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तशरीह के साथ हदीसें

रिश्तों-नातों को निभाने की फ़ज़ीलतें

2 हदीसें

अगर तुम्हारी बातें सही हैं, जो तुम कह रहे हो, तो मानो तुम उनके मुँह में गरम राख ठूँस रहे हो। तुम जब तक इसे जारी रखोगे, अल्लाह की ओर से तुम्हारे साथ उनके विरुद्ध एक सहायक मौजूद रहेगा।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه: أَنَّ رَجُلًا قَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ إِنَّ لِي قَرَابَةً أَصِلُهُمْ وَيَقْطَعُونِي، وَأُحْسِنُ إِلَيْهِمْ وَيُسِيئُونَ إِلَيَّ، وَأَحْلُمُ عَنْهُمْ وَيَجْهَلُونَ عَلَيَّ، فَقَالَ: «لَئِنْ كُنْتَ كَمَا قُلْتَ، فَكَأَنَّمَا تُسِفُّهُمُ الْمَلَّ وَلَا يَزَالُ مَعَكَ مِنَ اللهِ ظَهِيرٌ عَلَيْهِمْ مَا دُمْتَ عَلَى ذَلِكَ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि एक व्यक्ति ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे कुछ रिश्तेदार हैं, मैं उनसे रिश्ता निभाता हूँ और वे मुझसे रिश्ता काटते हैं। मैं उनसे अच्छा व्यवहार करता हूँ और वे मेरे साथ बुरा बर्ताव करते हैं। मैं उन्हें सहनशीलता दिखाता हूँ और वे अशिष्टता का प्रदर्शन करते हैं। तो आपने कहा : "अगर तुम्हारी बातें सही हैं, जो तुम कह रहे हो, तो मानो तुम उनके मुँह में गरम राख ठूँस रहे हो। तुम जब तक इसे जारी रखोगे, अल्लाह की ओर से तुम्हारे साथ उनके विरुद्ध एक सहायक मौजूद रहेगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के यहाँ आकर शिकायत की कि उसके कुछ रिश्तेदार हैं, जिनके साथ वह अच्छा व्यवहार करता है, लेकिन वे उसके साथ बुरा व्यवहार करते हैं। वह रिश्ता जोड़ता है उनके पास आता जाता है लेकिन वे उसका साथ रिश्ता काटते हैं। वह उनके साथ प्यार और ईमानदारी से पेश आता है है लेकिन वे उसके साथ अन्याय और बेरहमी का बर्ताव करते हैं। वह सहनशीलता दिखाता है तथा क्षमा करता है लेकिन वे उसके साथ नासमझी की वजह से बुरे शब्दों और कामों से पेश आते हैं। ऐसे में उसकी ओर से उनके साथ रिश्ते-नातों का लिहाज़ रखने का सिलसिला जारी रहना चाहिए या नहीं? अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया: अगर तुम्हारी बात सच है, तो तुम उन्हें उनकी ही नज़रों में अपमानित और ज़लील कर रहे हो। उनकी ग़लत हरकतों के बावजूद उन पर ढेर सारा उपकार करके, गोया तुम उन्हें गर्म राख खिला रहे हो। जब तक तुम उनके प्रति अपना उपकार जारी रखोगे और वे तुम्हारे प्रति अपना बुरा व्यवहार जारी रखेंगे, अल्लाह की ओर से तुम्हारे साथ एक सहायक नियुक्त होगा, जो उनके विरुद्ध तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हें उनके अत्याचार से बचाएगा।

फ़ायदे
  1. दुर्व्यवहार के बदले में अगर उपकार किया जाए, तो ग़लती करने वाले के सुधरने की संभावना रहती है, जैसा कि उच्च एवं महान अल्लाह ने कहा है : "आप दूर करें (बुराई को) उसके द्वारा, जो सर्वोत्तम हो। तो सहसा आपके तथा जिसके बीच बैर हो, मानो वह हार्दिक मित्र हो गया।"
  2. अल्लाह के आदेश का पालन करना, भले ही रास्ते में कुछ कठिनाइयाँ आएँ, एक मोमिन के लिए अल्लाह की मदद प्राप्त करने का एक साधन है।
  3. रिश्तेदारों से रिश्ते तोड़ने से इस दुनिया में पीड़ा और कष्ट होता है और आख़िरत में पाप और कठोर दंड मिलता है।
  4. एक मुसलमान को अल्लाह की प्रसन्नता पाने के लिए अच्छे कर्म करना चाहिए और लोगों के उत्पीड़न और उनके रिश्ता-नाता काटने की वजह से अपनी अच्छी आदतों को नहीं छोड़ना चाहिए।
  5. सच्चा रिश्ता-नाता निभाने वाला वह नहीं है जो अच्छा व्यवहार करने वाले रिश्तेदार के साथ अच्छा व्यवहार करे। सच्चा रिश्ता-नाता निभाने वाला वह है जो दुर्व्यवहार करने वाले रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार करता हो।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 1982) (2558). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (9/ 220). بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (1/ 698). نزهة المتقين، لمجموعة من الباحثين (1/ 539). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 188).

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जन्नत में वह व्यक्ति प्रवेश नहीं करेगा, जो रिश्ते-नातों को काटता हो।

عن جُبَير بن مُطْعِم رضي الله عنه أنه سمع النبي صلى الله عليه وسلم يقول: «لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ قَاطِعُ رَحِمٍ».
जुबैर बिन मुतइम रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना : "जन्नत में वह व्यक्ति प्रवेश नहीं करेगा, जो रिश्ते-नातों को काटता हो।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जिसने अपने रिश्तेदारों को उनके वाजिब अधिकारों से वंचित रखा, उनको कष्ट दिया या उनके साथ बुरा व्यवहार किया, वह इस बात का हक़दार है कि जन्नत में प्रवेश न करे।

फ़ायदे
  1. रिश्तेदारों से संबंध तोड़ना कबीरा गुनाह है।
  2. रिश्ते-नातों को निभाने का काम आम प्रचलन के अनुसार किया जाएगा। इसमें स्थानों, समयों और व्यक्तियों के अनुसार भिन्नता पाई जाती है।
  3. रिश्ते-नातों को निभाने का काम रिश्तेदारों का हाल जानने के लिए जाना, उनको सदक़ा देना, उनके साथ अच्छा व्यवहार करना, वे बीमार हो जाएँ तो हाल जानने के लिए जाना, उनको भलाई का आदेश देना तथा बुराई से रोकना आदि से होता है।
  4. रिश्ता जितने क़रीबी रिश्तेदार का तोड़ा जाएगा, गुनाह उतना ज़्यादा होगा।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 1981) (2556). صحيح البخاري (8/ 5) (5984). شرح النووي على مسلم (16/ 113). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (10/ 90). فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (6/ 277).

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यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com