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तशरीह के साथ हदीसें

किसी इनसान पर किसी कारणवश आर्थित लेनदेन पर लगाया गया प्रतिबंध

1 हदीसें

जो अपना धन किसी ऐसे व्यक्ति के पास पाए, जो दिवालिया हो गया हो, तो वह दूसरे के मुक़ाबले में उसका अधिक हक़दार है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «من أدرك ماله بعينه عند رجل -أو إنسان- قد أفلس؛ فهو أحق به من غيره».
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "जो अपना धन किसी ऐसे व्यक्ति के पास पाए, जो दिवालिया हो गया हो, तो वह दूसरे के मुक़ाबले में उसका अधिक हक़दार है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जिसने अपना सामान किसी से बेचा, अमानत रखा या क़र्ज़ दिया और वह व्यक्ति दिवालिया घोषित हो गया, यानी उसके पूरे धन से उसके क़र्ज़ की अदायगी संभव न हो पा रही हो, तो ऐसी अवस्था में उक्त बेचने, अमानत रखने या क़र्ज़ देने वाला यदि हू-ब-हू अपना सामान उसके पास पाए, तो उसे ले सकता है, क्योंकि वह अन्य लोगों की तुलना में उसका अधिक हक़ रखता है।

हवाला

- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. -الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. -تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com