كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، كنوز إشبيليا، الرياض، الطبعة: الأولى1430هـ - 2009م. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، محمد علي بن البكري بن علان، نشر دار الكتاب العربي. شرح رياض الصالحين، محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الطبعة: الأولى، 1418 هـ - 1997م. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ.
तशरीह के साथ हदीसें
जब उहुद युद्ध का समय आ गया, तो मेरे पिता ने मुझे बुलाकर कहाः मुझे लगता है कि मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के उन साथियों के साथ क़त्ल कर दिया जाऊँगा, जो शूरु में ही शहीद होंगे।
عن جابر بن عبد الله رضي الله عنهما ، قال: لما حضرتْ أُحُدٌ دعاني أبي من الليل، فقال: ما أراني إلا مقتولا في أول من يُقتل من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم ، وإني لا أترك بعدي أعزَّ عليَّ منك غيرَ نَفْسِ رسول الله صلى الله عليه وسلم ، وإن عليَّ دَيْنًا فاقْضِ، واسْتَوْصِ بأَخَوَاتِكَ خيرًا، فأصبحنا، فكان أولَ قَتيل، ودَفَنْتُ معه آخرَ في قبره، ثم لم تَطِبْ نفسي أن أتركه مع آخر؛ فاستخرجتُه بعد ستة أشهر، فإذا هو كيوم وضعتُه غيرَ أُذنِهِ، فجعلته في قبر على حِدَةٍ.
जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि जब उहुद युद्ध का समय आ गया, तो मेरे पिता ने मुझे बुलाकर कहाः मुझे लगता है कि मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के उन साथियों के साथ क़त्ल कर दिया जाऊँगा, जो शूरु में ही शहीद होंगे। मैं अपने बाद अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सिवा किसी ऐसे व्यक्ति को छोड़कर नहीं जा रहा हूँ, जो मुझे तुमसे अधिक प्रिय हो। देखो, मुझपर कुछ क़र्ज़ है, तुम उसे उतार देना तथा अपनी बहनों के साथ अच्छे व्यवहार की वसीयत को क़बूल करना। (जाबिर कहते हैं कि) हमने सुबह की, तो सबसे पहले वही शहीद हुए और मैंने उनके साथ एक और व्यक्ति को एक ही क़ब्र में दफ़न कर दिया। फिर मेरे दिल को इस बात पर संतुष्टि नहीं मिली कि मैं उन्हें किसी और के साथ रहने दूँ। अतः, छह महीने बाद मैंने उन्हें निकाला, तो देखा कि कान के सिवा उनका पूरा शरीर वैसा ही था, जैसा मैंने उन्हें दफ़न करते समय रखा था। फिर मैंने उन्हें अलग क़ब्र में दफ़न कर दिया।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com