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तशरीह के साथ हदीसें

स्तनपान कराना

9 हदीसें

‎“‎दूध पीने से वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो जन्म के कारण से हराम होते हैं।‎”‎

عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «الرَّضَاعَةُ تُحَرِّمُ مَا تُحَرِّمُ الوِلَادَةُ».
आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : ‎“‎दूध पीने से वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो जन्म के कारण से हराम होते हैं।‎”‎
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि रज़ाअत (बचपन में अपनी माँ के अतिरिक्त किसी और स्त्री का दूध पीने) से वह सारे रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो जन्म एवं नसब के आधार पर हराम होते हैं। जैसे चचा, मामा और भाई आदि। इसी तरह रज़ाअत से वह सारी चीज़ें हलाल हो जाया करती हैं, जो जन्म के आधार पर हलाल हुआ करती हैं।

फ़ायदे
  1. यह हदीस रज़ाअत (दूध पिलाने) से संबंधित आदेशों एवं निर्देशों के बारे में एक (महत्वपूर्ण) सिद्धाँत है।
  2. इब्न-ए-हजर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के शब्दों “‎दूध पीने से वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो जन्म के कारण से हराम होते हैं।‎” के बारे में कहते हैं : यानी दूध पीने के कारण वह सभी चीज़ें हलाल भी होती हैं, जो नसब के कारण हलाल होती हैं। इस बात पर इजमा है कि दूध पीने के कारण निकाह और उससे संबंधित चीज़ें हराम हो जाती हैं, दूध पीने वाले और दूध पिलाने वाली के बच्चों के बीच हुर्मत स्थापित हो जाती है और उन्हें रिश्तेदारों का स्थान मिल जाता है, जिसके कारण उन्हें देखना, उनके साथ एकांत में रहना और यात्रा करना हलाल हो जाता है। लेकिन इससे माँ से संबंधित शेष अहकाम, जैसे दोनों का एक दूसरे का वारिस बनना, नान व नफ़क़ा वाजिब होना, मिल्कीयत पाए जाने पर आज़ादी, गवाही, दीयत और क़िसास को ख़त्म करना आदि साबित नहीं होते।
  3. दूध पिलाने के कारण निकाह हमेशा के लिए हराम हो जाता है।
  4. दूसरी हदीसों से यह बात प्रमाणित होती है कि दूध पीने के कारण हुर्मत पाँच बार जो स्पष्ट हों दूध पिलाने से ही स्थापित होती है। वह भी जब दूध शुरू के दो सालों के अंदर पिलाया जाए।
  5. नसब के आधार पर निम्नलिखित महिलाओं से हुर्मत स्थापित होती है : माएँ, इनमें दादियाँ- नानियाँ भी शामिल हैं, चाहे जितने ऊपर की हों; बेटियाँ, इनमें बेटियों और बेटों की बेटियाँ भी शामिल हैं, चाहे जितने नीचे की हों; बहनें, चाहे सगी हों या बाप शरीक हों या फिर माँ शरीक; फूफियाँ, इनमें पिता की तमाम सगी और बाप शरीक तथा माँ शरीक बहनें शामिल हैं, दादों की बहनें भी इनमें शामिल हैं, चाहे जितने ऊपर की हों; खालाएँ, इनमें माँ की सभी सगी, बाप शरीक और माँ शरीक बहनें शामिल हैं, इसी तरह दादियों-नानियाँ की सभी बहनें भी शामिल हैं, बाप शरीक हों या माँ शरीक, चाहे जितने ऊपर की हों; भाई की बेटियाँ और बहन की बेटियाँ, इनके अंदर इनकी बेटियाँ भी शामिल हैं, चाहे जितने नीचे की हों।
  6. रही बात रज़ाअत की तो इससे उन सभी महिलाओं से हुर्मत स्थापित हो जाती है, जिनसे नसब के आधार पर होती है। बस इससे दूध भाई की माँ और दूध बेटे की बहन से हुर्मत स्थापित नहीं होती।
हवाला

صحيح البخاري (3/ 170) (2646). صحيح مسلم (2/ 1068) (1444). التحفة الربانية في شرح الأربعين حديثًا النووية، لإسماعيل الأنصاري (ص96). الأحاديث الأربعون النووية وعليها الشرح الموجز المفيد، لعبد الله المحسن (ص84).

