अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि अल्लाह ने इस्लाम का उदाहरण एक ऐसे सीधे रास्ते से दिया है, जिसमें कहीं कोई टेढ़ापन नहीं है, इस रास्ते के दोनों तरफ दो दीवारें हैं, जो उसे दोनों तरफ़ से घेरी हुई हैं, इन दोनों दीवारों से मुराद अल्लाह की सीमाएँ हैं, इन दोनों दीवारों पर बीच-बीच में खुले द्वार हैं, जिनसे मुराद अल्लाह की हराम की हुई चीज़ें हैं, उन द्वारों पर पर्दे लटके हुए हैं, जो रास्ते से गुज़रने वाले को पता होने नहीं देते कि अंदर क्या है, रास्ते के आरंभ में एक पुकारने वाला है, जो लोगों का मार्गदर्शन करते हुए कहता है : रास्ते पर सीधे चलते रहो और इधर-उधर न भटको। यह पुकारने वाला अल्लाह की किताब है। एक और पुकारने वाला रास्ते के ऊपर नियुक्त है। रास्ते में चलने वाला जब भी किसी द्वार पर लटके पर्दे को थोड़ा-बहुत हटाना चाहता है, तो यह पुकारने वाला उसे डाँटता है और कहता है : तेरा बुरा हो, इसे न खोल। अगर इसे खोलेगा, तो इसमें घुस जाएगा और इसमें प्रवेश करने से खुद को रोक न सकेगा। यह पुकारने वाला हर मुसलमान के दिल में मौजूद अल्लाह का उपदेश देने वाला है।
- इस्लाम ही सच्चा धर्म है। यही सही रास्ता है, जो हमें जन्नत की ओर ले जाता है।
- अल्लाह की सीमाओं तथा उसकी हलाल एवं हराम की हुई चीज़ों का ख़्याल रखना ज़रूरी है और इनके बारे में कोताही करना विनाश का कारण बनता है।
- क़ुरआन की फ़ज़ीलत और उसपर अमल करने की प्रेरणा। इसमें हिदायत, नूर और सफलता है।
- अपने बंदों पर अल्लाह की रहमत, यही कारण है कि अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों के दिलों में एक ऐसी चीज़ रख दी है, जो उसे विनाश की ओर जाने से रोकती है।
- यह अल्लाह की रहमत है कि उसने अपने बंदों के लिए गुनाहों में पड़ने के मार्ग में बाधाएँ उत्पन्न कर दी हैं।
- शिक्षा का एक साधन बात को आसानी से समझाने के लिए उदाहरण देना भी है।
سنن الترمذي (4/ 539) (2859)، مسند أحمد (29/ 181، 183) (17634)، جامع العلوم والحكم (2/161)، فيض القدير (4/253)، التنوير شرح الجامع الصغير (7/100)، الفتح الرباني لترتيب مسند الإمام أحمد بن حنبل الشيباني (1/ 83).