सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

क़ज़ा का हुक्म, फ़ज़ीलत तथा सावधानियाँ

1 हदीसें

जब कोई निर्णयकारी निर्णय करते समय सही निर्णय तक पहुँचने का पूरा प्रयास करता है और सही निर्णय देने में सफल हो जाता है, तो उसे दो नेकियाँ मिलती हैं और जब निर्णय देते समय सही निर्णय देने का पूरा प्रयास तो करता है, लेकिन असफल रहता है, तो उसे एक नेकी मिलती है।

عن عمرو بن العاص رضي الله عنه أنه سمع رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «إِذَا حَكَمَ الحَاكِمُ فَاجْتَهَدَ ثم أَصابَ فله أَجْرَان، وإِذا حَكَمَ فَاجْتَهَدَ ثم أَخْطَأَ فله أَجْرٌ».
अम्र बिन आस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : “जब कोई निर्णयकारी निर्णय करते समय सही निर्णय तक पहुँचने का पूरा प्रयास करता है और सही निर्णय देने में सफल हो जाता है, तो उसे दो नेकियाँ मिलती हैं और जब निर्णय देते समय सही निर्णय देने का पूरा प्रयास तो करता है, लेकिन असफल रहता है, तो उसे एक नेकी मिलती है।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ - صحيح مسلم المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت - توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن عبد الرحمن بن صالح البسام، الناشر: مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م - تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427 هـ 2006 م - فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، تحقيق: صبحي بن محمد رمضان، وأُم إسراء بنت عرفة، ط1، المكتبة الإسلامية، مصر، 1427ه - منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف : عبد الله بن صالح الفوزان، الناشر: دار ابن الجوزي الطبعة: الأولى، 1427 هـ - 1431 هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com