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तशरीह के साथ हदीसें

“संदेह में डालने वाली चीज़ों को छोड़कर संदेह में न डालने वाली चीज़ों को अपनाओ।

عَنْ أَبِي مُـحَمَّدٍ الحَسَنِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ - سِبْطِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَيْحَانَتِهِ-، قَالَ: حَفِظْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «دَعْ مَا يَرِيبُك إلَى مَا لَا يَرِيبُكَ».
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के नवासे और प्रिय हसन बिन अली बिन अबू तालिब -रज़ियल्लाहु अनहुमा- कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से यह बात याद की है : “संदेह में डालने वाली चीज़ों को छोड़कर संदेह में न डालने वाली चीज़ों को अपनाओ।"
इसे तिर्मिज़ी एवं नसई ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ऐसी बातें कहने और ऐसे कार्य करने से दूर रहने का आदेश दिया है, जिनके बारे में संदेह हो कि वो निषिद्ध हैं या नहीं? हलाल हैं या हराम? इन्सान को ऐसी बातें और ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनके अच्छे और हलाल होने का विश्वास हो।

फ़ायदे
  1. मुसलमान पर लाज़िम है कि अपने तमाम मामलात की बुनियाद यक़ीन पर रखे और सूझ-बूझ एवं आगही के साथ दीन पर अमल करे।
  2. संदिग्ध चीज़ों में पड़ने की मनाही।
  3. अगर आप इत्मीनान और सुकून चाहते हैं, तो संदिग्ध चीज़ों से बचें।
  4. अल्लाह सर्वशक्तिमान अपने बन्दों के प्रति दयालु और कृपालु है, क्योंकि उसने उन्हें ऐसे काम करने का आदेश दिया है जो मन और दिल को शांति प्रदान करते हैं और उन्हें ऐसे काम करने से मना किया है जो बेचैनी और भ्रम का कारण बनते हैं।
हवाला

سنن النسائي (8/ 327) (5711). سنن الترمذي (4/ 286) (2518). مسند أحمد (3/ 248) (1723). التحفة الربانية في شرح الأربعين حديثًا النووية، لإسماعيل الأنصاري (ص29). شرح الأربعين النووية، لابن عثيمين (ص153). فتح القوي المتين في شرح الأربعين وتتمة الخمسين للنووي وابن رجب (ص56).

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दो प्रमाणों के बीच टकराव तथा तरजीह

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