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तुम्हारा विवाह कैसे सही हो सकता है, जबकि उसका दावा है कि उसने तुम दोनों को स्तनपान कराया है?

عن عقبة بن الحارث رضي الله عنه مرفوعاً: «أنه تزوج أم يحيى بنت أبي إهاب، فجاءت أَمَة سوداء، فقالت: قد أرضعتكما، فذكرت ذلك للنبي صلى الله عليه وسلم . قال: فأعرض عني. قال: فَتَنَحَّيْتُ فذكرت ذلك له. قال: كيف وقد زعمت أن قد أرضعتكما؟!».
उक़बा बिन हारिस़ -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि उन्होंने उम्म-ए-यहया बिंत अबू इहाब से शादी की, तो सौदा की दासी आई और कहने लगी कि मैंने तुम दोनों को स्तनपान कराया है। यह बात मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को बताई, तो आपने मुझसे मुँह फेर लिया। मैंनें थोड़ा-सा हटकर दोबारा आपके सामने बात रखी, तो फ़रमाया : "तुम्हारा विवाह कैसे सही हो सकता है, जबकि उसका दावा है कि उसने तुम दोनों को स्तनपान कराया है?"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

उक़बा बिन हारिस -रज़ियल्लाहु अनहु- ने उम्म-ए-यहया बिंत अबू इहाब से शादी की, तो एक कालीकलूटी दासी आई और कहने लगी कि उसने उनको और उनकी पत्नी दोनों को दूध पिलाया है। इस तरह, दोनों दूध भाई बहन हो गए। उक़बा -रज़ियल्लाहु अनहु- ने उस दासी के दावे का ज़िक्र अल्लाह के रसूल के सामने किया और कहा कि वह अपने दावे में झूठी है, तो आपने उस दासी की गवाही के बावजूद उक़बा की अपनी पत्नी के साथ रहने की चाहत का खंडन करते हुए कहा : तुम्हारी यह इच्छा कैसे पूरी हो सकती है, जबकि उस दासी ने इस तरह का दावा कर दिया है और जो कुछ जानती है, उसकी गवाही दे दी है?

हवाला

- صحيح البخاري؛ عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه. - خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام- فيصل بن عبد العزيز بن فيصل ابن حمد المبارك الحريملي النجدي - الطبعة: الثانية، 1412 هـ - 1992

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यदि वह मेरी गोद में परवरिश न भी पाई होती, तो भी मेरे लिए हलाल न होती। इसलिए कि वह मेरे दूध-शरीक भाई की बेटी है। मुझे और अबू सलमा को सुवैबा ने स्तनपान कराया है। अतः अपनी बेटियों और बहनों को मुझपर पेश न करो।

