صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب، الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. منحة العلام في شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله الفوزان، طبعة دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى 1428. توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله البسام، مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام: تأليف الشيخ صالح الفوزان، عناية عبد السلام السليمان، مؤسسة الرسالة الطبعة الأولى. فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية القاهرة، تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي، الطبعة الأولى 1427. سبل السلام، محمد بن إسماعيل الصنعاني، دار الحديث.
तशरीह के साथ हदीसें
उसकी पत्नी पर नज़र रखो, अगर वह गोरा-चिट्टा, सीधे बालों और लाल आँखों वाला बच्चा जनती है, तो वह हिलाल बिन उमय्या का है और अगर सुरमई आँखों, घुंघराले बालों और पतली पिंडलियों वाला बच्चा जनती है, तो वह शरीक बिन सहमा का है।
إن هِلال بن أُمية قذف امرأته بشريك ابن سَحْماء، وكان أخا البراء بن مالك لأمه، وكان أول رجل لَاعَنَ في الإسلام، قال: فَلَاعَنَهَا، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «أبصروها، فإن جاءت به أبيض سَبِطًا، قَضِيءَ الْعَيْنَيْنِ؛ فهو لهلال بن أمية، وإن جاءت به أَكْحَلَ جَعْدًا حَمْشَ السَّاقَيْنِ؛ فهو لشريك بن سحماء»، قال: فأُنبِئْت أنها جاءت به أَكْحَلَ جَعْدًا حَمْشَ السَّاقَيْنِ.
हिलाल बिन उमय्या ने अपनी पत्नी पर शरीक बिन सहमा के साथ व्यभिचार का आरोप लगाया। हिलाल बिन उमय्या बरा बिन मालिक के माँ शरीक भाई थे और 'लेआन' करने वाले पहले मुसलमान थे। वर्णनकर्ता कहते हैंः उन्होंने अपनी पत्नी से 'लेआन' कर लिया, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "उसकी पत्नी पर नज़र रखो, अगर वह गोरा-चिट्टा, सीधे बालों और लाल आँखों वाला बच्चा जनती है, तो वह हिलाल बिन उमय्या का है और अगर सुरमई आँखों, घुंघराले बालों और पतली पिंडलियों वाला बच्चा जनती है, तो वह शरीक बिन सहमा का है।" वर्णनकर्ता कहते हैंः बाद में मुझे बताया गया कि उसने सुरमई आँखों, घुंघराले बालों और पतली पिंडलियों वाला बच्चा जना था।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com