सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

आल-ए-बैत (अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के परिजनों) की फ़ज़ीलत

6 हदीसें

मुझे अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की किसी पत्नी पर उतनी ग़ैरत नहीं आई, जितनी ख़दीजा- रज़ियल्लाहु अन्हा- पर आई। हालाँकि मैंने उन्हें कभी देखा नहीं था। लेकिन आप उन्हें बहुत ज़्यादा याद करते थे।

عن عائشة رضي الله عنها قالت: «ما غِرْتُ على أحد من نساء النبي صلى الله عليه وسلم ما غِرْتُ على خديجة رضي الله عنها ، وما رأيتها قط، ولكن كان يُكثر ذِكْرَها، وربما ذبح الشَّاةَ، ثم يُقطعها أَعْضَاءً، ثم يَبْعَثُهَا في صَدَائِقِ خديجة، فربما قلت له: كأن لم يكن في الدنيا إلا خديجة! فيقول: «إنها كانت وكانت وكان لي منها وَلَدٌ». وفي رواية: وإن كان لَيَذْبَحُ الشَّاءَ، فيُهدي في خَلَائِلِهَا منها ما يَسَعُهُنَّ. وفي رواية: كان إذا ذَبَحَ الشَّاةَ، يقول: «أرسلوا بها إلى أصدقاء خديجة». وفي رواية: قالت: اسْتَأْذَنَتْ هالة بنت خويلد أخت خديجة على رسول الله صلى الله عليه وسلم فعرف استئذان خديجة، فارْتَاحَ لذلك، فقال: «اللهم هالة بنت خويلد».
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैंः मुझे अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की किसी पत्नी पर उतनी ग़ैरत नहीं आई, जितनी ख़दीजा- रज़ियल्लाहु अन्हा- पर आई। हालाँकि मैंने उन्हें कभी देखा नहीं था। लेकिन आप उन्हें बहुत ज़्यादा याद करते थे। कभी ऐसा भी होता कि बकरी ज़बह करते, उसके टुकड़े बनाते और ख़दीजा- रज़ियल्लाहु अन्हा- की सहेलियों को भेज देते। यह सब देखकर मैं कभी-कभार आपसे कह देतीः ऐसा लगता है कि दुनिया में ख़दीजा के सिवा कोई है ही नहीं! तो आप कहतेः "वह ऐसी थीं, ऐसी थीं और मुझे उनसे बच्चे भी हुए।" तथा एक रिवायत में हैः आप बकरी ज़बह करते और उसमें से उनकी सहेलियों को उतना भेज देते, जो उनके लिए काफ़ी हो। तथा एक रिवायत में हैः जब बकरी ज़बह करते, तो कहतेः "इसे ख़दीजा की सहेलियों को भेज दो।" तथा एक और रिवायत में हैः वह कहती हैंः ख़दीजा बिंत ख़ुवैलिद की बहन हाला बिंत ख़ुवैलिद अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आने की अनुमति तलब की, तो आप को ख़दीजा के अनुमति तलब करने का अंदाज़ याद आ गया और प्रसन्न हो उठे तथा कहाः "अल्लाह, यह तो हाला बिंत खुवैलिद हैं!"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने तमाम रिवायतों के साथ नक़ल किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي للمباركفورى، دار الكتب العلمية، بيروت. تطريز رياض الصالحين للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423 هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425 هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. شرح رياض الصالحين للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

हसन और हुसैन जन्नत के जवानों के सरदार हैं।

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «الحَسَن والحُسَيْن سَيِّدا شَباب أهْل الجنة».
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "हसन और हुसैन जन्नत के जवानों के सरदार हैं।"
इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि आपके दोनों नवासे हसन और हुसैन रज़ियल्लाहु अनहुमा, जो अली बिन अबू तालिब रज़ियल्लाहु अनहु तथा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की बेटी फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अनहा के बेटे हैं, मर्तबा और श्रेष्ठता के ऐतबार से, जवानी की अवस्था में मृत्यु को प्राप्त होने वाले और जन्नत में प्रवेश करने वाले तमाम लोगों के सरदार होंगे। इसका एक मतलब यह भी हो सकता है कि दोनों नबियों और ख़ुलफ़ा-ए-राशिदीन को छोड़कर तमाम जन्नती जवानों के सरदार होंगे।

