عن أبي ثَعْلبة الخُشني رضي الله عنه قال: «أَتَيْتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم فقلت: يا رسول الله، إنا بأرض قوم أهل كتاب، أَفَنَأْكُلُ في آنِيَتِهِم؟ وفي أرض صيد، أَصِيدُ بِقَوْسِي وبِكَلْبِي الذي ليس بِمُعَلَّمٍ، وبِكَلْبِي المُعَلَّمِ، فما يَصلح لي؟ قال: أمَّا مَا ذَكَرْتَ- يعني من آنية أهل الكتاب-: فإِنْ وجدْتُمْ غيرها فلا تأكلوا فيها، وإِنْ لم تَجِدُوا فاغسِلوهَا، وكلوا فِيهَا، وما صدتَ بِقَوْسِكَ، فذَكَرْتَ اسمَ الله عَلَيه فَكُلْ، وما صِدْتَ بِكَلْبِكَ المُعَلَّمِ، فَذَكَرْتَ اسْمَ الله عليه فَكُلْ، وما صِدْتَ بِكَلْبِكَ غيرِ المُعَلَّمِ فَأَدْرَكْتَ ذَكَاتَهُ فَكُلْ».
अबू सालबा खुशनी (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि मैंने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, हम अहले किताब की धरती में रहते हैं, क्या हम उनके बरतनों में खा सकते हैं? तथा हम शिकार वाले क्षेत्र में रहते हैं और मैं अपने तीर तथा सधाए हुए एवं बिना सधाए हुए कुत्ते से शिकार करता हूँ। इसमें से कौन-सा मेरे लिए उचित है? आपने फ़रमायाः जहाँ तक अहले किताब के बरतनों की बात है, यदि तुम्हें दूसरे बरतन मिल सकें, तो उनमें न खाओ, और यदि न मिल सकें, तो उन्हें धोकर खा लिया करो। और जिसका शिकार तीर अथवा सधाए हुए कुत्ते से करो और उसपर अल्लाह का नाम ले लिया हो, उसे खाओ और जिसका शिकार बिना सधाए हुए कुत्ते से करो तथा ज़िबह करने का अवसर मिल जाए, उसे भी खाओ।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
अबू सालबा खुशनी -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को बताया कि वे अह्ले किताब -यहूदियों तथा इसाइयों- के पड़ोस में रहते हैं, तो क्या उनके लिए अह्ले किताब के बरतनों में खाना-खाना जायज़ होगा, जबकि इस बात की संभावना रहती है कि उनके बरतन नापाक हों? तो आपने उनके बरतनों में दो शर्तों के साथ खाने की अनुमति प्रदान की :
1- कोई दूसरा बरतन न मिल सके।
2- उसे धोने के बाद उपयोग में लाया जाए।
उन्होंने यह भी बताया कि वे शिकार के इलाक़े में रहते हैं, और तीर तथा प्रशिक्षित एवं अप्रशिक्षित कुत्तों के माध्यम से शिकार करते हैं। ऐसे में इनमें से कौन-सा शिकार उनके लिए हलाल है? उत्तर में आपने बताया कि तीर के ज़रिए किया हुआ शिकार, यदि उसे चलाते समय अल्लाह का नाम ले लिया गया हो, तो हलाल है। रही बात कुत्ते की, तो कुत्ता यदि सधाया हुआ हो और उसे दौड़ाते समय अल्लाह का नाम लिया गया हो, तो उसका किया हुआ शिकार हलाल है। लेकिन, अगर सधाया हुआ न हो, तो उसका किया हुआ शिकार हलाल नहीं है। हाँ, यदि शिकार जीवित मिल जाए और उसे शरई तरीक़े से ज़बह कर लिया जाए, तो उसे खाया जा सकता है।
हवाला
-صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه.
-صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423ه.ـ
-تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، 1426ه.
-عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أنس رضي الله عنه قال: «أَنْفَجْنَا أَرْنَباً بِمَرِّ الظَّهْرَانِ، فَسَعَى الْقَوْمُ فَلَغَبُوا، وَأَدْرَكْتُهَا فَأَخَذْتُهَا، فَأَتَيْتُ بِهَا أَبَا طَلْحَةَ، فَذَبَحَهَا وَبَعَثَ إلَى رَسُولِ الله صلى الله عليه وسلم بِوَرِكِهَا وَفَخِذَيْهَا فَقَبِلَهُ».
अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि हमने मर्रुज़ ज़हरान में एक खरगोश का पीछा किया। और लोग भी उसके पीछे दौड़े, लेकिन थक गए। अलबत्ता, मैंने पकड़ लिया। उसे लेकर अबू तलहा के पास आया, तो उन्होंने ज़िबह किया और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को उसका नितंब एवं दोनों रान भेज दिए। आपने उसे ग्रहण कर लिया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- और आपके सहाबा एक यात्रा में थे। इस दौरान शायद मर्रुज़ ज़हरान नामी एक स्थान में रुके। यह वही स्थान है, जहाँ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने साथियों के साथ मक्का विजय के साल रुके थे। इसी बीच उन्होंने एक खरगोश का पीछा किया। बड़ी संख्या में लोग उसके पीछे दौड़े, लेकिन थक हारकर वापस हो गए। अनस बिन मालिक -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो-, जिन्होंने उन दिनों यौवन की दहलीज़ में क़दम रखा ही था, ने उसे पकड़ लिया और अपनी माता के पति अबू तलहा -अल्लाह उनसे प्रसन्नन हो- के पास ले गए। चुनांचे, उन्होंने उसे ज़बह करके अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को दोनों रान तथा कूल्हा भेजा, तो आपने उसे स्वीकर कर लिया और शायद खाया भी।
हवाला
صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ.
الإلمام بشرح عمدة الأحكام، إسماعيل بن محمد الأنصاري، دار الفكر، دمشق، الطبعة: الأولى 1381هـ.
تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار علماء السلف، الطبعة: الثانية 1414هـ.
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ.
عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ ابنِ عُمَرَ رَضيَ اللهُ عنهما عَنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «مَنِ اقْتَنَى كَلْبًا إِلَّا كَلْبَ ضَارٍ أَوْ مَاشِيَةٍ نَقَصَ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطَانِ»، قَالَ سَالِمٌ: وَكَانَ أَبُو هُرَيْرَةَ يَقُولُ: «أَوْ كَلْبَ حَرْثٍ»، وَكَانَ صَاحِبَ حَرْثٍ.
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने शिकार तथा जानवरों की रखवाली के लिए पाले जाने वाले कुत्ता के अतिरिक्त कोई और कुत्ता पाला, हर दिन उसकी नेकी से दो क़ीरात घटा दिए जाएँगे।" सालिम कहते हैं कि अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- यह भी कहा करते थे : "या खेती की रखवाली के कुत्ते के सिवा।" और वह खुद खेतीबाड़ी किया करते थे।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कुत्ता पालने से सावधान किया है। बस उस कुत्ता को छोड़कर जो शिकार करने या जानवर तथा खेत की देखभाल के लिए पाला जाए। जिसने इसके अतिरिक्त कोई कुत्ता पाला, उसके अमल के सवाब से हर दिन दो-दो क़ीरात घटा दिए जाएँगे। क़ीरात कितने का होता है, इसकी जानकारी अल्लाह के पास है।
फ़ायदे
- किसी मुसलमान के लिए कुत्ता पालना जायज़ नहीं है, सिवाय उन कुत्तों को छोड़कर जिनका ज़िक्र इस हदीस में किया जा चुका है।
- कुत्ता पालना मना है, क्योंकि इसमें अनेक बुराइयाँ और हानियाँ निहित हैं। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से साबित है कि जिस घर में कुत्ता होता है, उसमें फ़रिश्ते प्रवेश नहीं करते। साथ ही, इसमें एक अत्यंत अपवित्रता पाई जाती है, जिसे दूर करने के लिए बार-बार पानी और मिट्टी से धोना आवश्यक है।
हवाला
صحيح البخاري (7/ 87) (5480).