عن أم حبيبة بنت أبي سفيان رضي الله عنهما قالت: قلت يا رسول الله، انكح أختي ابنة أبي سفيان. قال: أو تحبين ذلك؟ فقلت: نعم؛ لست لك بمُخْلِيَةٍ، وأحَبُّ من شاركني في خير أختي. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : إن ذلك لا يحل لي. قالت: إنا نُحَدَّثُ أنك تريد أن تنكح بنت أبي سلمة. قال: بنت أم سلمة؟! قالت: قلت: نعم، قال: إنها لو لم تكن ربيبتي في حَجْرِي، ما حلت لي؛ إنها لابنة أخي من الرضاعة، أرضعتني وأبا سلمة ثويبةُ؛ فلا تعرضن علي بناتكن ولا أخواتكن. قال عروة: وثويبة مولاة لأبي لهب أعتقها، فأرضعت النبي صلى الله عليه وسلم ، فلما مات أبو لهب رآه بعض أهله بشرِّ حِيبة، فقال له: ماذا لقيت؟ قال أبو لهب: لم ألق بعدكم خيرًا، غير أني سقيت في هذه بعتاقتي ثويبة.
उम्मे हबीबा बिंत अबू सुफ़यान (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहती हैं कि मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! आप मेरी बहन अर्थात अबू सुफ़यान की बेटी से निकाह कर लें। आपने फ़रमायाः क्या तुम इसे पसंद करती हो? मैंने कहाः हाँ। ऐसा तो है नहीं कि केवल मैं ही आपकी पत्नी हूँ! मुझे यह अच्छा लगेगा कि भलाई में मेरी साझीदार मेरी बहन रहे। यह सुनकर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः यह मेरे लिए हलाल नहीं है।' उम्मे हबीबा (रज़ियल्लाहु अनहा) ने कहाः हम सुन रहे हैं कि आप अबू सलमा की बेटी से शादी करना चाहते हैं? आपने फ़रमायाः अबू सलमा की बेटी? उन्होंने कहाः हाँ। आपने फ़रमायाः यदि वह मेरी गोद में परवरिश न भी पाई होती तो भी मेरे लिए हलाल न होती। इसलिए कि वह मेरे दूध-शरीक भाई की बेटी है। मुझे और अबू सलमा को सुवैबा ने स्तनपान कराया है। अतः अपनी बेटियों और बहनों को मुझपर पेश न करो। उरवा कहते हैंः सुवैबा, जो अबू लहब की दासी थीं, अबू लहब ने उन्हें मुक्त कर दिया और उन्होंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को स्तनपान कराया। फिर जब अबू लहब मरा तो उसके घर के किसी ने उसे स्वप्न में बहुत बुरे हाल में देखा, अतः उससे पूछा कि तूने क्या कुछ पाया? अबू लहब ने उत्तर दियाः तुम लोगों से जुदा होने के बाद मैंने कोई भलाई नहीं देखी। हाँ, बस सुवैबा को मुक्त करने के कारण मुझे कुछ जल पीने को दिया गया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

उम्मे हबीबा बिंत अबू सुफ़यान अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी थीं तथा वह अपने इस सौभाग्य से संतुष्ट और ख़ुश थीं। यही कारण है कि उन्होंने आपसे आग्रह किया कि आप उनकी बहन से शादी कर लें। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को इस बात पर बड़ा ताज्जुब हुआ कि उन्होंने सौकन लाने की अनुमति कैसे दे दी, जबकि स्त्रियाँ इस मामले में बड़ी स्वभिमानी होती हैं? यही कारण है कि आपने आश्चर्य प्रकट करते हुए उनसे पूछा कि क्या तुम्हें यह पसंद है? उन्होंने उत्तर दिया कि हाँ, मुझे यह पसंद है। फिर अपनी बहन से शादी की अनुमति देने के कारण की व्याख्या करते हुए कहा कि वैसे भी वह अकेली आपके विवाह में नहीं हैं, बल्कि आपकी और भी पत्नियाँ हैं, अतः इस सौभाग्य में उनकी बहन भी क्यों न शरीक हो जाए? लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि एक साथ दो बहनों को विवाह में नहीं रखा जा सकता। इसलिए आपने उन्हें बता दिया कि उनकी बहन उनके लिए हलाल नहीं है। इसपर उम्मे हबीबा (रज़ियल्लाहु अंहा) ने कहाः उन्हें पता चला है कि आप अबू सलमा की बेटी से शादी करने वाले हैं। यह सुन, आपने स्पष्टिकरण के अंदाज़ में पूछा कि क्या तुम अबू सलमा की बेटी ही के बारे में कह रही हो? उन्होंने कहाः हाँ! तो आपने इस अफ़वाह को ग़लत बताते हुए फ़रमायाः उम्मे सलमा की बेटी आपके लिए दो कारणों से हलाल नहीं हैंः एक यह कि वह मेरी पत्नी की बेटी और मेरे ही यहाँ उसका लालन-पालन हुआ है। दूसरा यह कि वह मेरे दूध के रिश्ते के भाई की बेटी है। मुझे और उसके पिता अबू सलमा को अबू लहब की मुक्त की हुई दासी सुवैबा ने दूध पिलाया था। इस तरह मैं उसका चचा भी हूँ। अतः, तुम अपनी बेटियों और बहनों से निकाह की बात मुझसे न करो। मैं तुमसे अधिक जानता हूँ कि इस तरह के मामलों में मुझे क्या करना चाहिए।

हवाला

- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه.

