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तशरीह के साथ हदीसें

''एक दूसरे को उपहार दिया करो, इससे परस्पर प्रेम बढ़ेगा।''

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «تَهَادَوا تَحَابُّوا».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : ''एक दूसरे को उपहार दिया करो, इससे परस्पर प्रेम बढ़ेगा।''
इसे बुख़ारी ने अल-अदब अल-मुफ़रद में, तथा अबू यअ़ला और बैहक़ी ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुसलमानों को अपने मुस्लिम भाई के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करने पर उभारा है और यह बताया है कि उपहार, मोहब्बत पैदा करने और दिलों को जोड़ने वाली चीज़ों में से एक है।

फ़ायदे
  1. उपहार देना मुस्तहब है, क्योंकि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसका आदेश दिया है।
  2. उपहार मोहब्बत का कारण है।
  3. इन्सान को अपनी क्षमता के अनुसार वह सब कुछ करना चाहिए जिससे उसके और लोगों के बीच प्रेम पैदा हो। चाहे यथासंभव उपहार देना हो, या विनम्रतापूर्ण व्यवहार करना हो, या अच्छी बात कहना हो या प्रसन्न चेहरे से मिलना हो।
हवाला

الأدب المفرد للبخاري (ص:208) (594). مسند أبي يعلى الموصلي (11/ 9) (6148). السنن الكبرى للبيهقي (6/ 169). فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام (4/ 319). فيض القدير (3/ 271). التيسير بشرح الجامع الصغير (1/ 457).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
हिबा तथा अतिय्या (दान)

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com