صحيح مسلم (3/ 1202) (1574).
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص720).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عديّ بن حاتم رضي الله عنه قال: قلتُ: يا رسول الله، إني أُرسلُ الكلاب المعلَّمة، فيُمسِكنَ عليّ، وأذكرُ اسم الله؟ فقال: "إذا أرسلتَ كلبَكَ المعلَّمَ، وذكرتَ اسمَ الله، فكُلْ ما أمسكَ عليك"، قلت: وإن قتلنَ؟ قال: "وإن قَتلْنَ، ما لم يَشْرَكْها كلبٌ ليس منها"، قلتُ له: فإني أرمي بالمِعْراض الصيدَ فأُصُيبُ؟ فقال: "إذا رميتَ بالمعراضِ فخزَقَ فكلْهُ، وإن أصابَه بعَرْضٍ فلا تأكلْهُ".
وحديث الشعبي، عن عدي نحوه، وفيه: "إلا أن يأكل الكلب، فإن أكل فلا تأكل؛ فإني أخاف أن يكون إنما أمسك على نفسه، وإن خالطها كلاب من غيرها فلا تأكل؛ فإنما سميت على كلبك، ولم تسم على غيره".
وفيه: "إذا أرسلت كلبك المكلب فاذكر اسم الله، فإن أمسك عليك فأدركته حيا فاذبحه، وإن أدركته قد قتل ولم يأكل منه فكله، فإنَّ أخْذَ الكلبِ ذَكَاته".
وفيه أيضا: "إذا رميت بسهمك فاذكر اسم الله".
وفيه: "فإن غاب عنك يوما أو يومين -وفي رواية: اليومين والثلاثة- فلم تجد فيه إلا أثر سهمك، فكل إن شئت، فإن وجدته غريقا في الماء فلا تأكل؛ فإنك لا تدري الماء قتله، أو سهمك؟
अदी बिन हातिम (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं सधाए हुए कुत्तों (को शिकार के पीछे) छोड़ता हूँ, जो मेरे लिए शिकार को रोककर रखते हैं और (उन्हें छोड़ते समय) अल्लाह का नाम भी लेता हूँ (तो उसके बारे में क्या निर्देश है)? आपने फ़रमायाः "जब तुम अपने सधाए हुए कुत्ते को छोड़ो और अल्लाह का नाम लो, तो उसे खाओ जो वह तुम्हारे लिए रोक कर रखे।" मैंने कहाः अगर सधाए हुए कुत्ते जान से मार दें, तो भी? आपने कहाः "अगर सधाए हुए कुत्ते जान से मार दें, तो भी खाओ, जब तक कोई अन्य कुत्ता उनके साथ शामिल न हो जाए।" मैंने कहाः मैं शिकार की ओर नुकीली लाठी चलाता हूँ और शिकार कर लेता हूँ (तो उसके बारे में क्या निर्देश है)? आपने फ़रमायाः "जब तुम नेज़े से मारो और वह उसे फाड़ दे, तो खाओ और अगर चौड़ाई में लगे, तो न खाओ।"
शाबी ने भी अदी बिन हातिम (रज़ियल्लाहु अनहु) से इसी प्रकार की हदीस रिवायत की है। उसमें यह इज़ाफ़ा भी हैः "यह और बात है कि कुत्ता खा ले। अगर वह खुद खा ले, तो मत खाओ; क्योंकि मुझे इस बात का भय है कि कहीं उसने अपने लिए शिकार न किया हो। और अगर उसके साथ अन्य कुत्ते शिकार करने में शरीक हो जाएँ, तो न खाओ; क्योंकि तुमने अपने कुत्ते को छोड़ते हुए अल्लाह का नाम लिया है, किसी और कुत्ते को छोड़ते समय नहीं।"
तथा उसी में हैः "जब अपने सधाए हुए कुत्ते को छोड़ो, तो अल्लाह का नाम लो। यदि वह तुम्हारे लिए पकड़कर रखे और उसे ज़िंदा पाओ, तो ज़बह करो। और अगर मरा हुआ पाओ और कुत्ते ने उसमें से कुछ न खाया हो, तो उसे खाओ, क्योंकि कुत्ते का पकड़ना ही उसका ज़िबह करना है।"
