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तशरीह के साथ हदीसें

दावे तथा प्रमाण

7 हदीसें

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने कमरे के द्वार पर झगड़ने वालों की आवाज़ सुनी

عن أُمُّ سَلَمَة رضي الله عنها أن رسول الله صلى الله عليه وسلم سَمِعَ جَلَبَةَ خَصْمٍ بِبَابِ حُجْرَتِهِ، فَخَرَجَ إلَيْهِمْ، فقال: «ألا إنما أنا بشر، وإنما يأتيني الخصم، فلعل بعضكم أن يكون أبلغ من بعض؛ فَأَحْسِبُ أَنَّهُ صَادِقٌ؛ فَأَقْضِي لَهُ، فمن قضيت له بحق مسلم فإنما هي قطعة من نار، فَلْيَحْمِلْهَا أَوْ يَذَرْهَا».
उम्मे सलमा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने कमरे के द्वार पर कुछ झगड़ने वालों की आवाज़ सुनी, तो निकलकर उनके पास आए और फ़रमायाः "सुनो, मैं भी एक इनसान हूँ। मेरे पास झगड़ने वाले आते हैं। संभव है कि तुम में से कोई दूसरे के मुक़ाबले अपनी बात अधिक सफ़ाई से रखता हो और उसे सच्चा समझकर मैं उसके हक़ में फ़ैसला कर दूँ। अतः, जिसे मैंने किसी मुसलमान का हक़ दे दिया, वह दरअसल एक आग का टुकड़ा है। चाहे तो उसे उठा ले या चाहे तो छोड़ दे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने कमरे के द्वार पर कुछ लोगों का शोर और कोलाहल सुना, जो आपस में झगड़ रहे थे। अतः झगड़े का निपटारा करने के लिए बाहर आए और फ़रमाया : देखो, मैं भी तुम्हारी ही तरह एक इनसान हूँ। न तो मुझे परोक्ष का ज्ञान है और न मुझे गुप्त बातें बताई जाती हैं कि जान सकूँ कि कौन सच्चा है और कौन झूठा। मेरे पास लोग, अपने झगड़ों के निपटारे के लिए आते हैं और मेरा फ़ैसला दोनों पक्षों के प्रमाणों और क़समों पर आधारित होता है। ऐसे में संभव है कि तुममें से कोई अन्य की तुलना में स्पष्टता से बात रखने की क्षमता अधिक रखता हो और मैं उसे सच्चा समझकर उसी के हक़ में निर्णय कर दूँ, जबकि वास्तविक मामला कुछ और हो। अतः, जान लो कि मेरा निर्णय केवल ज़ाहिरी मामलों में होता है, बातिनी मामलों में नहीं और मेरा फ़ैसला कदापि किसी हराम को हलाल नहीं करता। इसलिए, जिसे मैं किसी दूसरे का अधिकार दे दूँ और उसे पता हो कि वह उसका अधिकार नहीं है, तो उसे मैं आग का एक टुकड़ा निकालकर दे रहा हूँ। अब यदि चाहे, तो उसे ल जाए और चाहे तो छोड़ दे। यानी किसी का अधिकार हड़पने का अंजाम स्वयं हड़ने वाले को भुगतना पड़ेगा और अल्लाह अत्याचारियों के घात में है।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام، إسماعيل بن محمد الأنصاري، دار الفكر، دمشق، الطبعة: الأولى 1381هـ. تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار علماء السلف، الطبعة: الثانية 1414هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم- لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.

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जिसने किसी मुसलमान का माल हड़पने के लिए झूठी क़सम खाई, वह अल्लाह से इस हाल में मिलेगा कि अल्लाह उससे सख़्त क्रोधित होगा।