फ़ायदे
  1. हसन तथा हुसैन रज़ियल्लाहु अनहुमा की एक स्पष्ट फ़ज़ीलत।
  2. इस हदीस के कई अर्थ बताए गए हैं। एक यह कि दोनों अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के मुँह से उस कथन के निकलते समय उस ज़माने में मौजूद जन्नत जाने वाले तमाम जवानों के सरदार होंगे। दूसरा यह कि दोनों नबियों एवं ख़लीफ़ों को छोड़ उन तमाम लोगों से उत्तम हैं, जिनकी कोई आम फ़ज़ीलत साबित न हो। तीसरा यह कि दोनों ऐसे लोगों को सरदार होंगे, जिनके अंदर दिलेरी, उदारता एवं बहादुरी आदि जवानों के गुण हों। यानी मुराद जवानी नहीं है। क्योंकि हसन एवं हुसैन रज़ियल्लाहु अनहुमा की मृत्यु अधेड़ उम्र में हुई थी।
हवाला

سنن الترمذي (6/ 113) (3768). مسند أحمد (17/ 31) (10999). حاشية السندي على سنن ابن ماجه، محمد بن عبد الهادي التتوي (1/ 56). تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي، محمد المباركفوري (10/ 178). المصباح المنير في غريب الشرح الكبير، لأحمد الفيومي (1/ 294).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

इसे देखो, मुझसे मच्छर को मारने के बारे में पूछ रहा है, जबकि इन्हीं लोगों ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के नवासे का वध किया है। हालाँकि ख़ुद मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते सुना हैः "हसन और हुसैन दोनों दुनिया में मेरे पुष्प हैं।"

عن ابن أبي نعم، قال: كنتُ شاهدا لابن عمر، وسأله رجل عن دم البَعُوض، فقال: ممن أنت؟ فقال: من أهل العراق، قال: انظروا إلى هذا، يسألني عن دم البَعُوض، وقد قتلوا ابن النبي صلى الله عليه وسلم، وسمعتُ النبي صلى الله عليه وسلم يقول: «هما رَيْحَانَتاي من الدنيا».
इब्न अबू नुअम कहते हैं कि मैं अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- के पास उपस्थित था। एक व्यक्ति ने उनसे मच्छर को मारने के बारे में पूछ लिया, तो अब्दुल्लाह -रज़ियल्लाहु अंहु- ने उससे कहाः तुम कहाँ के रहने वाले हो? उसने कहाः इराक़ का। फ़रमायाः इसे देखो, मुझसे मच्छर को मारने के बारे में पूछ रहा है, जबकि इन्हीं लोगों ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के नवासे का वध किया है। हालाँकि कि ख़ुद मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते सुना हैः "हसन और हुसैन दोनों दुनिया में मेरे पुष्प हैं।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. الإفصاح عن معاني الصحاح، يحيى بن هبيرة الذهلي الشيباني، تحقيق: فؤاد عبد المنعم أحمد، الناشر: دار الوطن، سنة النشر: 1417هـ. منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، حمزة محمد قاسم، راجعه: عبد القادر الأرناؤوط، عني بتصحيحه ونشره: بشير محمد عيون، الناشر: مكتبة دار البيان، دمشق، مكتبة المؤيد، الطائف، الطبعة: 1410هـ، 1990م. معجم اللغة العربية المعاصرة، أحمد مختار عبد الحميد عمر بمساعدة فريق عمل، الناشر: عالم الكتب، الطبعة: الأولى 1429هـ، 2008م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

एक दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हसन -रज़ियल्लाहु अन्हु- को लेकर बाहर आए, उन्हें साथ लेकर मिंबर के ऊपर गए और फ़रमायाः "मेरा यह बेटा सरदार है। हो सकता है कि अल्लाह इसके द्वारा दो मुस्लिम गिरोहों के बीच सुलह करा दे।"

