حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ، حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، عَنْ عُمَارَةَ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ " قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنْ ذَهَبَ يَخْلُقُ كَخَلْقِي، فَلْيَخْلُقُوا ذَرَّةً، أَوْ لِيَخْلُقُوا حَبَّةً أَوْ شَعِيرَةً ".
Narrated Abu Huraira:I heard the Prophet (ﷺ) saying, "Allah said, 'Who are most unjust than those who try to create something like My creation? I challenge them to create even a smallest ant, a wheat grain or a barley grain
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।