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بنِ مَسْعُودٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ حَلَفَ عَلَى يَمِينٍ وَهُوَ فِيهَا فَاجِرٌ لِيَقْتَطِعَ بِهَا مَالَ امْرِئٍ مُسْلِمٍ، لَقِيَ اللَّهَ وَهُوَ عَلَيْهِ غَضْبَانُ». قَالَ: فَقَالَ الْأَشْعَثُ: فِيَّ وَاللَّهِ كَانَ ذَلِكَ؛ كَانَ بَيْنِي وَبَيْنَ رَجُلٍ مِنَ الْيَهُودِ أَرْضٌ، فَجَحَدَنِي، فَقَدَّمْتُهُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَلَكَ بَيِّنَةٌ؟» قُلْتُ: لَا. قَالَ: فَقَالَ لِلْيَهُودِيِّ: «احْلِفْ». قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، إِذَنْ يَحْلِفَ وَيَذْهَبَ بِمَالِي. فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى: {إِنَّ الَّذِينَ يَشْتَرُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ وَأَيْمَانِهِمْ ثَمَنًا قَلِيلًا}. إِلَى آخِرِ الْآيَةِ.
अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने किसी मुसलमान का माल हड़पने के लिए झूठी क़सम खाई, वह अल्लाह से इस हाल में मिलेगा कि अल्लाह उससे सख़्त क्रोधित होगा।" वर्णनकर्ता कहते हैं कि अशअस -रज़ियल्लाहु अनहु- ने फ़रमाया : यह बात दरअसल मेरे ही बारे में कही गई थी। हुआ यह कि मेरे एवं एक यहूदी के बीच एक ज़मीन को लेकर झगड़ा था। उसने मुझे ज़मीन देने से इनकार कर दिया, तो मैं मामले को अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास लेकर गया। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुझसे पूछा : "क्या तेरे पास कोई प्रमाण है?" मैंने उत्तर दिया : नहीं। आपने यहूदी से कहा : "तुम क़सम खाओ।" वह कहते हैं कि मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसा है तो यह क़सम खा लेगा और मेरा धन लेकर चला जाएगा। तो अल्लाह ने यह आयत उतारी : (निःसंदेह जो लोग अल्लाह के वचन तथा अपनी क़समों के बदले तनिक मूल्य प्राप्त करते हैं।) आयत के अन्त तक।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने किसी का धन हड़पने के लिए जान-बूझकर झूठी क़सम खाने से सावधान किया है और बताया है कि ऐसा व्यक्ति जब अल्लाह से मिलेगा, तो अल्लाह उससे सख़्त क्रोधित होगा। अशअस बिन क़ैस रज़ियल्लाहु अनहु ने इस हदीस का परिप्रेक्ष्य बयान करते हुए बताया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह बात इसलिए फ़रमाई कि उनके और एक यहूदी के बीच एक ज़मीन के मालिकाना अधिकार को लेकर झगड़ा था। दोनों निर्णय के लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास पहुँचे, तो आपने अशअस से कहा : तुम अपने दावा के पक्ष में प्रमाण प्रस्तुत करो। अगर तुम प्रमाण नहीं दे सके, तो तुम्हारा विरोधी क़सम खाकर बरी हो जाएगा। यह सुन अशअस ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! अगर ऐसा है, तो यहूदी अल्लाह का ख़ौफ़ खाए बिना क़सम खा लेगा और मेरा धन लेकर निकल जाएगा। चुनांचे इसी की पुष्टि के लिए अल्लाह ने यह आयत उतारी : निःसंदेह जो लोग अल्लाह के वचन (तथा अमानत की अदायगी से संबंधित ईमान वालों को दिए गए उसके आदेश) तथा (अल्लाह के नाम की) अपनी (झूठी) क़समों के बदले तनिक मूल्य प्राप्त करते हैं, उनका आख़िरत में कोई हिस्सा नहीं। न अल्लाह उनसे बात करेगा और न क़यामत के दिन (दया तथा उपकार की दृष्टि से) उनकी ओर देखेगा और न उनकी प्रशंसा करके उनके साफ़-सुथरे होने की घोषणा करेगा और न उन्हें (गुनाहों तथा गंदगियों से) पवित्र करेगा। तथा (उनके कर्मों के कारण) उनके लिए दुःखदायी यातना है।

