सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक अज़्दी व्यक्ति, जिसे इब्न अल-लुतबिया कहा जाता था, को ज़कात का धन इकट्ठा करने का ज़िम्मेवार बनाया। जब वह वापस आया, तो बोला : यह आप लोगों का है और यह मुझे भेंट स्वरूप दिया गया है। यह देख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मिंबर पर खड़े हुए तथा अल्लाह की बड़ाई व प्रशंसा की

عَنْ أَبِي حُمَيْدٍ السَّاعِدِيِّ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: اسْتَعْمَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا عَلَى صَدَقَاتِ بَنِي سُلَيْمٍ، يُدْعَى ابْنَ اللُّتْبِيَّةِ، فَلَمَّا جَاءَ حَاسَبَهُ، قَالَ: هَذَا مَالُكُمْ وَهَذَا هَدِيَّةٌ. فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «فَهَلَّا جَلَسْتَ فِي بَيْتِ أَبِيكَ وَأُمِّكَ، حَتَّى تَأْتِيَكَ هَدِيَّتُكَ إِنْ كُنْتَ صَادِقًا» ثُمَّ خَطَبَنَا، فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ، ثُمَّ قَالَ: «أَمَّا بَعْدُ، فَإِنِّي أَسْتَعْمِلُ الرَّجُلَ مِنْكُمْ عَلَى العَمَلِ مِمَّا وَلَّانِي اللَّهُ، فَيَأْتِي فَيَقُولُ: هَذَا مَالُكُمْ وَهَذَا هَدِيَّةٌ أُهْدِيَتْ لِي، أَفَلاَ جَلَسَ فِي بَيْتِ أَبِيهِ وَأُمِّهِ حَتَّى تَأْتِيَهُ هَدِيَّتُهُ، وَاللَّهِ لاَ يَأْخُذُ أَحَدٌ مِنْكُمْ شَيْئًا بِغَيْرِ حَقِّهِ إِلَّا لَقِيَ اللَّهَ يَحْمِلُهُ يَوْمَ القِيَامَةِ، فَلَأَعْرِفَنَّ أَحَدًا مِنْكُمْ لَقِيَ اللَّهَ يَحْمِلُ بَعِيرًا لَهُ رُغَاءٌ، أَوْ بَقَرَةً لَهَا خُوَارٌ، أَوْ شَاةً تَيْعَرُ» ثُمَّ رَفَعَ يَدَهُ حَتَّى رُئِيَ بَيَاضُ إِبْطِهِ، يَقُولُ: «اللَّهُمَّ هَلْ بَلَّغْتُ» بَصْرَ عَيْنِي وَسَمْعَ أُذُنِي.
अबू हुमैद साइदी (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक अज़्दी व्यक्ति, जिसे इब्न अल-लुतबिया कहा जाता था, को ज़कात का धन इकट्ठा करने का ज़िम्मेवार बनाया। जब वह वापस आया, तो बोला : यह आप लोगों का है और यह मुझे भेंट स्वरूप दिया गया है। यह देख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मिंबर पर खड़े हुए तथा अल्लाह की बड़ाई व प्रशंसा की और फ़रमाया : "मैं तुममें से किसी व्यक्ति को उनमें से किसी कार्य का ज़िम्मेवार बनाता हूँ, जिनकी ज़िम्मेवारी अल्लाह ने मुझे दी है और वह आकर कहता है कि यह आपका है और यह मुझे भेंट स्वरूप मिला है। यदि वह सच्चा है, तो वह क्यों अपने माता-पिता के घर बैठा नहीं रहा कि उसके पास (घर बैठे ही) भेंट आ जाते!! अल्लाह की क़सम, जो भी व्यक्ति किसी वस्तु को बिना अधिकार लेगा, वह क़यामत के दिन अल्लाह के सम्मुख उसे उठाए हुए आएगा। अतः, मैं तुममें से किसी ऐसे व्यक्ति को हरगिज़ नहीं पहचानूँगा, जो अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि ऊँट उठाए होगा, जो बिलबिला रहा होगा, गाय उठाए हुए होगा, जो राँभ रही होगी या बकरी उठाए हुए होगा, जो मिमया रही होगी।" फिर आपने दोनों हाथ उठाए, यहाँ तक कि आपके बगल की सफ़ेदी दिखाई देने लगी। फिर फ़रमाया : "ऐ अल्लाह, क्या मैंने पहुँचा दिया?"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري (9/ 28) (6979). صحيح مسلم (3/ 1463) (1832). جمهرة اللغة، أبوبكر الأزدي (2/ 1067). المعجم الوسيط، مجمع اللغة العربية (2/ 1065). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 305). تطرز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص166). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 234).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
हिबा तथा अतिय्या (दान)

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com