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अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमज़ा (रज़ियल्लाहु अनहु) की बेटी के बारे में फ़रमायाः वह मेरे लिए हलाल नहीं है। स्तनपान से भी वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो नसब (वंश) से हराम होते हैं। वह मेरे दूध शरीक- भाई की बेटी है।

قال رسول الله صلى الله عليه وسلم في بنت حمزة: «لَا تَحِلُّ لِي يَحْرُمُ من الرَّضَاعِ مَا يَحْرُمُ من النَّسَبِ وهي ابنة أَخِي من الرَّضاعة».
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमज़ा (रज़ियल्लाहु अनहु) की बेटी के बारे में फ़रमायाः वह मेरे लिए हलाल नहीं है। स्तनपान से भी वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो नसब (वंश) से हराम होते हैं। वह मेरे दूध- शरीक भाई की बेटी है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने इच्छा जताई कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उनके तथा आपके चचा हमज़ा (रज़ियल्लाहु अंहु) की बेटी से शादी कर लें। परन्तु, आपने उन्हें बताया कि वह आपके लिए हलाल नहीं है; क्योंकि वह आपके दूध शरीक भाई की बेटी है। आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके चचा हमज़ा (रज़ियल्लाहु अंहु) ने अबू लहब की मुक्त की हुई दासी सुवैबा का दूध पिया था। इस तरह हमज़ा (रज़ियल्लाहु अंहु) आपके दूध शरीक भाई हुए और उनकी पुत्री आपकी भतीजी हुई। क्योंकि दूध से भी वह रिश्ते हराम हो जाते हैं, जो नसब से हराम होते हैं।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381ه. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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क़ुरआन की जो आयतें उतारी गई थीं, उनमें से एक आयत थीः "दस बार दूध पीने से, जो मालूम हों, हुरमत साबित होती है।" फिर यह आयत मनसूख़ (निरस्त) हो गई और पाँच बार दूध पीने की बात कही गई, जो मालूम हों। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की जब मृत्यु हुई, तो ये शब्द क़ुरआन में मौजूद थे और पढ़े जा रहे थे।

عن عائشة، أنها قالت: "كان فِيمَا أُنْزِلُ من القرآن: (عَشْرُ رَضَعَاتٍ مَعْلُومَاتٍ يُحَرِّمْنَ)، ثم نُسِخْنَ بِخَمْسٍ مَعْلُومَاتٍ، فَتُوُفِّيَ رَسُولُ الله صلى الله عليه وسلم ، وهُنَّ فِيمَا يُقْرَأُ من القرآن".
आइश (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैंः क़ुरआन की जो आयतें उतारी गई थीं, उनमें से एक आयत थीः "दस बार दूध पीने से, जो मालूम हों, हुरमत साबित होती है।" फिर यह आयत मनसूख़ (निरस्त) हो गई और पाँच बार दूध पीने की बात कही गई, जो मालूम हों। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की जब मृत्यु हुई, तो ये शब्द क़ुरआन में मौजूद थे और पढ़े जा रहे थे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية - الطبعة الأولى 1427 - 2006م - توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام. مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة. الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م - بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر. دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م - صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت. - شرح مصابيح السنة للإمام البغوي، لابن الملك. الناشر: إدارة الثقافة الإسلامية. الطبعة: الأولى، 1433 هـ - 2012 م - عون المعبود شرح سنن أبي داود، ومعه حاشية ابن القيم، للعظيم آبادي. دار الكتب العلمية – بيروت. الطبعة: الثانية، 1415 هـ - منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان. دار ابن الجوزي. ط1 1428ه - تسهيل الالمام، للشيخ صالح الفوزان. طبعة الرسالة. الطبعة الأولى 1427 – 2006 م - تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي، للمباركفورى . الناشر: دار الكتب العلمية - بيروت.

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यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com