फ़ायदे
  1. ग़लत तरीक़े से दूसरे का धन अपने लिए हलाल कर लेने की मनाही।
  2. मुसलमानों का हक़ मारना बहुत बड़ा पाप है। हक़ छोटा हो या बड़ा।
  3. प्रमाण मुद्दई को प्रस्तुत करना है। अगर वह इनकार कर दे, तो जिसके विरुद्ध दावा किया गया है, उसे क़सम खानी है।
  4. हक़ दो गवाहों से साबित होता है। अगर मुद्दई के पास प्रमाण न हो, तो जिसके विरुद्ध दावा किय गया है, उसे क़सम खानी होगी।
  5. किसी का हक़ छीनने के लिए झूठी क़सम खाना हराम तथा कबीरा गुनाह है, जिससे इन्सान अल्लाह के क्रोध तथा दंड का हक़दार बन जाता है।
  6. शासक को दूसरे फ़रीक़ को समझाना चाहिए, ख़ास तौर पर जब वह क़सम खाने जा रहा हो।
हवाला

صحيح البخاري (3/ 121) (2416). صحيح مسلم (1/ 123) (138). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (2/ 136). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص687). فتاوى اللجنة الدائمة - اللجنة الدائمة للبحوث العلمية والإفتاء (23/ 513).

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दो औरतें थीं। साथ में उनके बच्चे भी थे। इतने में भेड़िया आया और उनमें से एक के बच्चे को ले भागा।

عن أبي هريرة رضي الله عنه : أنه سمع رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: كانت امرأتان معهما ابناهما، جاء الذئب فذهب بابن إحداهما، فقالت لصاحبتها: إنما ذهب بابنك، وقالت الأخرى: إنما ذهب بابنك، فتحاكما إلى داود صلى الله عليه وسلم فقضى به للكبرى، فخرجتا على سليمان بن داود صلى الله عليه وسلم فأخبرتاه، فقال: ائتوني بالسكين أَشُقُّهُ بينهما، فقالت الصغرى: لا تفعل! رحمك الله، هو ابنها، فقضى به للصغرى.
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि उन्होंने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुनाः "दो औरतें थीं। साथ में उनके बेटे भी थे। इतने में भेड़िया आया और उनमें से एक के बच्चे को ले भागा। ऐेसे में एक ने दूसरी से कहा कि भेड़िया तेरे बच्चे को लेकर गया है, जबकि दूसरी ने कहा कि तेरे बच्चे को लेकर गया है। अंततः, दोनों मामला लेकर दाऊद- अलैहिस्सलाम- के पास पहुँचीं और उन्होंने बड़ी औरत के हक़ में निर्णय दिया। फिर दोनों सुलैमान बिन दाऊद- अलैहिस्सलाम- के पास गईं और घटना सुनाईं। उन्होंने कहाः छुरी लाओ, मैं बच्चे को काट कर दोनों में बाँट देता हूँ। इसपर छोटी ने कहाः ऐसा न करें, अल्लाह आप पर दया करे, यह उसी का बेटा है। यह सुनकर सुलैमान- अलैहिस्सलाम- ने छोटी औरत के हक़ में निर्णय दे दिया।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ लोग, लोगों की जान और माल तक का दावा करने लगें। लेकिन, दावा करने वाले को प्रमाण देना है और इनकार करने वाले को क़सम खानी है।

عَن ابنِ عباسٍ رضي الله عنهما أنَّ رسولَ اللهِ صلي الله عليه وسلم قال: «لَو يُعطَى النّاسُ بدَعواهُم لادَّعَى رِجالٌ أموالَ قَومٍ ودِماءَهُم، ولَكِنَّ البَيِّنَةَ على المُدَّعِى، واليَمينَ على مَن أنكَرَ».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ लोग, लोगों की जान और माल तक का दावा करने लगें। लेकिन, दावा करने वाले को प्रमाण देना है और इनकार करने वाले को क़सम खानी है।"
इसे बैहक़ी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि अगर लोगों को प्रमाणों की पड़ताल किए बिना केवल उनके दावे के आधार पर दे दिया जाने लगे, तो कुछ लोग लोगों के धन एवं जान तक का दावा करने लगें। इसलिए मुद्दई को अपने दावे की दलील प्रस्तुत करनी होगी। अगर उसके पास दलील न हो, तो दावे को प्रतिवादी के सामने रखा जाएगा। अगर उसने इनकार कर दिया, तो उसे क़सम खानी होगी। उसके बाद वह बरी हो जाएगा।

