किसी महिला ने उस पर हुए अत्याचार के कारण जन्म के समय से पुर्व ही अपने बच्चे को जन्म दिया जिस की पेट ही में मृत्यु हो चुकी थी । हज़रत उमर -जो एक इन्साफ तथा न्याय करने वाले खलीफ़ा थे- सहाबा तथा बुद्धिमान उलमा से समस्याओं तथा मुद्दों के बारे परामर्श किया करते थे। जब इस महिला ने मरा हुआ बच्चा जन्म दिया, तो उसकी दियत का हुक्म उन की समझ में न आया, चुनांचे उन्हों ने सहाबा से परामर्श किया, तो मुग़ीरा ने बतायाः कि उन्हों ने ऐसे ही एक मामले में रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को एक दास अथवा दासी को दासत्व मुक्त करने का निर्णय करते हुए देखा है। उमर ने इस हुक्म को अधिक सिध्द करना चाहा, इस लिए कि यह निर्णय क़यामत तक के लिए विधि -क़ानून- बनेगा, इसी लिए मुग़ीरा से कहा किः वह अपने कथन की सच्चाई तथा हदीस की सटीकता पर साक्षी ले आएं। तो मुहम्मद बिन मसलमा ने उनकी बातों की पुष्टी की।
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)،1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.