाया: यदि चाहो तो रोज़ा रखो और अगर चाहो तो न रखो।
  20. जिबरील (अलैहिस्सलाम), अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर बोले कि आप लोग बद्र के युद्ध में शामिल रहने वाले सहाबा को अपने अंदर कैसा मानते हैं? आपने उत्तर दियाः हम उन्हें सबसे उत्तम मुसलमानों में शुमार करते हैं।
  21. कूफ़ा वालों ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के यहाँ साद बिन अबू वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) की शिकायत की, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उनको हटाकर अम्मार बिन यासिर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) को उनका हाकिम बना दिया।
  22. उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने पहले हिजरत करने वाले मुहाजिरों के लिए पेंशन की राशि निर्धारित की।
  23. ज़ुबैर बिन अव्वाम -रज़ियल्लाहु अन्हु- की मृत्यु और उनका क़र्ज़ अदा करने का क़िस्सा।
  24. जब यमन से कुछ लोग आए, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः यमन वाले तुम्हारे पास आए हैं
  25. फ़रिश्ते अभी तक उनपर अपने परों से छाया किए हुए हैं।
  26. क्या मैं उस व्यक्ति से लज्जा न करूँ, जिससे फ़रिश्ते लज्जा करते हैं?
  27. कोई ऐसा व्यक्ति जहन्नम हरगिज़ नहीं जाएगा, जो बद्र एवं हुदैबिया में शामिल रहा हो।
  28. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अबू बक्र और उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से फ़रमाया : "यह दोनों नबियों और रसूलों को छोड़ तमाम अगले और पिछले अधेड़ उम्र जन्नतियों के सरदार हैं।
  29. अल्लाह ने सत्य को उमर की ज़ुबान और दिल में रख दिया है।
  30. हर उम्मत का एक 'अमीन' (जिसे अमानतदारी के कारण अन्य लोगों के मुक़ाबले में अधित ख्याति प्राप्त हो) होता है, और हमारी इस उम्मत का 'अमीन' अबू उबैदा बिन जर्राह (रज़ियल्लाहु अन्हु) है।
  31. उहुद युद्ध के दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- दो-दो कवच पहने हुए थे। आप एक चट्टान पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन चढ़ नहीं पा रहे थे। ऐसे में, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने तलहा -रज़ियल्लाहु अन्हु- को अपने नीचे बिठाया, उनके ऊपर चढ़े और चट्टान पर सीधे खड़े हो गए। वह कहते हैं कि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते सुना हैः " तलहा (जन्नत का हक़दार बन गया।"
  32. हर नबी का एक हवारी (निष्ठावान सहायक) होता है और मेरा हवारी ज़ुबैर है।
  33. ज़ुबैर मेरा फुफेरा भाई और मेरी उम्मत में मेरा हवारी (निष्ठावान सहायक) है।
  34. अल्लाह के बंदों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो यदि अल्लाह पर क़सम खा लें, तो अल्लाह उसे पूरा कर देता है।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com