फ़ायदे
  1. इब्न-ए-दक़ीक़ अल-ईद कहते हैं : यह हदीस इस्लामी विधानों के एक बुनियादी सिद्धांत और मतभेद के समय एक महान संदर्भ की हैसियत रखती है।
  2. इस्लामी शरीयत का एक बुनियादी उद्देश्य जान व माल के साथ खिलवाड़ की राह बंद करना एवं जान व माल को सुरक्षा प्रदान करना है।
  3. क़ाज़ी अपने ज्ञान की रोशनी में नहीं, बल्कि प्रमाणों के आलोक में निर्णय देगा।
  4. जो कोई भी बिना सबूत के दावा करेगा, उसे अस्वीकार कर दिया जाएगा।। दावा का संबंध चाहे अधिकारों एवं मामलात से हो या ईमान एवं इल्म के मसायल से।
हवाला

السنن الكبرى للبيهقي تحقيق التركي (21/ 242 - 243) (21243). التحفة الربانية في شرح الأربعين حديثًا النووية (ص76). شرح الأربعين النووية، لابن عثيمين (ص328). فتح القوي المتين في شرح الأربعين وتتمة الخمسين، لعبد المحسن البدر (ص114).

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नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कुछ लोगों को क़सम खाने को कहा, तो सब लोग क़सम खाने की होड़ में लग गए। इसलिए आपने आदेश दिया कि उनके बीच क़ुरआ अंदाज़ी के द्वारा तय किया जाए कि कौन क़सम खाएगा।

عن أبي هريرة رضي الله عنه «أن النبي صلى الله عليه وسلم عَرَضَ على قوم اليَمِين، فَأَسْرَعُوا فَأَمَرَ أن يُسْهَمَ بينهم في اليمين أَيُّهُم يَحْلِفُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कुछ लोगों को क़सम खाने को कहा, तो सब लोग क़सम खाने की होड़ में लग गए। इसलिए आपने आदेश दिया कि उनके बीच क़ुरआ अंदाज़ी के द्वारा तय किया जाए कि कौन क़सम खाएगा।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري -الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري - تأليف حمزة محمد قاسم مكتبة دار البيان، دمشق - الجمهورية العربية السورية، مكتبة المؤيد، الطائف - المملكة العربية السعودية، 1410 هـ - 1990 م مرقاة المفاتيح، علي بن سلطان محمد، أبو الحسن نور الدين الملا الهروي القاري - دار الفكر، بيروت - لبنان الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002م منحة العلام في شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله الفوزان-طبعة دار ابن الجوزي-الطبعة الأولى 1428 توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله البسام- مكتبة الأسدي –مكة المكرمة –الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام: تأليف الشيخ صالح الفوزان- عناية عبد السلام السليمان - مؤسسة الرسالة الطبعة الأولى فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام للشيخ ابن عثيمين- المكتبة الإسلامية القاهرة- تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي- الطبعة الأولى 1427 بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية. الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م.

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जो व्यक्ति मेरे इस मिंबर के पास कोई झूठी क़सम खाएगा, चाहे एक हरे मिसवाक के लिए ही क्यों न हो, वह अपना ठिकाना जहन्नम में बना ले।