عن أبي بكرة رضي الله عنه قال: أخرج النبي صلى الله عليه وسلم ذات يوم الحسن، فصعد به على المنبر، فقال: «ابني هذا سيِّد، ولعلَّ اللهَ أن يُصلحَ به بين فئتين من المسلمين».
अबू बकरा -रज़ियल्लाहु अंहु- कहते हैं कि एक दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हसन -रज़ियल्लाहु अन्हु- को लेकर बाहर आए, उन्हें साथ लेकर मिंबर के ऊपर गए और फ़रमायाः "मेरा यह बेटा सरदार है। हो सकता है कि अल्लाह इसके द्वारा दो मुस्लिम गिरोहों के बीच सुलह करा दे।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

एक दिन अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हसन -रज़ियल्लाहु अनहु- को, जो उस समय छोटे बच्चे थे, अपने साथ मस्जिद ले आए। फिर उनको लेकर मिंबर पर चढ़ गए और लोगों को बताया कि उनका बेटा हसन सरदार है, सम्मानित कुल से है, शिष्ट नसब वाला है, धरती के ऊपर पाए जाने वाले सबसे उत्कृष्ट घराने से संबंध रखता है और उच्च एवं महान अल्लाह इसके ज़रिए मुसलमानों के दो युद्धरत समूहों के बीच सुलह करा देगा तथा इन दो समूहों में सुलह होने के बाद मुसलमानों को एक व्यापक बिखराव से मुक्ति मिल जाएगी। इस बात में किसी संदेह की गुंजाइश नहीं है कि यह हदीस अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के अल्लाह के नबी होने की एक बड़ी निशानी है। क्योंकि आपने अपने नवासे हसन बिन अली -रज़ियल्लाहु अनहु- के द्वारा मुसलमानों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने, उनके बिगड़े हुए रिश्तों को सुधारने और दो बहुत बड़े समूहों के बीच उत्पन्न झगड़े को ख़त्म करने का जो बड़ा काम बाद में होने वाला था, उसकी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। इस महत्वपूर्ण भविष्यवाणी को धरा पर उतरते हुए उस समय देखा गया, जब सन 40 अथवा 41 हिजरी को हसन -रज़ियल्लाहु अनहु- ने खुद को ख़िलाफ़त से अलग कर लिया और मुआविया -रज़ियल्लाहु अनहु- को ख़िलाफ़त सौंप दी, जो एक बहुत बड़े बिखराव तथा रक्तपात की समाप्ति का कारण बना।

हवाला

صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. كشف المشكل من حديث الصحيحين، جمال الدين أبو الفرج عبد الرحمن بن الجوزي، تحقيق: علي حسين البواب، الناشر: دار الوطن، الرياض. منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، حمزة محمد قاسم، راجعه: عبد القادر الأرناؤوط، عني بتصحيحه ونشره: بشير محمد عيون، الناشر: مكتبة دار البيان، دمشق، مكتبة المؤيد، الطائف، الطبعة: 1410هـ، 1990م. شرح صحيح البخاري لابن بطال، تحقيق: أبي تميم ياسر بن إبراهيم، نشر: مكتبة الرشد، الرياض، السعودية، الطبعة: الثانية 1423هـ، 2003م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जब इबराहीम -रज़ियल्लाहु अन्हु- की मृत्यु हुई, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "जन्नत में उसके लिए एक दूध पिलाने वाली निर्धारित कर दी गई है।"

عن البراء رضي الله عنه قال: لما تُوفِّي إبراهيم -عليه السلام-، قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إنَّ له مُرْضِعًا في الجنة».
बरा बिन आज़िब -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि जब इबराहीम -रज़ियल्लाहु अन्हु- की मृत्यु हुई, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "जन्नत में उसके लिए एक दूध पिलाने वाली निर्धारित कर दी गई है।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ. منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، لحمزة محمد قاسم، راجعه: الشيخ عبد القادر الأرناؤوط، عني بتصحيحه ونشره: بشير محمد عيون، الناشر: مكتبة دار البيان، دمشق - الجمهورية العربية السورية، مكتبة المؤيد، الطائف -المملكة العربية السعودية- عام النشر: 1410 هـ - 1990 م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