उसी में यह भी हैः "जब तीर चलाओ, तो अल्लाह का नाम लो।"
तथा उसी में हैः "यदि शिकार तुम्हें एक या दो दिन (तथा एक रिवायत के अनुसार दो एवं तीन दिन) न मिले और उसके शरीर में तुम अपने तीर के निशान के अतिरिक्त कोई निशान न पाओ, तो अगर चाहो तो खाओ। और अगर उसे पानी में डूबा हुआ पाओ, तो मत खाओ; क्योंकि तुम नहीं जानते कि उसकी मौत पानी में डूबने से हुई है या तुम्हारा तीर लगने से?"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
अदी बिन हातिम (रज़ियल्लाहु अंहु) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से सधाये हुए कुत्तों, जिन्हें उनके मालिक ने शिकार करना सिखा रखा हो, से शिकार करने के बारे में पूछा, तो आपने उनसे कहाः जब उन्हें छोड़ते समय अल्लाह का नाम ले लो, तो वह जो शिकार पकड़कर लाएँ, उसे खाओ, जब तक उनके साथ तुम्हें कोई दूसरा कुत्ता न मिले। यदि उनके साथ कोई दूसरा कुत्ता मिले, तो न खाओ, क्योंकि तुमने अपने कुत्ते को छोड़ते समय अल्लाह का नाम लिया था, किसी और के कुत्ते को छोड़ते समय नहीं। इसी तरह जब तुम शिकार की ओर नेज़ा फेंको और वह शिकार के शरीर में धँस जाए और रक्त बहा दे, तो उसे खाओ। शर्त यह है कि अल्लाह का नाम लिया हो। परन्तु यदि नेज़ा चौड़ाई में लगे और शिकार मर जाए, तो मत खाओ। क्योंकि वह चोट लगने से मरा है, इसलिए गिरकर मरने और चोट लगने से मरने वाले जानवर के हुक्म में होगा। फिर जब आदमी अपना कुत्ता छोड़े और शिकार को ज़िंदा पाए और कुत्ते ने उसे मारा न हो, तो उसे ज़बह करना ज़रूरी होगा और ऐसी स्थिति में शिकार हलाल होगा, चाहे अन्य कुत्ते भी क्यों न शरीक हो गए हों। उन्होंने आपसे तीर से शिकार करने के बारे में पूछा, जब तीर चलाते समय अल्लाह का नाम ले लिया गया हो, तो आपने उन्हें आदेश दिया कि उससे किए हुए शिकार को खाए। फिर यदि शिकार एक या दो दिन ग़ायब रह जाए और उसमें अपने तीर के निशान के अतिरिक्त कोई और निशान न पाए, तो वह उसे खा सकता है। लेकिन यदि पानी में डूबा हुआ मिले, तो न खाए, क्योंकि यह नहीं पता कि शिकार पानी में डूबने के कारण मरा है या तीर लगने से।
हवाला
صحيح البخاري، تحقيق محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، ط 1422هـ.
صحيح مسلم، ط دار إحياء التراث العربي، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي.
الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري، ط دار الفكر بدمشق، الطبعة الأولى، 1381هـ.
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام، ط دار الميمان، 1426هـ.
تأسيس الأحكام للنجمي، ط دار المنهاج، 1427هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن ابن أبي عَمَّار قال: قلت لجابر: الضَّبْع صَيْدٌ هي؟ قال: «نعم»، قال: قلتُ: آكُلُها؟ قال: «نعم»، قال: قلتُ له: أَقَالَهُ رسول الله صلى الله عليه وسلم ؟ قال: «نعم».