عن جابر بن عبد الله قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «لا يحْلِفُ أحدٌ عند مِنْبَرِي هذا على يَمينٍ آثِمَة، ولو على سِواكٍ أَخْضَرَ، إلا تَبَوَّأَ مَقْعَدَه مِن النار -أو وَجَبَتْ له النار-».
जाबिर बिन अब्दुल्लाह -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “जो व्यक्ति मेरे इस मिंबर के पास कोई झूठी क़सम खाएगा, चाहे एक हरे मिसवाक के लिए ही क्यों न हो, वह अपना ठिकाना जहन्नम में बना ले या उसके लिए जहन्नम अनिवार्य हो गई।”
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे मालिक ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- سنن أبي داود، ت: محمد محي الدين, المكتبة العصرية. - سنن ابن ماجه، المؤلف: ت: محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء الكتب العربية. - مسند أحمد، تحقيق شعيب الأرنؤوط، الناشر: مؤسسة الرسالة الطبعة : الأولى ، 1421 هـ - 2001 م. -موطأ الإمام مالك, مالك بن أنس بن مالك بن عامر الأصبحي المدني, صححه ورقمه وخرج أحاديثه وعلق عليه: محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي، بيروت – لبنان, عام النشر: 1406 هـ - 1985. - إرواء الغليل في تخريج أحاديث منار السبيل للألباني , المكتب الإسلامي الطبعة: الثانية 1405 هـ. - شرح الطيبي على مشكاة المصابيح المسمى بـ (الكاشف عن حقائق السنن) المؤلف: شرف الدين الحسين بن عبد الله الطيبي, ت: د. عبد الحميد هنداوي, مكتبة نزار مصطفى الباز, الطبعة: الأولى، 1417 هـ. - تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427 هـ 2006 م. - منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان. دار ابن الجوزي. ط1 1428هـ. - فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية - الطبعة الأولى 1427. - توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام. مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ. - عون المعبود شرح سنن أبي داود، للعظيم آبادي دار الكتب العلمية - بيروت, الطبعة: الثانية، 1415 هـ. - مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح للقاري، دار الفكر، بيروت، الطبعة: الأولى، 1422هـ. - البدرُ التمام شرح بلوغ المرام للمَغرِبي, ت: علي بن عبد الله الزبن, دار هجر, الطبعة: الأولى 1428 هـ.

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अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ लोग, लोगों की जान और माल तक का दावा करने लगें। लेकिन, दावा करने वाले को प्रमाण देना है और इनकार करने वाले को क़सम खानी है।

عَن ابنِ عباسٍ رضي الله عنهما أنَّ رسولَ اللهِ صلي الله عليه وسلم قال: «لَو يُعطَى النّاسُ بدَعواهُم لادَّعَى رِجالٌ أموالَ قَومٍ ودِماءَهُم، لَكِنَّ البَيِّنَةَ على المُدَّعِى، واليَمينَ على مَن أنكَرَ».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ लोग, लोगों की जान और माल तक का दावा करने लगें। लेकिन, दावा करने वाले को प्रमाण देना है और इनकार करने वाले को क़सम खानी है।"
इसे बैहक़ी आदि ने रिवायत किया है, तथा इसका कुछ भाग स़ह़ीह़ैन (स़ह़ीह़ बुख़ारी और स़ह़ीह़ मुस्लिम) में भी है।दर्जाह़सन
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि अगर लोगों को प्रमाणों की पड़ताल किए बिना केवल उनके दावे के आधार पर दे दिया जाने लगे, तो कुछ लोग लोगों के धन एवं जान तक का दावा करने लगें। इसलिए मुद्दई को अपने दावे की दलील प्रस्तुत करनी होगी। अगर उसके पास दलील न हो, तो दावे को प्रतिवादी के सामने रखा जाएगा। अगर उसने इनकार कर दिया, तो उसे क़सम खानी होगी। उसके बाद वह बरी हो जाएगा।

फ़ायदे
  1. इब्न-ए-दक़ीक़ अल-ईद कहते हैं : यह हदीस इस्लामी विधानों के एक बुनियादी सिद्धांत और मतभेद के समय एक महान संदर्भ की हैसियत रखती है।
  2. इस्लामी शरीयत का एक बुनियादी उद्देश्य जान व माल के साथ खिलवाड़ की राह बंद करना एवं जान व माल को सुरक्षा प्रदान करना है।
  3. क़ाज़ी अपने ज्ञान की रोशनी में नहीं, बल्कि प्रमाणों के आलोक में निर्णय देगा।
  4. जो कोई भी बिना सबूत के दावा करेगा, उसे अस्वीकार कर दिया जाएगा।। दावा का संबंध चाहे अधिकारों एवं मामलात से हो या ईमान एवं इल्म के मसायल से।
हवाला

السنن الكبرى للبيهقي تحقيق التركي (21/ 242 - 243) (21243). التحفة الربانية في شرح الأربعين حديثًا النووية (ص76). شرح الأربعين النووية، لابن عثيمين (ص328). فتح القوي المتين في شرح الأربعين وتتمة الخمسين، لعبد المحسن البدر (ص114).

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यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com