''जब किसी मुसलमान को कोई दुख पहुँचता है, और वह यह दुआएँ पढ़ता है, जिनका अल्लाह ने आदेश दिया है : (हम सब अल्लाह के हैं और हमें उसी की ओर लौटकर जाना है।) [सूरा अल-बक़रा : 156], (हे अल्लाह! मुझे मेरे दुःख का प्रतिफल दे और उसका बेहतर बदल दे।), तो अल्लाह उसे पिछले की जगह पर पिछले से अच्छा बदल प्रदान करता है।''

عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ أُمِّ المؤْمنينَ رَضيَ اللهُ عنها أَنَّهَا قَالَتْ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ: «مَا مِنْ مُسْلِمٍ تُصِيبُهُ مُصِيبَةٌ فَيَقُولُ مَا أَمَرَهُ اللهُ: {إِنَّا لِلهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ} [البقرة: 156]، اللَّهُمَّ أْجُرْنِي فِي مُصِيبَتِي، وَأَخْلِفْ لِي خَيْرًا مِنْهَا، إِلَّا أَخْلَفَ اللهُ لَهُ خَيْرًا مِنْهَا»، قَالَتْ: فَلَمَّا مَاتَ أَبُو سَلَمَةَ قُلْتُ: أَيُّ الْمُسْلِمِينَ خَيْرٌ مِنْ أَبِي سَلَمَةَ؟ أَوَّلُ بَيْتٍ هَاجَرَ إِلَى رَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم، ثُمَّ إِنِّي قُلْتُهَا، فَأَخْلَفَ اللهُ لِي رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم.
मुसलमानों की माता उम्म-ए-सलमा -रज़ियल्लाहु अनहा- से वर्णित है, वह कहती हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़रमाते हुए सना है : ''जब किसी मुसलमान को कोई दुख पहुँचता है, और वह यह दुआएँ पढ़ता है, जिनका अल्लाह ने आदेश दिया है : (हम सब अल्लाह के हैं और हमें उसी की ओर लौटकर जाना है।) [सूरा अल-बक़रा : 156], (हे अल्लाह! मुझे मेरे दुःख का प्रतिफल दे और उसका बेहतर बदल दे।), तो अल्लाह उसे पिछले की जगह पर पिछले से अच्छा बदल प्रदान करता है।'' वह कहती हैं : जब अबू सलमा की मौत हो गई, तो मैंने सोचा कि कौन-सा मुसलमान अबू सलमा से अच्छा हो सकता है? उनका परिवार पहला परिवार था, जिसने रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की ओर हिजरत किया! फिर मैंने यह दुआएँ पढ़ीं, तो अल्लाह ने उनके बदले मुझे अपने रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को प्रदान किया।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- कहती हैं कि उन्होंने एक दिन अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : जब किसी मुसलमान पर कोई मुसीबत आती है और वह कहता है यह वाक्य जो अल्लाह ने उसके लिए पसंद किया है : {हम अल्लाह ही के हैं और हमें उसी की ओर लौटकर जाना है।} [सूरा बक़रा : 156], ऐ अल्लाह! मुझे इस मुसीबत पर सब्र करने का प्रतिफल प्रदान कर और इसका मुझे बेहतर बदला दे, तो अल्लाह उसे बेहतर बदला प्रदान करता है। उनका कहना है कि जब उनके पति अबू सलमा की मृत्यु हो गई, तो मैंने अपने दिल में कहा कि अबू सलमा से बेहतर भला कौन-सा मुसलमान हो सकता है? उनका घर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की ओर हिजरत करने वाला पहला घर था। तब अल्लाह ने मेरी मदद की और मैं ने यह वाक्य कह दिया, तो अल्लाह ने अबू सलमा के स्थान पर मुझे अल्लाह के रसूल को दे दिया, जो निश्चित रूप से उनसे बेहतर थे।

फ़ायदे
  1. इस हदीस में मुसीबत के समय धैर्य न खोने और सब्र से काम लेने का आदेश दिया गया है।
  2. मुसीबत के समय अल्लाह से दुआ करनी चाहिए, क्योंकि उसके पास हर चीज़ का बदल मौजूद है।
  3. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आदेश का पालन करना ज़रूरी है, यद्यपि उसकी हिकमत समझ में न भी आए।
  4. सारी भलाई अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आदेश के अनुपालन में है।
हवाला

صحيح مسلم (2/ 631) (918).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com