इब्ने अबू अम्मार कहते हैं कि मैंने जाबिर (रज़ियल्लाहु अंहु) से पूछा कि क्या लकड़ग्घा शिकार है? तो उन्होंने उत्तर दियाः हाँ! वह कहते हैं कि मैंने कहाः क्या मैं उसे खा सकता हूँ? उन्होंने कहाः हाँ! उनका कहना है कि मैंने उनसे कहाः क्या ऐसा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया है? उन्होंने कहाः हाँ!
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
-سنن أبي داود, أبو داود سليمان بن الأشعث الأزدي السِّجِسْتاني, المحقق: محمد محيي الدين عبد الحميد, المكتبة العصرية، صيدا – بيروت.
- سنن الترمذي، تأليف: محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق أحمد شاكر وغيره، الناشر: شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، الطبعة الثانية، 1395 ه.
-سنن ابن ماجه, ابن ماجة أبو عبد الله محمد بن يزيد القزويني، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي, الناشر: دار إحياء الكتب العربية - فيصل عيسى البابي الحلبي.
-السنن الصغرى للنسائي "المجتبى"، تحقيق: عبد الفتاح أبو غدة، نشر: مكتب المطبوعات الإسلامية – حلب، الطبعة الثانية، 1406ه – 1986م.
-مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى، 1421هـ - 2001م.
-مسند الدارمي المعروف بـ (سنن الدارمي), أبو محمد عبد الله بن عبد الرحمن الدارمي، تحقيق: حسين سليم أسد الداراني, دار المغني للنشر والتوزيع، المملكة العربية السعودية, الطبعة الأولى، 1412هـ - 2000م.
-إرواء الغليل في تخريج أحاديث منار السبيل, محمد ناصر الدين الألباني, إشراف: زهير الشاويش, المكتب الإسلامي – بيروت, الطبعة الثانية 1405 هـ - 1985م.
-سبل السلام شرح بلوغ المرام، تأليف: محمد بن إسماعيل بن صلاح الصنعاني، الناشر: دار الحديث, بدون طبعة وبدون تاريخ.
-توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن عبد الرحمن بن صالح البسام، الناشر: مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة، الطبعة الخامِسَة، 1423هـ - 2003م.
-تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة الأولى، 1427ه - 2006م.
-فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام، لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، تحقيق: صبحي بن محمد رمضان، وأُم إسراء بنت عرفة، ط1، المكتبة الإسلامية، مصر، 1427هـ.
-منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن صالح الفوزان، الناشر: دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى، 1427هـ - 1431هـ.
-عون المعبود شرح سنن أبي داود، ومعه حاشية ابن القيم: تهذيب سنن أبي داود, محمد أشرف بن أمير بن علي بن حيدر، العظيم آبادي, دار الكتب العلمية – بيروت, الطبعة الثانية، 1415هـ.
-فتاوى اللجنة الدائمة - اللجنة الدائمة للبحوث العلمية والإفتاء, جمع وترتيب: أحمد بن عبد الرزاق الدويش, الناشر: رئاسة إدارة البحوث العلمية والإفتاء - الإدارة العامة للطبع – الرياض.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي ثعلبة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «إذا رَمَيْتَ بِسَهْمِكَ، فغابَ عنْك، فَأَدْرَكْتَهُ فَكُلْهُ، ما لَمْ يُنْتِنْ».
अबू सालबा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमाया : “जब तुम किसी शिकार पर तीर चलाओ तथा वह तुम्हारी नज़रों से ओझल हो जाए और फिर उसे बाद में पाओ, तो उसे खाओ, जब तक उसमें बदबू न आ जाए।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
-صحيح مسلم، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي - بيروت.
-مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت - لبنان، الطبعة الأولى، 1422هـ - 2002م.
-توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن عبد الرحمن بن صالح البسام، الناشر: مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة، الطبعة الخامِسَة، 1423هـ - 2003م.
-تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة الأولى، 1427هـ - 2006م.
-فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام، لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، تحقيق: صبحي بن محمد رمضان، وأُم إسراء بنت عرفة، ط1، المكتبة الإسلامية، مصر، 1427هـ.
-منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن صالح الفوزان، النشر: دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى، 1427 - 1431هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परयहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com